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जानिए EPF में 2.5 लाख रुपये से ज्यादा के कॉन्ट्रिब्यूशन पर किस तरह लगेगा टैक्स, जानिए आपकी जेब पर क्या होगा असर

सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने इस बारे में बताया है। उसने कहा है कि नए नियम के लागू होने के बाद दो अलग पीएफ अकाउंट्स रखने होंगे। पहला अकाउंट टैक्सेबल कंट्रिब्यूशन के लिए होगा। दूसरा अकाउंट नॉन-टैक्सेबल कंट्रिब्यूशन के लिए होगा

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 31, 2022 पर 10:54 AM
जानिए EPF में 2.5 लाख रुपये से ज्यादा के कॉन्ट्रिब्यूशन पर किस तरह लगेगा टैक्स, जानिए आपकी जेब पर क्या होगा असर
EPFO प्राइवेट कंपनियों के इंप्लॉइज के रिटायरमेंट फंड का प्रबंधन करता है। देश में ईपीएफओ के करीब 6 करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं। कर्मचारी की बैसिक सैलरी का 12 फीसदी हर महीने ईपीएफ में जमा होता है।

EPFO New Rule: इंप्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) से जुड़ा टैक्स का नियम बदल गया है। अब एक वित्त वर्ष में EPF में 2.5 लाख रुपये से ज्यादा के कंट्रिब्यूशन (EPF Contribution) पर मिलने वाले इंट्रेस्ट पर टैक्स लगेगा। यह नियम 1 अप्रैल, 2022 से लागू हो जाएगा। हालांकि, नियम में बदलाव का असर EPF के कुछ ही सब्सक्राइबर पर पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि EPF के ज्यादातर सब्सक्राइबर का एक वित्त वर्ष में कुल कंट्रिब्यूशन 2.5 लाख रुपये से बहुत कम है।

EPF का इंट्रेस्ट रेट 43 साल में सबसे कम

इस नियम के दायरे में आने वाले ईपीएफ के सब्सक्राइबर का कुल रिटर्न कम हो जाएगा। अब उन्हें ईपीएफ में जमा रकम के ब्याज पर टैक्स देना होगा। ईपीएफ पर इंट्रेस्ट रेट में सरकार ने कमी की है। वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान ईपीएफ में जमा रकम पर सिर्फ 8.1 फीसदी ब्याज मिलेगा। यह 43 साल में ईपीएफ पर मिलने वाला सबसे कम ब्याज है।

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