विदेश में पढ़ाई करने का सपना देखने वाले भारतीय छात्र अब सिर्फ यूनिवर्सिटी चुनने पर ही ध्यान नहीं दे रहे, बल्कि पैसे की प्लानिंग भी पहले से ज्यादा गंभीरता से कर रहे हैं। बढ़ती महंगाई, डॉलर जैसी विदेशी करेंसी में उतार-चढ़ाव और दुनियाभर में बदलते हालातों ने विदेश में पढ़ाई का खर्च काफी बढ़ा दिया है। यही वजह है कि अब छात्र और उनके परिवार विदेश जाने से कई महीने पहले ही पूरा फाइनेंशियल प्लान तैयार करने लगे हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि अब सिर्फ ट्यूशन फीस जमा कर देना काफी नहीं है। रहने, खाने, ट्रांसपोर्ट, मेडिकल इमरजेंसी और रोजमर्रा के खर्चों को भी पहले से समझना जरूरी हो गया है।
सिर्फ यूनिवर्सिटी नहीं, पूरा बजट देख रहे परिवार
यूनिवर्सिटी Living के फाउंडर और CEO सौरभ अरोड़ा के मुताबिक अब ज्यादातर परिवार 12 से 18 महीने पहले से तैयारी शुरू कर देते हैं। उन्होंने बताया कि पहले लोग सिर्फ कॉलेज की फीस पर ध्यान देते थे, लेकिन अब रहने का खर्च, खाने-पीने का खर्च, बीमा, ट्रैवल खर्च और आपातकालीन खर्च को भी बजट में शामिल किया जा रहा है। सौरभ अरोड़ा के अनुसार अब छात्र सिर्फ यूनिवर्सिटी रैंकिंग नहीं देख रहे, बल्कि यह भी देख रहे हैं कि कौन-सा देश ज्यादा किफायती है। साथ ही भविष्य में वहां नौकरी के बेहतर मौके मिल सकते हैं।
एक साथ बड़ी रकम भेजने से बचें
सौरभ अरोड़ा के मुताबिक जरूरत के हिसाब से अलग-अलग समय पर पैसे भेजने से फॉरेन करेंसी के उतार-चढ़ाव का असर कम पड़ता है और परिवार पर अचानक ज्यादा आर्थिक बोझ भी नहीं आता।
खर्च और फॉरेन करेंसी की कीमत पर रखें नजर
नियो फॉरेक्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमित तलवार का कहना है कि अब छात्र विदेश में होने वाले खर्च को लेकर पहले से ज्यादा सावधान हो गए हैं। उन्होंने बताया कि पहले लोग जरूरत पड़ने पर ही फॉरेन करेंसी का इस्तेमाल करते थे, लेकिन अब छात्र पहले से ही अलग-अलग कंपनियों की दरें, पैसे भेजने का शुल्क और छिपे हुए खर्चों की तुलना कर रहे हैं। एक्सपर्ट के अनुसार आखिरी समय में पैसे भेजने पर ज्यादा खर्च हो सकता है, खासकर तब जब फॉरेन करेंसी बाजार में तेजी से बदलाव हो रहा हो।
विदेश जाने से पहले ही तय करें मासिक खर्च
छात्रों को विदेश पहुंचने से पहले ही हर महीने का बजट तय कर लेना चाहिए। इसमें किराया, खाना, यात्रा, पढ़ाई का सामान और रोजमर्रा के खर्चों के लिए अलग-अलग सीमा तय करनी चाहिए। अमित तलवार के मुताबिक इससे शुरुआती महीनों में होने वाले बेवजह खर्चों को संभालना आसान हो जाता है।
डिजिटल माध्यमों का बढ़ रहा इस्तेमाल
कुहू के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशांत भोंसले का कहना है कि आज के छात्र मोबाइल ऐप और डिजिटल पेमेंट के जरिए पैसे संभालना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इन सुविधाओं की मदद से छात्र पहले से पैसे जमा कर सकते हैं, अपने खर्च पर नजर रख सकते हैं और फॉरेन करेंसी की कीमतों को आसानी से देख सकते हैं।