जून में रिटेल इनफ्लेशन 7.01 फीसदी पर पहुंच गया। यह 8 साल में सबसे ज्यादा रिटेल इनफ्लेशन है। इसका मतलब है कि पिछले एक साल में कीमतें करीब इतनी बढ़ी हैं। इसे एक उदाहरण की मदद से समझा जा सकता है।

जून में रिटेल इनफ्लेशन 7.01 फीसदी पर पहुंच गया। यह 8 साल में सबसे ज्यादा रिटेल इनफ्लेशन है। इसका मतलब है कि पिछले एक साल में कीमतें करीब इतनी बढ़ी हैं। इसे एक उदाहरण की मदद से समझा जा सकता है।
मान लीजिए अभी आपका एक महीने का खर्च करीब 60,000 रुपये है। इनफ्लेशन के करेंट लेवल पर 10 साल बाद आपको एक महीने के खर्च पर करीब 1.44 लाख रुपये खर्च करने पड़ेंगे। ध्यान रखें कि 1.44 लाख रुपये में आप उतनी ही चीजें खरीद पाएंगे जितनी आप अभी 60,000 रुपये में खरीद पा रहे हैं। इतनी ही चीजें (Goods and Services) खरीदने पर आपको 15 साल बाद 2.33 लाख रुपये खर्च करने होंगे।
दरअसल, इनफ्लेशन चीजें खरीदने के लिहाज से आपके पैसे की ताकत कम कर देता है। इसे पर्चेंजिंग पावर ऑफ मनी कहा जाता है। यही वजह है कि फाइनेंशियल प्लानर फाइनेंशियल गोल पूरे करने का प्लान बनाने में इनफ्लेशन के असर को ध्यान में जरूर रखते हैं। लेकिन, सवाल है कि आपको भविष्य के लिए कितने इनफ्लेशन का अंदाजा लगाना चाहिए?
मई 2022 में सब्जियों की कीमतें 18.3 फीसदी बढ़ीं। मेडिकल और एजुकेशनल खर्च में भी तेजी से इजाफा हुआ। ट्रू-वेल्थ फिनसल्टेंट्स के फाउंडर तिवेश शाह ने कहा, "भविष्य के खर्च के लिए हम ग्रॉसरी प्राइसेज 6 फीसदी बढ़ने, एजुकेशन एक्सपेंसेज 10 फीसदी बढ़ने और हॉलीडे प्लानिंग पर खर्च 8 फीसदी बढ़ने का अनुमान लगाते हैं।"
मेडिकल खर्च पर इनफ्लेशन का असर
फ्यूचर एक्सपेंसेज का अंदाजा लगाने में हमें हेल्थकेयर सर्विसेज पर बढ़ते खर्च पर खास ध्यान रखना होगा। डिजिट इंश्योरेंस के चीफ डिस्ट्रिब्यूशन अफसर आदर्श अग्रवाल ने कहा, "कोविड-19 के दौरान मेडकिल इनफ्लेशन 20-22 फीसदी के पीक पर पहुंच गया है।" हेल्थ इंस्योरेंस भी बहुंत महंगा हो गया है। लेकिन, फाइनेंशियल प्लानर्स 12 फीसदी मेडिकल इनफ्लेशन का अंदाजा लगा रहे हैं।
अग्रवाल ने कहा, "रेट्स इस लेवल पर नहीं स्थिर रहने वाले। इंश्योरेंस प्लान का चुनाव करते वक्त आपको मेडिकल कॉस्ट्स में 11-12 फीसदी इनफ्लेशन का अनुमान लगाना चाहिए।"
बजाज आलियांस जनरल इंश्योरेंस के हेड (हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन टीम) भास्कर नेरूलकर ने कहा, "हमने देखा है कि कोरोना के पहले साल में ओवरऑल क्लेम कॉस्ट 30 फीसदी से ज्यादा बढ़ गया। इसीलिए कस्टमर्स को हेल्थ इंश्योरेंस और सम इनश्योर्ड तय करते वक्त बढ़ती मेडिकल कॉस्ट का ध्यान रखना चाहिए। "
एजुकेशन खर्च पर इनफ्लेशन का असर
मेडिकल खर्च की तरह स्कूल और कॉलेज की फीस भी बढ़ती रहती है। चूंकि, ऐसे खर्च जरूरी होते हैं, जिससे आपको एजुकेशन गोल तय करते वक्त कम से कम 12-15 फीसदी इनफ्लेशन का ध्यान रखना चाहिए। भले ही जनरल इफ्लेशन करीब 7 फीसदी हो।
शाह बताते हैं कि जैसे-जैसे इनकम लेवल बढ़ता है, लाइफस्टाइल एक्सपेंसेज भी बढ़ते जाते हैं। पहले पुरुष ग्रूमिंग पर खर्च नहीं करते थे। आज वे इस पर खर्च कर रहे हैं। अब लोगों के मंथली बजट में फिटनेस और जिम जैसे खर्च भी शामिल हो गए हैं।
फ्यूचर में दिक्कत ना हो, इसके लिए क्या करें?
बड़ा फंड: आप जितना इनवेस्ट कर सकते हैं, उससे ज्यादा इनवेस्ट करना चाहिए। जब हम इनवेस्टमेंट शुरू करते हैं तब हम अचानक आने वाले खर्चों को लेकर चिंतित रहते हैं और इसके लिए अपने पास पैसा रखना चाहते हैं। लेकिन, ज्यादा खर्च की चिंता से आपको अपने इनवेस्टमेंट में कमी नहीं करनी चाहिए।
घटता रिटर्न: फाइनेंशियल प्लान के रिटर्न का अंदाजा लगाने में कंजूसी दिखाए। कई फाइनेंशियल प्लानर्स ने बताया कि पहले वे शेयरों से करीब 15 फीसदी रिटर्न का अनुमान लगाते थे। लेकिन, अब ऐसा नहीं है। अब ज्यादातर प्लानर सालाना 12 फीसदी रिटर्न का अंदाजा लगाते हैं। सच तो यह यह है कि इससे भी कम रिटर्न का अंदाजा लगाना ठीक होगा। इकोनॉमी की अच्छी ग्रोथ की स्थिति में म्यूचुअल फंड से 10-11 फीसदी रिटर्न की उम्मीद की जा सकती है।
ज्यादा कमाई वाले सालों में ज्यादा बचत करें: ज्यादा बचत करें और इसे लगातार बढ़ाते रहें। वीआर वेल्थ एडवाइजर्स के सीईओ और फाउंडर विवेक रेगे ने कहा कि जब आप नौकरी कर रहे हों तो आपको ज्यादा बचत करनी चाहिए।
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