अगर ठीक से प्लानिंग (Tax Planning) की जाए तो काफी इनकम टैक्स (Income Tax) बचाया जा सकता है। अगर आप अगले वित्त वर्ष में टैक्स सेविंग करना चाहते हैं तो अभी प्लान बना लेना ठीक रहेगा। अप्रैल 2022 से मार्च 2023 तक कुछ खास इंस्ट्रूमेंट ने इनवेस्ट कर आसानी से टैक्स बचाया जा सकता है। अप्रैल शुरू होने में कुछ ही दिन बचे हैं। ऐसे में टैक्स सेविंग प्लानिंग के लिए यह सबसे अच्छा समय है। हम आपको टैक्स सेविंग के सबसे आसान तरीकों के बारे में बता रहे हैं।
टैक्स बचाने के साथ सेविंग में भी हेल्पफुल है सेक्शन 80सी
टैक्स बचाने के लिए सबसे आसान तरीका है इनकम टैक्स, 1961 के सेक्शन 80सी के तहत आने वाले इंस्ट्रूमेंट्स में इनवेस्टमेंट। इस सेक्शन के तहत कुछ खर्चों पर भी टैक्स डिडक्शन क्लेम करने की इजाजत है। बच्चों की ट्यूशन फीस इसका उदाहरण है। इसलिए अगर आपके बच्चे स्कूल या कॉलेज जाते हैं तो आप ट्यूशन फीस पर टैक्स छूट का लाभ उठा सकते हैं। यह छूट सिर्फ दो बच्चों के लिए है।
सेक्शन 80सी के दायरे में क्या-क्या आता है?
सेक्शन 80सी के तहत पीपीएफ, इक्विटी म्यूचुअल फंड्स, 5 साल का टैक्स सेविंग्स फिक्स्ड डिपॉजिट, लाइफ इंश्योरेंस और पेंशन प्लान आते हैं। टैक्स बचाने के लिए सेक्शन 80सी का पूरा इस्तेमाल करना सबसे आसान है। इस सेक्शन के तहत सालाना 1.50 लाख रुपये तक के डिडक्शन की इजाजत है। इसका मतलब यह है कि अगर आपकी कुल सैलरी सालाना 10 लाख रुपये है तो टैक्स कैलकुलेशन के लिए उसमें से 1.5 लाख रुपये घटा दिए जाएंगे।
सबसे अच्छी बात है कि सेक्शन 80सी को आपको अच्छी सेविंग करने में भी हेल्प करता है। आप म्यूचुअल फंड की टैक्स स्कीम में इनवेस्ट कर टैक्स छूट का फायदा उठा सकते हैं। सिप का रास्ता आपके लिए सबसे अच्छा रहेगा। इसमें हर महीने निश्चित रकम आपके सेविंग अकाउंट से सिप में चली जाएगी। लंबी अवधि में यह अच्छी वैल्थ जुटाने में काफी हेल्पफुल है। म्यूचुअल फंड की टैक्स सेविंग स्कीम को ELSS कहा जाता है। आम तौर पर इस कैटेगरी की स्कीम्स का औसत रिटर्न सालाना 10 फीसदी से ज्यादा रहता है।
80सी के तहत लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम पर भी टैक्स डिडक्शन मिलता है। अगर आपने लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी ले रखी है तो आप उसके प्रीमियम पर टैक्स छूट का लाभ उठा सकते हैं। अगर आपने अब तक लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी नहीं ली है तो आपको जल्द पर्याप्त लाइफ कवर वाली एक पॉलिसी ले लेनी चाहिए। लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी जितनी कम उम्र में ली जाती है, उसका प्रीमियम उतना ही कम होता है।
सैलरी में अलाउन्स कंपोनेंट होने से टैक्स बचाने में मिलती है मदद
कई कंपनियां टैक्स सेविंग के लिए अपनी इंप्लॉयीज को ट्रांसपोर्ट अलाउन्स, टेलीफोन अलाउन्स, फूड कूपंस आदि की सुविधा देती हैं। दरअसल, यह आपके सैलरी पैकेज का हिस्सा होता है। लेकिन, ये अलाउन्स टैक्स के दायरे में नहीं आते हैं। इसके चलते आपकी कुल टैक्सेबल सैलरी कम हो जाती है। इसलिए आपको अपनी सैलरी स्ट्रक्चर एक बार जरूर देख लेना चाहिए। अगर उसमें इस तरह के अलाउन्स शामिल नहीं हैं तो आप एचआर से इस बारे में बात कर सकते हैं।
HRA पर टैक्स डिडक्शन की इजाजत
कंपनियां अपने कर्मचारियों को हाउस रेंट अलाउंस (HRA) भी देती हैं। आपको एक बार चेक करना होगा कि आपकी सैलरी में यह शामिल है या नहीं। अगर यह कंपोनेंट शामिल नहीं है तो आप इसे शामिल करने के बारे में अपने एचआर से बात कर सकते हैं। एचआरए पर टैक्स डिडक्शन का दावा किया जा सकता है। इससे आपकी कुल टैक्सेबल रकम घट जाती है।
आजकल कई लोग चैरिटी करना पसंद करते हैं। वे अपनी इनकम का कुछ हिस्सा परोपकार के लिए कंट्रिब्यूट करते हैं। अगर आपकी दिलचस्पी चैरिटी में है तो इस पर टैक्स छूट क्लेम करना नहीं भूलें। इनकम टैक्स के सेक्शन 80जी के तहत आप अपनी इनकम का 10 फीसदी तक चैरिटी कर उस पर डिडक्शन हासिल कर सकते हैं।