सिल्वर, इक्विटी या गोल्ड: आपके लिए निवेश का बेहतर विकल्प क्या हो सकता है?

सिल्वर की परफॉर्मेंस लंबे समय से निवेशकों को हैरान करती रही है। इसमें भी शेयरों की तरह ही उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। मोतीलाल ओसवाल प्राइवेट वेल्थ ((MOPW) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, सिल्वर यानी चांद में निवेश का जोखिम कई मायनों में भारतीय शेयरों जैसा है। लिहाजा, पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन को समझने के लिए यह बेहद अहम एसेट है

अपडेटेड Nov 28, 2024 पर 3:34 PM
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गोल्ड निवेश का सुरक्षित ठिकाना है और इसमें सिल्वर और शेयरों के मुकाबले अपेक्षाकृत स्थिर रिटर्न है।

सिल्वर की परफॉर्मेंस लंबे समय से निवेशकों को हैरान करती रही है। इसमें भी शेयरों की तरह ही उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। मोतीलाल ओसवाल प्राइवेट वेल्थ ((MOPW) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, सिल्वर यानी चांद में निवेश का जोखिम कई मायनों में भारतीय शेयरों जैसा है। लिहाजा, पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन को समझने के लिए यह बेहद अहम एसेट है।

चांदी बनाम भारतीय शेयर: उतार-चढ़ाव की तुलना

इस सिलसिले में MOPW की रिपोर्ट से कुछ चौंकाने वाले आंकड़े देखने को मिले हैं:

स्टैंडर्ड डेविएशन: सिल्वर के मंथली रिटर्न का स्टैंर्डर्ड डेविएशन 26.6 पर्सेंट है, जो भारतीय शेयरों के 26.8 पर्सेंट के आसपास है।


अधिकतम गिरावट: दोनों एसेट क्लास में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली है और सिल्वर का यह आंकड़ा -54 पर्सेंट था, जबकि भारतीय शेयरों की गिरावट -55.1 पर्सेंट रही।

इन शेयरों से पता चलता है कि भारतीय शेयरों की तरह चांदी की वैल्यू में भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, जो इसे ज्यादा जोखिम वाला एसेट बनाता है। निवेशकों के लिए इसका मतलब यह है कि सिल्वर में जहां शानदार रिटर्न के साथ-साथ जबरदस्त रिटर्न भी देखने को मिल सकता है।

गोल्ड: लगातार रिटर्न के लिए सुरक्षित दांव

इसके उलट गोल्ड सुरक्षित और स्थिर विकल्प है। गोल्ड ने 1990 से अक्टूबर 2024 के दौरान 10.6 पर्सेंट सीएजीआर की दर से रिटिर्न दिया है। इसका स्टैंडर्ड डेविएशन भी अपेक्षाकृत काफी कम यानी 14.7 पर्सेंट है, जबकि अधिकतम गिरावट -25.1 पर्सेंट रही है।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि गोल्ड निवेश का सुरक्षित ठिकाना है और इसमें सिल्वर और शेयरों के मुकाबले अपेक्षाकृत स्थिर रिटर्न है।

परफॉर्मेंस ब्रेकडाउन: कहां निवेश करें?

रिपोर्ट में तीन प्रमुख एसेट्स- भारतीय शेयरों, गोल्ड और सिल्वर की विस्तार से तुलना की गई है और इसमें कई दशकों के जोखिम और रिटर्न को लेकर चर्चा की गई है। इस डेटा से यह साफ है कि लॉन्ग टर्म ग्रोथ के मामले में भारतीय शेयर बाजार सबसे बेहतर परफॉर्मर रहे हैं, लेकिन यहां काफी उतार-चढ़ाव रहा है।

गोल्ड में कम जोखिम के साथ बेहतर रिटर्न का ट्रेंड देखने को मिला है। लिहाजा, यह उन लोगों के लिए आदर्श निवेश हैं, जो स्थायित्व चाहते हैं। दूसरी तरफ, सिल्वर में उतार-चढ़ाव ज्यादा है और लॉन्ग टर्म में भी इसमें इक्विटी और गोल्ड के मुकाबले कम रिटर्न है।

आपको कहां निवेश करना चाहिए?

मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट से मिले ट्रेंड के आधार पर यह साफ है कि निवेश की रणनीति आपकी जोखिम की क्षमता पर निर्भर करती है।

भारतीय इक्विटी: ऐसे लॉन्ग टर्म इनवेस्टर्स के लिए निवेश का बेहतर विकल्प है, जो बेहतर रिटर्न के लिए ज्यादा उतार-चढ़ाव बर्दाश्त कर सकते हैं।

गोल्ड: यह उन लोगों के लिए सुरक्षित विकल्प है, जो रिटर्न और उतार-चढ़ाव के बीच संतुलन चाहते हैं। गोल्ड स्ट्रैटेजिक आवंटन का मुख्य हिस्सा हो सकता है और यह बाजार की अनिश्चित परिस्थितियों में स्थायित्व प्रदान करता है।

चांदीः चांदी में शॉर्ट टर्म गेन की संभावना है और इसमें उतार-चढ़ाव ज्यादा होने की वजह से यह ऐसे निवेशकों के लिए ज्यादा उपयुक्त है, जो शॉर्ट टर्म में बेहतर रिटर्न के साथ-साथ बेहतर जोखिम के लिए तैयार रहते हैं।

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