Income Tax Return: रिटर्न फाइल करने में इन 7 बातों का रखें ध्यान, नहीं आएगा इनकम टैक्स का नोटिस

Income Tax Return: टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि टैक्सपेयर्स को अपनी इनकम और टैक्स क्रेडिट के डेटा को फॉर्म 26एएस और AIS के डेटा से भी मैच करा लेना चाहिए। इससे रिटर्न फाइल करने में गलती होने की आशंका और कम हो जाती है। इससे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का नोटिस आने का डर भी नहीं रह जाता है

अपडेटेड Jun 12, 2026 पर 4:28 PM
कई टैक्सपेयर्स जल्दबाजी में रिटर्न फाइल करते हैं, जिससे गलती होने की संभावना बढ़ जाती है।

Income Tax Return: इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख नजदीक आ रही है। कंपनियों (एंप्लॉयर्स) ने एंप्लॉयीज को फॉर्म 16 जारी करने शुरू कर दिए हैं। अगर आप सैलरीड टैक्सपेयर्स हैं तो इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए फॉर्म 16 जरूरी है। फॉर्म 16 में एंप्लॉयी की ग्रॉस सैलरी, टैक्सेबल सैलरी, टीडीएस और टैक्स लायबिलिटी जैसी जानकारियां होती हैं। इसमें दिए गए डेटा के आधार पर टैक्स फाइल करने से गलती होने की आशंका कम होती है।

टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि टैक्सपेयर्स को अपनी इनकम और टैक्स क्रेडिट के डेटा को फॉर्म 26एएस और AIS के डेटा से भी मैच करा लेना चाहिए। इससे रिटर्न फाइल करने में गलती होने की आशंका और कम हो जाती है। इससे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का नोटिस आने का डर भी नहीं रह जाता है। कई टैक्सपेयर्स जल्दबाजी में रिटर्न फाइल करते हैं। ऐसा करना ठीक नहीं है।

एक्सपर्ट्स रिटर्न फाइल करने में इन 7 बातों का खास ध्यान रखने की सलाह देते हैं:


1. सही आईटीआर फॉर्म का चुनाव

अलग-अलग तरह के टैक्सपेयर्स के लिए Income Tax Return के अलग-अलग फॉर्म होते हैं। इसलिए रिटर्न फाइल करने से पहले आपको यह पता कर लेना चाहिए कि आपको किस आईटीआर फॉर्म का इस्तेमाल करना है।

2. इनकम के सभी स्रोतों की जानकारी

कई टैक्सपेयर्स डिविडेंड इनकम, इंटरेस्ट इनकम, रेंटल इनकम को इनकम टैक्स रिटर्न में डिसक्लोज करना जरूरी नहीं समझते हैं। रिटर्न में किसी इनकम की जानकारी छुपाने से डिपार्टमेंट का नोटिस आ सकता है।

3. एआईएस और फॉर्म 26एएस के डेटा को मैच करा लें

अगर आपके एआईएस और फॉर्म 26एएस के डेटा आपस में मैच नहीं करते हैं तो इससे रिटर्न फाइल करने में गलती हो सकती है। ऐसा होने पर आपको इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का नोटिस आ सकता है।

4. डिडक्शन क्लेम करने में सावधानी

कई टैक्सपेयर्स टैक्स लायबिलिटी घटाने के लिए डिडक्शंस क्लेम करते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसमें सावधानी जरूरी है। अगर कोई ऐसा डिडक्शन क्लेम करता है, जिसका वह हकदार नहीं है तो उसे डिपार्टमेंट का नोटिस आ सकता है।

5. कैपिटल गेंस की सही जानकारी

कई लोग प्रॉपर्टी, शेयर, म्यूचुअल फंड्स बेचने से हुए कैपिटल गेंस की जानकारी रिटर्न में देने से घबराते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कैपिटल गेंस की सही जानकारी देना जरूरी है। अगर कोई टैक्सपेयर्स कैपिटल गेंस की गलत जानकारी देता है या जानकारी छुपाता है तो उसे नोटिस आ सकता है।

6. विदेश में एसेट्स की जानकारी

अगर में विदेश में कोई एसेट्स है या विदेश से कोई इनकम होती है तो टैक्सपेयर्स को इस बारे में रिटर्न में बताना होगा। ऐसा नहीं करने से इनकम टैक्स का नोटिस आ सकता है।

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7. रिटर्न को ई-वेरिफाय करें

टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि रिटर्न फाइल करने के बाद उसे ई-वेरिफाय करना बेहद जरूरी है। ऐसा नहीं करने पर डिपार्टमेंट रिटर्न को इनवैलिड मान लेगा। इससे रिटर्न की प्रोसेसिंग नहीं होगी। यह माना जाएगा कि टैक्सपेयर ने रिटर्न फाइल नहीं किया।

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