इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डिवेलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने बीमा कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे कोरोना के इलाज के दौरान "एंटीबॉडी कॉकटेल" लेने वाले मरीजों के दावे को "प्रायोगिक इलाज" बताकर खारिज नहीं कर सकती हैं। साथ ही इंश्योरेंस रेगुलेटर ने उनसे इस तरह के क्लेम के निपटारे के लिए एक व्यवस्था भी तैयार करने के लिए कहा है।
इससे पहले मीडिया में ऐसी रिपोर्टें आई थीं कि कुछ हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां इलाज के दौरान "एंटीबॉडी कॉकटेल" लेने वाले कोरोना मरीजों के क्लेम को इस आधार पर खारिज कर रही हैं कि ये एक "प्रायोगिक इलाज" है और ये पॉलिसी में कवर नहीं होता है।
बता दें कि कोरोना वायरस के लिए अभी तक कोई सटीक दवा या इलाज विकसित नहीं होने के कारण डॉक्टर कई मरीजों को एंटीबॉडी कॉकटेल थेरेपी दे रहे हैं। एंटीबॉडी कॉकटेल थेरेपी की लागत काफी अधिक हो सकती है। ऐसे में भारत में कोरोना वायरस के फिर से बढ़ते मामलों के बीच इंश्योरेंस रेगुलेटर की तरफ से उठाया गया यह कदम पॉलिसीहोल्डर्स के लिए राहत देने वाला है।
IRDAI ने मंगलवार को विभिन्न जनरल और हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के चेयरमैन, मैनेजिंग डायरेक्टर्स और CEO को एक सर्कुलर जारी कर यह निर्देश दिया है। IRDAI ने कहा, "हमारे संज्ञान में आया है कि बीमा कंपनियां कोरोना वायरस के इलाज के लिए ‘एंटीबॉडी कॉकटेल’ चिकित्सा पर किए गए खर्च के इंश्योरेंस क्लेम को नकार रही हैं। इस तरह के दावों को प्रायोगिक इलाज के ‘बहाने’ खारिज किया जा रहा है।"
IRDAI ने कहा कि एंटीबॉडी कॉकटेल चिकित्सा को सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) ने मई, 2021 में ही इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दे दी थी। ऐसे में इसे प्रायोगिक इलाज कहकर खारिज करने का मामला नहीं बनता है।