Income Tax Return: अपने ITR में न करें ये 7 गलतियां, वरना आ जाएगा इनकम टैक्स विभाग का नोटिस
Income Tax Reutrn: ITR फाइल करते समय छोटी सी गलती भी आयकर विभाग का नोटिस दिला सकती है। AIS, सैलरी, ब्याज आय, TDS, बड़े लेनदेन और कैपिटल गेन से जुड़ी गलतियां सबसे ज्यादा जांच के दायरे में आती हैं। रिटर्न भरने से पहले इन 7 बातों की जांच जरूर करें।
कुछ टैक्सपेयर्स TDS या TCS क्रेडिट का दावा करते समय गलती कर बैठते हैं।
Income Tax Reutrn: आयकर विभाग अब ऑटोमेटेड डेटा मैचिंग, एआई आधारित जोखिम आकलन और सिस्टम आधारित वेरिफिकेशन का तेजी से इस्तेमाल कर रहा है। ऐसे में टैक्सपेयर्स के लिए यह सुनिश्चित करना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है कि उनकी आयकर रिटर्न (ITR) में दी गई जानकारी विभाग के पास मौजूद रिकॉर्ड से पूरी तरह मेल खाती हो।
इसी वजह से Annual Information Statement (AIS) अब आयकर जांच का एक बेहद अहम दस्तावेज बन चुका है। इसमें बैंक, ब्रोकर, रजिस्ट्रार, जीएसटी सिस्टम और दूसरी रिपोर्टिंग संस्थाओं से मिली वित्तीय जानकारी एक जगह दिखाई देती है। इससे आयकर विभाग को किसी व्यक्ति की वित्तीय गतिविधियों की व्यापक तस्वीर मिल जाती है।
हालांकि मुंबई के चार्टर्ड अकाउंटेंट डॉ. सुरेश सुराणा का कहना है कि टैक्सपेयर्स को सिर्फ AIS देखकर ITR फाइल नहीं करनी चाहिए। उनके मुताबिक कई बार AIS में जानकारी अधूरी हो सकती है, एक ही एंट्री दो बार दिखाई दे सकती है या रिपोर्टिंग में गलती भी हो सकती है।
1. सिर्फ AIS पर भरोसा करना सही नहीं
डॉ. सुरेश सुराणा के अनुसार ITR दाखिल करने से पहले AIS में मौजूद जानकारी का मिलान अकाउंट बुक्स, बैंक स्टेटमेंट, फॉर्म 26AS, फॉर्म 16 या 16A, निवेश रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेजों से जरूर करना चाहिए।
अगर मिलान के दौरान कोई अंतर दिखाई देता है, तो उसकी वजह समझनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर सही जानकारी के साथ उसे ITR में दिखाना चाहिए। साथ ही संबंधित दस्तावेज भी सुरक्षित रखने चाहिए। इससे आयकर विभाग की जांच या नोटिस मिलने का जोखिम कम हो सकता है।
2. अब सिस्टम खुद पकड़ लेता है गड़बड़ी
Taxspanner (Zaggle कंपनी) के को-फाउंडर और सीईओ सुधीर कौशिक का कहना है कि कई टैक्सपेयर्स यह मान लेते हैं कि आंशिक जानकारी देना काफी है। लेकिन अब AIS आधारित डेटा एनालिटिक्स सिस्टम आपकी घोषित आय, खर्च, निवेश और वित्तीय लेनदेन के बीच किसी भी गड़बड़ी को अपने आप पहचान सकता है।
यही वजह है कि रिटर्न दाखिल करने के बाद नोटिस या अतिरिक्त जांच की संभावना पहले के मुकाबले काफी बढ़ गई है।
3. सैलरी की जानकारी में अंतर
अगर ITR में दिखाई गई सैलरी, फॉर्म 16, नियोक्ता द्वारा जमा किए गए TDS रिटर्न या AIS में दर्ज सैलरी से अलग होती है, तो आयकर विभाग सवाल पूछ सकता है।
ऐसी स्थिति में विभाग यह जानना चाह सकता है कि कहीं आय कम तो नहीं दिखाई गई है। इसलिए सैलरी से जुड़े सभी आंकड़ों का मिलान करना जरूरी है।
4. ब्याज आय छूट गई तो आ सकता है नोटिस
बचत खाते, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), रिकरिंग डिपॉजिट (RD) और आयकर रिफंड पर मिलने वाला ब्याज अक्सर AIS में दिखाई देता है। इसकी जानकारी बैंक और वित्तीय संस्थान सीधे आयकर विभाग को देते हैं।
अगर यह ब्याज आय ITR में पूरी तरह नहीं दिखाई गई या आंशिक रूप से दिखाई गई, तो विभाग मिसमैच नोटिस भेज सकता है।
5. TDS और TCS का गलत दावा
कुछ टैक्सपेयर्स TDS या TCS क्रेडिट का दावा करते समय गलती कर बैठते हैं। यदि ITR में दावा किया गया TDS या TCS, फॉर्म 26AS या AIS में दिखाई गई जानकारी से ज्यादा है, तो आयकर विभाग रिफंड में कटौती कर सकता है या स्पष्टीकरण मांग सकता है।
इसलिए TDS और TCS का दावा करने से पहले सभी रिकॉर्ड का मिलान करना जरूरी है।
6. बड़े लेनदेन छिपाना पड़ सकता है भारी
म्यूचुअल फंड में बड़ा निवेश, प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री, भारी क्रेडिट कार्ड भुगतान, विदेश में पैसा भेजना या शेयर बाजार के बड़े लेनदेन जैसी जानकारियां AIS में दर्ज हो सकती हैं।
अगर ये लेनदेन आपकी घोषित आय से मेल नहीं खाते या ITR में सही तरीके से नहीं दिखाए गए हैं, तो आयकर विभाग जांच शुरू कर सकता है।
7. कैपिटल गेन की गलत गणना भी जोखिम
शेयर, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी या दूसरी पूंजीगत संपत्तियों की बिक्री से होने वाला मुनाफा अक्सर ब्रोकर और अन्य संस्थाओं द्वारा AIS में रिपोर्ट किया जाता है।
अगर ITR में कैपिटल गेन की गणना गलत की गई हो या उसे पूरी तरह शामिल नहीं किया गया हो, तो विभाग स्पष्टीकरण मांग सकता है और जांच शुरू हो सकती है।
ITR फाइल करने से पहले क्या करें?
विशेषज्ञों का कहना है कि ITR भरने से पहले AIS, फॉर्म 26AS, फॉर्म 16, बैंक स्टेटमेंट और निवेश से जुड़े सभी दस्तावेजों का मिलान जरूर कर लेना चाहिए। इससे गलतियां समय रहते पकड़ में आ जाती हैं और बाद में नोटिस या जांच का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है।
आज के डिजिटल टैक्स सिस्टम में सिर्फ रिटर्न भरना काफी नहीं है। यह भी जरूरी है कि उसमें दी गई हर जानकारी आयकर विभाग के रिकॉर्ड से मेल खाती हो।
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