नौकरी करने वाले लोगों को अपनी कंपनी से फॉर्म 16 मिलने का इंतजार है। इसके बाद ही वे इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर सकेंगे। फॉर्म 16 मिलने तक आप दूसरे जरूरी डॉक्युमेंट्स जुटा सकते हैं। इससे फॉर्म 16 मिलते ही आपके लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना आसान हो जाएगा। दूसरे डॉक्युमेंट्स में फॉर्म 26एएस और एनुअल इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (एआईआर) शामिल हैं।
ITR फाइल करने के लिए सबसे पहले आपको सही फॉर्म का चुनाव करना होगा। नौकरी करने वाले लोगों के लिए दो फॉर्म हैं। पहला है आईटीआर फॉर्म-1 (ITR Form 1) और दूसरा आईटीआर फॉर्म-2 (ITR Form-2) है। आईटीआर-1 ऐसे टैक्सपेयर्स के लिए है, जिनकी सालाना इनकम 50 लाख रुपये से कम है। जिनकी इनकम का स्रोत पेंशन या सैलरी है। एक घर है। साथ ही एग्रीकल्चर से सालाना 5,000 रुपये तक इनकम है।
अगर आप रेजिडेंट है लेकिन ऑर्डिनरिली रेजिडेंट (RNOR) नहीं हैं या नॉन-रेजिडेंट इंडिविजुअल हैं या आपको कैपिटल गेंस या लॉस हुआ है या आप किसी कंपनी में डायरेक्टर हैं या आपके पास अनलिस्टेड शेयर्स हैं या ईसॉप्स हैं या विदेश में बैंक अकाउंट है या विदेश में प्रॉपर्टी है तो आपको ITR-2 का इस्तेमाल करना होगा।
गलत फॉर्म के इस्तेमाल से क्या दिक्कत होगी?
Deloitte India में पार्टनर मौसमी नागरसेनकर ने कहा कि अगर आपके रिटर्न फाइल करने के लिए सही फॉर्म का इस्तेमाल नहीं किया तो आप अपनी इनकम आदी के बारे में जरूरी जानकारी नहीं दे पाएंगे। उदाहरण के लिए अगर आपको कैपिटल गेंस हुआ है, लेकिन आईटीआर-2 की जगह अगर आप आईटीआर-1 का इस्तेमाल करते हैं तो नॉन-डिसक्लोजर के लिए आपको इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का नोटिस मिल सकता है। गलत फॉर्म के चुनाव से आपका रिटर्न डिफेक्टिव भी हो सकता है।
गलत डिडक्शन क्लेम करने पर क्या होगा?
सैलरीड इंडिविजुअल्स को यह ध्यान में रखना जरूरी है कि अगर आप किसी डिडक्शन के हकदार नहीं हैं तो उसका क्लेम आपको नहीं करना चाहिए। इसकी वजह यह है कि AIS में आपके सभी फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन की जानकारी होती है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट संदिग्ध टैक्स डिडक्शन के क्लेम का पता लगाने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहा है। इसलिए गलत डिडक्शन क्लेम करने पर आप पकड़े जा सकते हैं।
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नई रीजीम से ओल्ड रीजीम में स्विच क्या है?
अगर आपने टैक्स की नई रीजीम से ओल्ड रीजीम में स्विच किया है तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। हो सकता है कि आपके फॉर्म 16 में दी गई जानकारियां आपके रिटर्न से मैच नहीं करे। ऐसे में आपसे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट कुछ सवाल पूछ सकता है। इसलिए आपको अपने टैक्स-सेविंग्स इनवेस्टमेंट और डिडक्शंस से जुड़े सभी डॉक्युमेंट्स अपने पास रखना होगा।