Income Tax Return: फ्रीलांसर्स, इनफ्लूएंसर्स, कंटेंट क्रिएटर्स और दूसरे गिग वर्कर्स को इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने में कुछ अतिरिक्त बातों का ख्याल रखना होता है। रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन नजदीक आ रही है। ऐसे में उन्हें इस बारे में अभी से जान लेना जरूरी है।
इनकम के एक से ज्यादा स्रोत
फ्रीलांसर्स, इनफ्लूएंसर्स, कंटेंट क्रिएटर्स और दूसरे गिग वर्कर्स को आम तौर पर कई स्रोतों से इनकम होती है। इनमें ब्रांड कोलैबोरेशन, प्लेटफॉर्म पेमेंट्स, कंसल्टिंग एसाइनमेंट्स और डिजिटल कंटेंट मॉनेटाइजेशन शामिल होते हैं। इसलिए इनकम की सही रिपोर्टिंग और रिकॉर्ड-कीपिंग जरूरी हो जाती है। इनकम की गलत रिपोर्टिंग पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का नोटिस आ सकता है।
ITR-3 या ITR-4 का इस्तेमाल
टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे टेक्सपेयर्स को इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए ITR-3 या ITR-4 का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्हें यह भी ध्यान में रखना होगा कि रिटर्न में बताया गया प्रोफेशन का कोड सही होना चाहिए। यह उनके जीएसटी और एमएसएमई रिकॉर्ड से मैच करना चाहिए।
एडवान्स टैक्स का भी ध्यान
फ्रालांसर्स और गिग वर्कर्स को फाइनेंशियल ईयर के दौरान एडवान्स टैक्स का पेमेंट भी करना पड़ सकता है। शर्ते पूरी करने वाले प्रोफेशनल्स और स्मॉल बिजनेसेज प्रजिम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम (सेक्शन 44एडीए या 44एडी) का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह स्कीम टैक्सपेयर को अपनी रिसीट्स का कुछ फीसदी इनकम के रूप में डेक्लेयर करने की इजाजत देती है। इससे उन्हें बुक्स ऑफ अकाउंट्स मेंटेन करने की जरूरत नहीं पड़ती है।
जीएसटी का कंप्लायंस भी जरूरी
फ्रीलांसर्स और इनफ्लूएंसर्स को इनकम टैक्स के अलावा जीएसटी की अपनी देनदारी का भी ध्यान रखना जरूरी है। प्रोफेशनल एक्सपेंसेज को बतौर डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है। लेकिन, इसके लिए डॉक्युमेंट जरूरी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि टैक्सपेयर्स को उन एक्सपेंसेज को पहचानना जरूरी है, जिनका संबंध उनके प्रोफेशन और बिजनेस से है। उनका रिकॉर्ड मेंटेन करना भी जरूरी है।
फॉर्म 26एएस और AIS के डेटा का मिलान
फ्रीलांसर्स और गिग वर्कर्स को रिटर्न फाइल करने से पहले फॉर्म 26एएस और एआईएस के डेटा को मैच कराना जरूरी है। पेमेंट्स पर काटा गया टैक्स फॉर्म 26एएस और एआईएस में दिखना चाहिए। अगर डेटा में किसी तरह का मिसमैच है तो रिटर्न फाइल करने से पहले उसे करेक्ट कराना जरूरी है।
ब्रांड्स से मिले प्रोडक्ट्स और सैंपल्स पर टैक्स
टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि फ्रीलांसर्स और गिग वर्कर्स को यह समझने की जरूरत है कि ब्रांड्स से मिले प्रोडक्ट्स और फ्री सैंपल्स भी टैक्स के दायरे में आते हैं। उनकी मार्केट वैल्यू के हिसाब से टैक्स चुकाना जरूरी है। अगर कोई टैक्सपेयर इनकम कम दिखाता है या नहीं दिखाता है तो उसे इनकम टैक्स का नोटिस मिल सकता है।