पेट्रोल-डीजल की कमी नहीं होगी, सरकार ने कहा- देश में पर्याप्त भंडार मौजूद

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच लोगों के मन में यह चिंता बढ़ गई है कि कहीं भारत में पेट्रोल और डीजल की कमी तो नहीं हो जाएगी। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल ऐसा कोई खतरा नहीं है

अपडेटेड Mar 06, 2026 पर 6:26 PM
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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच लोगों के मन में यह चिंता बढ़ गई है कि कहीं भारत में पेट्रोल और डीजल की कमी तो नहीं हो जाएगी।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच लोगों के मन में यह चिंता बढ़ गई है कि कहीं भारत में पेट्रोल और डीजल की कमी तो नहीं हो जाएगी। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल ऐसा कोई खतरा नहीं है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक देश में पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त भंडार उपलब्ध है।

अधिकारियों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव जरूर है, लेकिन भारत की स्थिति फिलहाल सुरक्षित है। सरकार दिन में दो बार ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा कर रही है। साथ ही यह भी कहा गया है कि देश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और एलएनजी की कोई वैश्विक कमी नहीं है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार भारत के पास कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का लगभग आठ सप्ताह का भंडार मौजूद है। इसके अलावा रणनीतिक भंडार (Strategic Reserves) भी उपलब्ध हैं। अलग से देखें तो देश के पास करीब 25 दिनों का कच्चे तेल का स्टॉक और लगभग 25 दिनों का पेट्रोल और डीजल का भंडार भी है। इन भंडारों को समय-समय पर फिर से भरा भी जाता रहता है।


मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण सबसे ज्यादा चिंता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर है, क्योंकि दुनिया का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से तेल और गैस की आपूर्ति करता है। हालांकि भारत के लिए जोखिम थोड़ा कम है क्योंकि देश के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 40 प्रतिशत ही इस रास्ते से होकर आता है।

रिपोर्ट के अनुसार गैस सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए सरकारी कंपनी गेल (GAIL) फोर्स मेज्योर लागू करने पर विचार कर सकती है। फोर्स मेज्योर का मतलब है कि असामान्य परिस्थितियों में कंपनी अपने अनुबंधों को अस्थायी रूप से रोक सकती है। यह कदम इसलिए उठाया जा सकता है ताकि जरूरी सेक्टरों को गैस की सप्लाई प्रभावित न हो।

कतर से आती है बड़ी मात्रा में गैस

भारत के लिए कतर एक बड़ा गैस सप्लायर है। देश हर दिन करीब 195 मिलियन मैट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर एलएनजी आयात करता है, जिसमें से करीब 60 मिलियन क्यूबिक मीटर गैस कतर से आती है। वैश्विक स्तर पर भी कतर लगभग 20 प्रतिशत एलएनजी की आपूर्ति करता है।

मौजूदा हालात को देखते हुए भारत वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तलाश भी कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों ने भारत को गैस सप्लाई करने की पेशकश की है। इसके अलावा भारत ने हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका के साथ भी ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े समझौते किए हैं।

सरकार कच्चे तेल और एलपीजी की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए बड़े वैश्विक तेल उत्पादकों और व्यापारियों से भी बातचीत कर रही है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) और ओपेक (OPEC) जैसे संगठनों के साथ भी संपर्क में है। इसके अलावा अमेरिका के साथ जहाजों के बीमा को लेकर भी चर्चा चल रही है ताकि कच्चे तेल की ढुलाई में किसी तरह की बाधा न आए।

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