Income Tax Return: इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन नजदीक आ रही है। रिटर्न फाइल करने से पहले इस बार ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। इसकी वजह यह है कि रिटर्न में थोड़ी सी गड़बड़ी या गलती से आगे बड़ा झमेला खड़ा हो सकता है। पिछले साल ऐसे रिटर्न की प्रोसेसिंग में काफी देर हुई थी, जिनमें गड़बड़ी पाई गई थी। सबसे ज्यादा मामले इनकम मिसमैच के थे। इस वजह से लाखों टैक्सपेयर्स का रिफंड फंस गया था। कई टैक्सपेयर्स को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का नोटिस मिला था।
अब इनकम में मिसमैच आसानी से पकड़ में आ रहा
टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने डेटा-मैचिंग सिस्टम को काफी स्ट्रॉन्ग बना दिया है। इसके लिए एआई आधारित रिस्क एसेसमेंट और सिस्टम आधारित वेरिफिकेशन का इस्तेमाल हो रहा है। इससे इनकम में मिसमैच आसानी से पकड़ में आ रहा है। अगर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास उपलब्ध टैक्सपेयर की इनकम का अमाउंट उसके रिटर्न से मैच नहीं करता है तो इसका मतलब है कि बड़ी समस्या खड़ी होने वाली है।
एआईएस को इनकम टैक्स की वेबसाइट से डाउनलोड कर लें
जानकारों का कहना है कि इनकम मिसमैच की समस्या से बचने के लिए टैक्सपेयर्स कुछ खास बातों का ध्यान रख सकते हैं। टैक्सपेयर्स को यह समझने की जरूरत है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास टैक्सपेयर का एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) होता है। इसमें टैक्सपेयर की हर छोटी-बड़ी इनकम की जानकारी होती है। अच्छी बात यह है कि एआईएस इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर उपलब्ध है। रिटर्न फाइल करने से पहले टैक्सपेयर को इसे डाउनलोड कर अपनी इनकम की डिटेल्स को चेक कर लेना जरूरी है।
एआईएस में टैक्सपेयर के फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन की सभी जानकारी शामिल
AIS में संबंधित वित्त वर्ष के दौरान टैक्सपेयर के फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन की हर जानकारी होती है। इनमें सैलरी, इंटरेस्ट इनकम, डिविडेंड, सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन, म्यूचुअल फंड इनवेस्टमेंट, टीडीएस, टीसीएस, विदेश में भेजा गया पैसा, प्रॉपर्टी का ट्रांजेक्शन सहित कई चीजें शामिल हैं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास ये जानकारियां बैंक, म्यूचुअल फंड हाउसेज सहित कई स्रोतों से आती है।
रिटर्न फाइल करने से पहले छोटी-बड़ी हर जानकारी को चेक कर लें
रिटर्न फाइल करने से पहले एआईएस में दी गई इनकम सहित सभी जानकारियां चेक करना जरूरी है। अगर कोई जानकारी आपको गलत दिखती है तो आप उसे ठीक करा सकते हैं। सीए सुरेश सुराणा का कहना है कि एआईएस में दी गई जानकारी को बैंक अकाउंट स्टेटमेंट, फॉर्म 26एएस, फॉर्म 16 से भी चेक कर लेना जरूरी है। अगर टैक्सपेयर नौकरी करता है और उसकी इनकम का मुख्य स्रोत सैलरी है तो एआईएस में सैलरी से इनकम का अमाउंट फॉर्म 16 में इनकम के अमाउंट से मैच करना चाहिए।
ये जानकारियां आपके रिटर्न से जरूर मैच करनी चाहिए
म्यूचुअल फंड इनवेस्टमेंट, प्रॉपर्टी की खरीद या बिक्री, क्रेडिट कार्ड से बड़ा पेमेंट, फॉरेन रेमिटेंसेज और सिक्योरिटीज से जुड़े ट्रांजेक्शंस की एआईएस में शामिल जानकारियां आपके रिटर्न से मैच होनी चाहिए। अगर ये मैच नहीं करती हैं तो जांच में इसका पता लग जाएगा। ऐसे में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट टैक्सपेयर्स से सवाल पूछ सकता है। जरूरत पड़ने पर नोटिस भी इश्यू कर सकता है।
डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।