नई या फिर पुरानी, कौन सी टैक्स रिजीम है बेस्ट? 1 अप्रैल से लागू हुए ये नए नियम, जानें किसमें ज्यादा बचेगा आपका पैसा

New vs Old Tax Regime: नई व्यवस्था में ₹75,000 की स्टैंडर्ड डिडक्शन और सेक्शन 87A के तहत मिलने वाले रिबेट के बाद ₹12.75 लाख तक की आय वाले सैलरीड लोगों को कोई टैक्स नहीं देना होता है। वैसे इनकम टैक्स रूल्स 2026 के तहत कुछ खास भत्तों की सीमा बढ़ाई गई है, जो पुराने टैक्स रिजीम वालों के लिए 'गेम चेंजर' साबित हो सकते हैं

अपडेटेड May 07, 2026 पर 3:30 PM
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अगर आप इस साल टैक्स रिजीम बदलने की सोच रहे हैं, तो ये कुछ जरूरी बातें हैं जो आपको जान लेनी चाहिए

New vs old Tax Regime: 1 अप्रैल 2026 से इनकम टैक्स का कानून पूरी तरह बदल गया है। 'इनकम टैक्स एक्ट 2025' और 'इनकम टैक्स रूल्स 2026' आधिकारिक तौर पर लागू हो चुके हैं। बजट 2026 में भले ही टैक्स स्लैब में कोई बड़ा बदलाव न हुआ हो, लेकिन नियमों में हुए महत्वपूर्ण बदलाव और कुछ खास भत्तों में बढ़ोतरी ने टैक्सपेयर्स का पूरा गणित बदल दिया है। इन सब के बाद अगर आप इस साल टैक्स रिजीम बदलने की सोच रहे हैं, तो ये कुछ जरूरी बातें हैं जो आपको जान लेनी चाहिए।

बजट 2026 में क्या बदला और क्या नहीं?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में स्पष्ट किया है कि टैक्स स्लैब की वर्तमान संरचना वही रहेगी। हालांकि, नई व्यवस्था (New Tax Regime) को अब डिफॉल्ट विकल्प बना दिया गया है। कुछ ऐसे है नई टैक्स रिजीम के स्लैब:

  • ₹4 लाख तक: शून्य (NIL)
  • ₹4 लाख - ₹8 लाख: 5%
  • ₹8 लाख - ₹12 लाख: 10%
  • ₹12 लाख - ₹16 लाख: 15%
  • ₹16 लाख - ₹20 लाख: 20%
  • ₹20 लाख - ₹24 लाख: 25%
  • ₹24 लाख से ऊपर: 30%


नई व्यवस्था में ₹75,000 की स्टैंडर्ड डिडक्शन और सेक्शन 87A के तहत मिलने वाले रिबेट के बाद ₹12.75 लाख तक की आय वाले सैलरीड लोगों को कोई टैक्स नहीं देना होगा।

पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) के स्लैब

  • ₹2.5 लाख तक: शून्य
  • ₹2.5 लाख - ₹5 लाख: 5%
  • ₹5 लाख - ₹10 लाख: 20%
  • ₹10 लाख से ऊपर: 30%

नई टैक्स प्रणाली के तहत भत्तों में मिली बड़ी राहत

इनकम टैक्स रूल्स 2026 के तहत कुछ खास भत्तों की सीमा बढ़ाई गई है, जो पुराने टैक्स रिजीम वालों के लिए 'गेम चेंजर' साबित हो सकते हैं:

चिल्ड्रन एजुकेशन अलाउंस: ₹100 से बढ़ाकर ₹3,000 प्रति महीना (प्रति बच्चा) कर दिया गया है।

हॉस्टल अलाउंस: ₹300 से बढ़ाकर ₹9,000 प्रति महीना कर दिया गया है।

फ्री मील: ₹50 से बढ़ाकर ₹200 प्रति मील कर दिया गया है।

HRA में राहत: अब बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे शहरों को भी 50% HRA छूट वाली श्रेणी में शामिल कर लिया गया है। यह लाभ केवल पुरानी व्यवस्था में उपलब्ध है।

कौन सी व्यवस्था है आपके लिए बेहतर?

नई रिजीम: यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो निवेश के झंझट में नहीं पड़ना चाहते और कम स्लैब रेट का सीधा लाभ लेना चाहते हैं।

पुरानी व्यवस्था: अगर आपके पास होम लोन का ब्याज (80C), LIC, मेडिकल इंश्योरेंस (80D) और HRA जैसे भारी डिडक्शन हैं, तो पुरानी व्यवस्था अभी भी आपको ज्यादा पैसा बचा कर दे सकती है।

टैक्सपेयर्स को सलाह दी जाती है कि वे स्विच करने से पहले अपनी कुल बचत और निवेश का हिसाब जरूर लगाएं। इनकम टैक्स विभाग ने अब फॉर्म्स को भी सरल कर दिया है। जैसे- Form 16 को Form 130 और AIS को Form 168 में बदला गया है, जिससे कंप्लायंस आसान हो गया है।

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