Income Tax Slab Budget 2026 Highlights: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में विदेश पैसे भेजने वालों को बड़ी राहत देते हुए TCS की दरों को काफी कम कर दिया है। अब विदेशी टूर पैकेज खरीदने पर लगने वाले 5% से 20% के टैक्स को घटाकर मात्र 2% कर दिया गया है, और इसके लिए कोई न्यूनतम सीमा भी नहीं रखी गई है
Income Tax Slab Budget 2026 Highlights: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस साल के बजट में इनकम टैक्स स्लैब को जस का तस रखा है। इसका सीधा अर्थ यह है कि टैक्स की दरों में कटौती की उम्मीद लगाए बैठे करदाताओं को कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिलेगा। नई कर व्यवस्था के अनुसार, सालाना ₹4 लाख तक की कमाई पर कोई टैक्स देय नहीं होगा, जबकि इसके ऊपर आय बढ़ने पर टैक्स की दरें 5% (₹4-8 लाख), 10% (₹8-12 ल
Income Tax Slab Budget 2026 Highlights: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस साल के बजट में इनकम टैक्स स्लैब को जस का तस रखा है। इसका सीधा अर्थ यह है कि टैक्स की दरों में कटौती की उम्मीद लगाए बैठे करदाताओं को कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिलेगा। नई कर व्यवस्था के अनुसार, सालाना ₹4 लाख तक की कमाई पर कोई टैक्स देय नहीं होगा, जबकि इसके ऊपर आय बढ़ने पर टैक्स की दरें 5% (₹4-8 लाख), 10% (₹8-12 लाख) से शुरू होकर ₹24 लाख से अधिक की कमाई पर अधिकतम 30% तक पहुंच जाएंगी। सरकार ने इस बार स्लैब की संरचना में कोई फेरबदल न करते हुए मौजूदा ढांचे को ही भविष्य के लिए बरकरार रखने का निर्णय लिया है।
1 अप्रैल से लागू होगा नया आयकर एक्ट
आयकर नियमों को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में सरकार ने ऐतिहासिक 'आयकर अधिनियम 2025' की घोषणा की है, जिसके तहत अब करदाताओं को अपना ITR रिवाइज करने के लिए 31 मार्च तक का विस्तारित समय मिलेगा। जहां एक ओर विदेशी संपत्ति का खुलासा न करने पर 100% जुर्माने का सख्त प्रावधान किया गया है, वहीं छोटे करदाताओं की राहत के लिए 6 महीने की एक विशेष डिस्क्लोजर स्कीम भी पेश की गई है। निवेशकों के लिए सबसे बड़ी राहत शेयर बायबैक के टैक्स नियमों में बदलाव से आई है; अब बायबैक पर 'डिविडेंड टैक्स' के बजाय 'कैपिटल गेन्स टैक्स' लगेगा, जिससे उन पर टैक्स का बोझ काफी कम हो जाएगा।
विदेश में पढ़ाई होगी सस्ती, स्टैंडर्ड डिडक्शन में राहत नहीं
आम जनता के लिए विदेश जाना और वहां पढ़ाई करना अब सस्ता होगा क्योंकि TCS की दरों को 5-20% के उच्च स्तर से घटाकर केवल 2% कर दिया गया है। कर विवादों को कम करने के लिए 'अपील' प्रक्रिया में लगने वाले अनिवार्य प्री-पेमेंट को भी 20% से घटाकर 10% कर दिया गया है। हालाँकि, मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹75,000 पर ही स्थिर रखा गया है और पुरानी टैक्स रिजीम के नियमों में भी कोई बदलाव नहीं हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि जीवन यापन की बढ़ती लागत के बीच टैक्स छूट की सीमा न बढ़ना निराशाजनक है, लेकिन यह बजट ईमानदारी से टैक्स भरने वालों को सुविधा देने और डिजिटल इकोनॉमी को मजबूत करने वाला है।