Income Tax Return: आईटीआर में कोई इनकम बताना भूल गए, कोई गलती कर दी? तो 31 मार्च तक फाइल कर सकते हैं अपडेटेड रिटर्न

अपडेटेड इनकम टैक्स रिटर्न (ITR-U) का प्रावधान इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 139(8ए) में शामिल है। यह टैक्सपेयर्स को रिटर्न में गलती ठीक करने, नहीं बताई गई इनकम को बताने या पहले फाइल किए गए रिटर्न को अपडेट करने की सुविधा देता है

अपडेटेड Mar 27, 2026 पर 7:15 PM
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पेडेट रिटर्न फाइल करने से पेनाल्टी या कानूनी झमेले में पड़ने से बचा जा सकता है।

अगर इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) में आप किसी इनकम को बताना भूल गए हैं या कोई गलत जानकारी दी है तो उसे ठीक करने का एक मौका बचा है। आप उसे 31 मार्च तक ठीक कर सकते हैं। इसके लिए आपको अपडेटेड रिर्न (आईटीआर-यू) फाइल करना होगा। इसकी डेडलाइन 31 मार्च है, जो काफी करीब आ गई है। अपेडेट रिटर्न फाइल करने से पेनाल्टी या कानूनी झमेले में पड़ने से बचा जा सकता है।

अपडेटेड आईटीआर का मतलब क्या है?

किसी टैक्सपेयर ने पहले इनकम टैक्स रिटर्न फाइल नहीं किया है तो भी वह संबंधित एसेसमेंट ईयर खत्म होने के 48 महीनों के अंदर अपडेटेड रिटर्न फाइल कर सकता है। इसका मतलब है कि एसेसमेंट ईयर 2021-22 का अपडेटेड रिर्न 31 मार्च, 2026 तक फाइल किया जा सकता है। इसके बाद ऐसे टैक्सपेयर्स को रिटर्न फाइल करने का कोई मौका नहीं मिलेगा।


ITR-U कौन फाइल कर सकता है?

अपडेटेड इनकम टैक्स रिटर्न (ITR-U) का प्रावधान इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 139(8ए) में शामिल है। यह टैक्सपेयर्स को रिटर्न में गलती ठीक करने, नहीं बताई गई इनकम को बताने या पहले फाइल किए गए रिटर्न को अपडेट करने की सुविधा देता है। अगर कोई टैक्सपेयर ऑरिजिनल डेट तक किसी वजह से रिटर्न फाइल नहीं कर पाया था, तो भी वह अपडेटेड रिटर्न फाइल कर सकता है।

क्या रीएसेसेमेंट प्रोसिडिंग्स शुरू होने के बाद फाइल किया जा सकता है?

आसान शब्दों में कहा जाए तो ITR-U टैक्सपेयर्स अपनी टैक्स फाइलिंग में किसी तरह की कमी को स्वैच्छिक रूप से दूर करने का मौका देता है। सरकार ने यूनियन बजट 2026 में एक बड़ा ऐलान किया था। टैक्सपेयर्स अब रीएसेसेमेंट प्रोसिडिंग्स शुरू होने के बाद भी अपडेटेड रिटर्न फाइल कर सकते हैं। हालांकि, इसके लिए ऑरिजिनल पेनाल्टी के अलावा अतिरिक्त 10 फीसदी पेनाल्टी चुकानी होगी। साथ ही टैक्सपेयर्स आईटीआर-यू फाइल करते वक्त लॉसेज को एडजस्ट भी कर सकता है।

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क्या आईटीआर-यू और रिवाइज्ड रिटर्न में फर्क है?

आईटीआर-यू रिवाइज्ड रिटर्न से अलग है। आईटीआर-यू ऐसी स्थितियों के लिए है, जिसमें इनकम नहीं बताई गई हो। ऐसा जानबूझकर हो सकता है या गलती से भी हो सकता है। बॉम्बे चार्टर्ड अकाउंटेंट्स सोसायटी के ज्वाइंट सेक्रेटरी मृणाल मेहता ने कहा, "आईटीआर-यू एक अनिवार्य रिटर्न नहीं है। यह एक विकल्प है जिसमें टैक्सपेयर को मिस्ड टैक्स पेमेंट की स्थिति में अतिरिक्त टैक्स और इंटरेस्ट के साथ टैक्स चुकाने की सुविधा मिलती है।"

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