IRDAI के इस निर्देश से इंश्योरेंस लेने वालों की हो जाएगी चांदी, कम देना होगा प्रीमियम, जानिए पूरी डिटेल

अगर आप इंश्योरेंस कंपनी की वेबसाइट से इंश्योरेंस खरीदते हैं तो आपको कम प्रीमियम भरना पड़ सकता है। इसके लिए रेगुलेटर ने कंपनियों को नोटिफिकेशन जारी कर दिया है

अपडेटेड Aug 25, 2022 पर 12:53 PM
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IRDAI के इस नोटिफिकेशन से सरकारी बीमा कंपनियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है।

इंश्योरेंस रेगुलेटर एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (Insurance Regulatory and Development Authority of India – IRDAI) ने डायरेक्ट इंश्योरेंस प्लान खरीदने वाले लोगों के लिए बड़ी राहत दी है। इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI ने इंश्योरेंस बेचने वाली कंपनियों को नोटिफिकेशन भेजा है। इसमें कहा गया है कि अगर कंपनी ग्राहकों को डायरेक्ट इंश्योरेंस (Direct Insurance) बेचती है तो प्रीमियम में डिस्काउंट देना होगा।

कहने का मतलब ये हुआ कि अगर कोई ग्राहक इंश्योरेंस कंपनी की वेबसाइट से इंश्योरेंस खरीदते हैं तो उन्हें कम प्रीमियम देना होगा। इसमें आगे कहा गया है कि हेल्थ इंश्योरेंस और जनरल इंश्योरेंस कंपनियां कुल जुटाए गए प्रीमियम का ज्यादा से ज्यादा 20 फीसदी कमीशन के तौर पर दे सकती हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह लिमिट पोर्टफोलियो स्तर की सीमा पर और कारोबार की इंडिविजुअल लाइन पर नहीं है। यानी अगर कोई जनरल इंश्योरेंस कंपनी हेल्थ कारोबार को बढ़ाना चाहती है तो हेल्थ इंश्योरेंस में ज्यादा कमीशन दे सकती है। मोटर कारोबार के लिए कमीशन की लिमिट कम रख सकती है। इससे पहले हाल में ही में रेगुलेटर ने कुल खर्च की अधिकतम लिमिट प्रीमियम के 30 फीसदी तय की है। इस 30 फीसदी में ही ऑपरेटिंग खर्च और कमीशन खर्च की दोनों शामिल किए गए हैं। इसे ऐसे समझ सकते हैं कि अगर कोई कंपनी 100 रुपए प्रीमियम (Direct Insurance Premium) कमाती है तो कुल खर्च 30 रुपए तक कर पाएगी। जिसमें 20 रुपए एजेंट और एग्रीग्रेटर कमीशन और बाकी दस रुपए सैलरी, विज्ञापन, रिवॉर्ड्स के शामिल होंगे।

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होगा ये बदलाव

पॉलिसी बिक्री से जुड़े खर्चों की सिंगल लिमिट तय होने के बाद सरकारी कंपनियों (insurance) को पॉलिसी बेचने में कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। इसकी वजह ये है कि अभी तक ऑपरेटिंग खर्च और कमीशन खर्च की अलग अलग लिमिट थी। लेकिन अब सिंगल लिमिट के बाद सरकारी कंपनियों के खर्च का 70 फीसदी तक मैनेजमेंट और ऑपरेटिंग खर्च में होगा। निजी कंपनियों में ये 30-35% ही है।

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