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Independence Day Special: फाइनेंशियल फ्रीडम के बारे में ये हैं 5 सबसे गलत धारणाएं

Independence Day Special: फाइनेंशियल फ्रीडम का सही मतलब कम लोग जानते हैं। ज्यादातर लोग समझते हैं कि फाइनेंशियल फ्रीडम का मतलब जल्द रिटायरमेंट, लग्जरी लाइफ स्टाइल और मोटा बैंक बैलेंस है। लेकिन, यह सच नहीं है

Edited By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Aug 14, 2025 पर 12:03 PM
Independence Day Special: फाइनेंशियल फ्रीडम के बारे में ये हैं 5 सबसे गलत धारणाएं
ज्यादातर लोग मानते हैं कि ज्यादा इनकम से फाइनेंशियल फ्रीडम मिलती है। लेकिन, दोनों के बीच सीधा संबंध नहीं है।

अंग्रेजों की गुलामी से आजादी तो हमने 1947 में पा ली थी। लेकिन, आपने आर्थिक आजादी हासिल की है? आज फाइनेंशियल फ्रीडम हासिल करना बेहद जरूरी हो गया है। लेकिन, आप इसे तभी हासिल कर पाएंगे, जब इसका मतलब ठीक तरह से समझेंगे। फाइनेंशियल फ्रीडम का सही मतलब कम लोग जानते हैं। ज्यादातर लोग समझते हैं कि फाइनेंशियल फ्रीडम का मतलब जल्द रिटायरमेंट, लग्जरी लाइफ स्टाइल और मोटा बैंक बैलेंस है। लेकिन, यह सच नहीं है। आइए फाइनेंशियल फ्रीडम के बारे में 5 गलत धारणाओं के बारे में जानते हैं।

1. फाइनेंशियल फ्रीडम के लिए ज्यादा इनकम जरूरी है

ज्यादातर लोग मानते हैं कि ज्यादा इनकम से फाइनेंशियल फ्रीडम मिलती है। लेकिन, दोनों के बीच सीधा संबंध नहीं है। सवाल है कि इनकम से आप अपना कितना खर्च पूरा कर पाते हैं और इसके बाद आपके हाथ में क्या बचता है। इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है। मान लीजिए किसी व्यक्ति की मंथली इनकम 2 लाख रुपये है। लेकिन, वह EMI और दूसरे खर्च की वजह से हमेशा मुश्किल में रहता है। एक दूसरा व्यक्ति है जिसकी इनकम सिर्फ 1 लाख रुपये है, लेकिन जरूरी खर्च के बाद भी हर महीने उसके हाथ में पैसे बच जाते हैं। इसे वह इनवेस्ट करता है। दूसरा व्यक्ति आर्थिक रूप से ज्यादा आजाद हैं।

2. रिटायरमेंट के लिए 1 करोड़ का फंड काफी है

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