New Income Tax Rule: भारत में 1 अप्रैल 2026 से नया इनकम टैक्स एक्ट लागू होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने 64 साल पुराने 'इनकम टैक्स एक्ट 1961' को रिटायर करने का फैसला कर लिया है। इसकी जगह अब एक नया, आधुनिक और सरल 'इनकम टैक्स एक्ट' लागू किया जा रहा है। इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य टैक्स की जटिलताओं को खत्म करना और टैक्सपेयर्स के लिए प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है। नए इनकम टैक्स एक्ट में 4 सबसे बड़े बदलाव क्या होंगे? आइए जानते हैं
1. 'प्रीवियस ईयर' और 'असेसमेंट ईयर' का झंझट खत्म
अब तक इनकम टैक्स में दो अलग-अलग सालों का गणित समझना पड़ता था। जिस साल आप कमाते थे उसे 'प्रीवियस ईयर' और जिस साल आप टैक्स रिटर्न फाइल करते थे उसे 'असेसमेंट ईयर' कहा जाता था। आम आदमी के लिए यह हमेशा कंफ्यूजन भरा रहता था।
2. सोशल मीडिया (WhatsApp/Instagram) एक्सेस
हाल के दिनों में चर्चा थी कि टैक्स अधिकारी अब आपकी सोशल मीडिया एक्टिविटी पर नजर रखेंगे। वह आपके इंस्टाग्राम पोस्ट और दूसरे सोशल मीडया हैंडल को एक्ससेच कर पाएंगे। हालांकि यह पूरी तरह सच नहीं है। दरअसल नए कानून में डिजिटल एक्सेस की शक्ति दी गई है, लेकिन यह केवल 'सीरियस टैक्स इवेशन' यानी टैक्स चोरी के गंभीर मामलों के लिए है।
टैक्स ऑफिसर ऐसे ही किसी का पर्सनल WhatsApp या Instagram नहीं खोल सकते। इसके लिए विभाग को प्रॉपर सर्च वारंट और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। ईमानदार करदाताओं को इससे घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
3. देरी से ITR भरने पर भी मिलेगा TDS रिफंड
मिडिल क्लास और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह सबसे बड़ी राहत की खबर है। पुराने कानून के तहत, अगर आप रिटर्न फाइल करने की समय सीमा चूक जाते थे, तो आपका टीडीएस (TDS) रिफंड फंस जाता था। लेकिन नए नियम में अब 'बिलेटेड रिटर्न' यानी देरी से रिटर्न फाइल करने पर भी आपको अपना रिफंड वापस मिल जाएगा।
हालांकि, इसके लिए आपको लेट फीस चुकानी होगी। अगर आपकी आय 5 लाख रुपये से कम है, तो 1,000 रुपये और इससे अधिक आय पर 5,000 रुपये की लेट फीस लगेगी। लेकिन अच्छी बात यह है कि आपका मेहनत का पैसा अब डूबेगा नहीं।
4. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) पर अब लगेगा टैक्स
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को अब तक निवेश का सबसे सुरक्षित और टैक्स-फ्री जरिया माना जाता था, लेकिन नए एक्ट में इसके नियम बदल दिए गए हैं। नए इनकम टैक्स के मुताबिक, अगर आपने SGB को स्टॉक मार्केट से खरीदा है, तो उस पर होने वाले मुनाफे पर अब 12.5% की दर से टैक्स देना होगा। पहले यह पूरी तरह टैक्स फ्री था। हालांकि, बॉन्ड को मैच्योरिटी तक होल्ड करने वालों के लिए टैक्स छूट की राहत जारी रह सकती है।
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