साल 2025 नजदीक आ गया है। रिटेल इनवेस्टर्स के लिए ऐसी स्ट्रेटेजी पर फोकस करना जरूरी हो गया है, जो उन्हें ग्लोबल चैलेंजेज के बीच सुरक्षा देगी। पिछले 2-3 साल में स्टॉक मार्केट से अच्छे मिले रिटर्न ने निवेशकों का आत्मविश्वास बहुत बढ़ा दिया है। यह चिंताजनक है। अभी मार्केट में तेजी की वजह ज्यादा लिक्विडिटी है। कुछ स्टॉक्स की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव, मिडिलईस्ट में टेंशन और यूक्रेन-रूस में टकराव को देखते हुए यह सावधानी बरतने का वक्त है।
इंडियन मार्केट से विदेशी निवेशक निकाल रहे पैसे
इंडियन मार्केट्स के अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। लेकिन आपको अपनी उम्मीदों पर गौर करना होगा। लंबी अवधि में इंडिया की स्टोरी शानदार दिखती है। लेकिन, शॉर्ट टर्म में सावधानी बरतने की जरूरत है। विदेशी निवेशकों ने अक्टूबर में 88,818 करोड़ रुपये की बिकवाली की है। वे चीन और जापान जैसे सस्ते मार्केट्स में निवेश कर रहे हैं। इससे इंडिया से पूंजी निकल जाने का डर बढ़ा है। 28 अक्टूबर को बीएसई सेंसेक्स का पिछले 12 महीने का प्राइस-टू-अर्निंग्स रेशियो 24.1 गुना था, जबकि निफ्टी का 23.7 गुना था।
अच्छा रिटर्न दे चुके शेयरों के ज्यादा रिटर्न देने की कम उम्मीद
इंडिया की लॉन्ग टर्म स्टोरी अच्छी है और अर्निंग्स और वैल्यूएशन के बीच फर्क घटेगा। लेकिन इनवेस्टर्स को सही सेक्टर का चुनाव करने में सावधानी बरतनी होगी। इसकी वजह यह है कि अच्छा रिटर्न दे चुके स्टॉक्स के फिर से बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद कम है। इनफ्लेशन और इंटरेस्ट रेट में कमी का असर मार्केट पर पड़ेगा। निवेश के सही फैसले लेने में इन बातों का ध्यान रखना होगा। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों का असर इंडिया पर पड़ेगा। अगर डोनाल्ट ट्रंप फिर से राष्ट्रपति बनते हैं तो टैरिफ बढ़ सकता है, जिसका असर इंडिया के एक्सपोर्ट पर पड़ेगा।
हर बड़ी कंपनी के आईपीओ की सफलता की गारंटी नहीं
आईपीओ मार्केट में हलचल जारी रहने की उम्मीद है। स्विगी और OYO के आईपीओ आने वाले हैं। लिस्टिंग अच्छी रहने पर इनवेस्टर्स सेंटिमेंट में सुधार होगा। लेकिन, पेटीएम, 2008 में रिलायंस पावर और हाल में ओला इलेक्ट्रिक के आईपीओ को देखकर यह समझने की जरूरत है कि बड़े आईपीओ के सफल होने की गांरटी नहीं होती है। इसलिए निवेशकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। ऐसे में रिटेल निवेशकों को डायवर्सिफिकेशन का खास ख्याल रखना होगा।
अपनी जरूरत के हिसाब से बनाएं फाइनेंशियल प्लान
आज इनवेस्टमेंट की सलाह की कमी नहीं है। लेकिन, याद रखना जरूरी है कि पर्सनल फाइनेंस के फैसले हमेशा पर्सनल होने चाहिए। दूसरों की बातों पर अमल करने की जगह आपको अपनी जरूरत के हिसाब से फाइनेंशियल प्लान बनाना होगा। अगर आप 30 साल, 40 साल या 50 साल से ज्यादा उम्र के हैं तो आपको यह देखने की जरूरत है कि आपकी सेविंग्स के पैसे का निवेश कहां हो रहा है। आपका कितना पैसा शेयर, रियल एस्टेट, गोल्ड और फिक्स्ड डिपॉजिट में है? अगर आपका ज्यादा निवेश स्टॉक मार्केट्स के बाहर है तो फिर आपको रोजाना मार्केट के उतारचढ़ाव की चिंता क्यों करनी चाहिए?
यह भी पढ़ें: General Provident Fund: रिटायर्ड कर्मचारियों को GPF पर कब मिलेगा ब्याज, सरकार ने किया क्लैरिफाई
लंबी अवधि के लिए म्यूचुल फंड निवेश का अच्छा विकल्प
अगर आप थोड़ा रिस्क ले सकते हैं तो आप अपनी सेविंग्स का कुछ हिस्सा म्यूचुअल फंड की स्कीम में लगा सकते हैं। SIP के जरिए निवेश करने से आपको रूपी कॉस्ट एवरेजिंग का फायदा मिलेगा। आप धीरे-धीरे मार्केट में निवेश करने के लिए सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। यह ध्यान में रखें कि मार्केट में गिरावट आने पर ही निवेश के मौके बनते हैं। अगर आप लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं तो मल्टीकैप, फ्लेक्सीकैप और मिडकैप फंड में निवेश कर सकते हैं।