क्या आपको सोवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश करना चाहिए?

सोवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम 2023-24 सीरीज I (Sovereign Gold Bond 2023-2024 Series I) लॉन्च हो गई है। यह स्कीम लॉन्ग टर्म इनेवस्टमेंट के लिए बेहतर विकल्प है। बॉन्ड की अवधि 8 साल की है और इन्हें स्टॉक एक्सचेंजों में लिस्ट कराया गया है

अपडेटेड Jun 19, 2023 पर 6:43 PM
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एक्सपर्ट्स के मुताबिक इनवेस्टर्स को अपने पोर्टफोलिया का 10 पर्सेंट हिस्सा गोल्ड में लगाना चाहिए। (Image- Pixabay)

रिर्जव बैंक ने सोवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम 2023-24 सीरीज 1 (Sovereign Gold Bond 2023-2024 Series I) लॉन्च कर दी है। यह स्कीम 23 जून को बंद हो जाएगी।

क्या है ऑफ़र?

सोवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) में आम तौर पर एक ग्राम गोल्ड की कीमत को ट्रैक किया जाता है। स्कीम के तहत इनवेस्टर को 5,926 रुपये प्रति बॉन्ड के हिसाब से निवेश करना होगा। बॉन्ड के लिए डिजिटल माध्यमों से आवेदन और पेमेंट करने वालों को हर ग्राम पर 50 रुपये का डिस्काउंट भी मिलेगा। ऐसे मामलों में इश्यू प्राइस 5,876 रुपये होगा। निवेशकों को सोवरेन गोल्ड बॉन्ड पर 2.5 पर्सेंट का सालाना ब्याज भी मिलेगा और ब्याज का भुगतान हर 6 महीने पर किया जाएगा।

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सोवरेन गोल्ड बॉन्ड की अवधि 8 साल की है और इन्हें स्टॉक एक्सचेंजों में लिस्ट कराया गया है। इनवेस्टर इन एक्सचेंजों में बॉन्ड का सौदा कर सकते हैं। इस बॉन्ड को 5 साल के बाद रिजर्व बैंक से रिडीम (भुनाया) किया जा सकता है। सोवरेन गोल्ड बॉन्ड, मैच्योरिटी के समय एक ग्राम गोल्ड की मौजूदा प्राइस का भुगतान करते हैं। इसके अलावा, बॉन्ड जारी करते समय, बॉन्ड की कीमत पर ब्याज भी दिया जाता है। लिहाजा, यह बॉन्ड गोल्ड में निवेश का बेहतर विकल्प है।


क्या हैं फायदे?

अगर आपने सोवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश किया है, तो आप फिजिकल गोल्ड में निवेश करने के झंझट से मुक्त हो जाते हैं यानी आपको गोल्ड की चोरी या इसे सुरक्षित रखने जैसी दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ता है। मुंबई की सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर पारुल माहेश्वरी ने बताया, 'म्यूचुअल फंड के उलट यहां कोई एसेट मैनेजमेंट फीस नहीं लगती है। साथ ही, सरकार आपको इन बॉन्ड पर 2.5 पर्सेंट का ब्याज देती है।'

सोवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश से टैक्स बचाने में भी मदद मिलेगी। हालांकि, इनकम टैक्स स्लैब रेट के हिसाब से ब्याज पर टैक्स देना होगा, लेकिन टैक्स के बाद वाले रिटर्न में लॉन्ग टर्म इनवेस्टर को फायदा मिल सकता है।

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने वाले पोर्टल Tax2Win के सीईओ अभिषेक सोनी ने बताया, ' अगर सोवरेन गोल्ड बॉन्ड में आपका निवेश 3 साल से ज्यादा पुराना है, तो इनडेक्सेशन (indexation) के साथ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स 20 पर्सेंट होगा, जबकि बिना इनडेक्सेशन के यह टैक्स 10 पर्सेंट होगा। सोवरेन गोल्ड बॉन्ड पर मिला रिटर्न, मैच्योरिटी तक टैक्स मुक्त है, लिहाजा यह उन लॉन्ग टर्म इनवेस्टर्स के लिए बेहतर विकल्प है जो गोल्ड में निवेश करना चाहते हैं।'

क्या है चुनौतियां?

हालांकि, सोवरेन गोल्ड बॉन्ड अलग-अलग एक्सचेजों पर लिस्टेड हैं, लेकिन वे अपने सही मूल्य के आसपास कभी ट्रेड नहीं करते। गोल्ड की कीमतों को लेकर रुझानों के आधार पर कीमतों में बदलाव होता रहता है। जो इनवेस्टर जल्द निकलना चाहते हैं, उनके लिए एक्सचेंजों में उचित कीमत पर सोवरेन गोल्ड बॉन्ड को भुनाना मुश्किल हो सकता है।

क्या आपको निवेश करना चाहिए?

वेल्थ मैनेजमेंट फर्म सैंक्टम वेल्थ के को-हेड (प्रॉडक्ट्स एंड सल्यूशंस) मनीष जेलोका के मुताबिक मीडियम और लॉन्ग टर्म के हिसाब से गोल्ड इनवेस्टमेंट बेहतर विकल्प है। उन्होंने कहा, 'जब अमेरिका और अन्य ग्लोबल मार्केट में मंदी के संकेत दिखते हैं, तो गोल्ड में तेजी शुरू हो जाती है। लिहाजा, अपने निवेश का एक हिस्सा गोल्ड में लगाने का यह सही समय है।'

कोटक सिक्योरिटी के वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी रिसर्च) रविंद्र राव का मानना है कि ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी का साइकल खत्म होने वाला है, लिहाजा गोल्ड की कीमतों में अगले कुछ साल तक तेजी बनी रह सकती है। उन्होंने कहा, 'केंद्रीय बैंकों की खरीदारी में तेजी, भूराजनीतिक तनाव में बढ़ोतरी और ग्लोबल ग्रोथ को लेकर छाई अनिश्चितता जैसी वजहों से गोल्ड की स्थिति बेहतर रहने की संभावना है। '

महंगाई दर को काबू में करने के लिए दुनिया भर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जा रही है। हालांकि, इस प्रोसेस में इकनॉमिक ग्रोथ की रफ्तार सुस्त हो रही है। केंद्रीय बैंकों को जल्द ही अपनी मॉनिटरी पॉलिसी पर फिर से विचार करना पड़ सकता है। ऐसे में गोल्ड में निवेश करने वालों के लिए बेहतर संभावना बनेगी।

इसके अलावा, गोल्ड को सिर्फ रिटर्न के नजरिए से देखना सही नहीं होगा। गोल्ड, स्टॉक पोर्टफोलियो के जोखिम से सुरक्षा मुहैया कराने में भी मददगार है।

जेलोका के मुताबिक, 'सोवरेन गोल्ड बॉन्ड लॉन्ग टर्म इनवेस्टमेंट है, इसलिए आपको सिर्फ वह रकम लगानी चाहिए, जिसके लिए आप इंतजार कर सकते हैं। इसकी अवधि 8 साल है।' हालांकि, ये एक्सचेंज में बेचे जा सकते हैं, लेकिन मैच्योरिटी तक इसे रखना बेहतर विकल्प होगा। छोटी अवधि के लिए गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड की यूनिट में निवेश करना बेहतर होगा, क्योंकि एक्सचेंजों पर इन्हें आसानी से बेचा जा सकता है। माहेश्वरी के मुताबिक, निवेशकों को अपने पोर्टफोलिया का 10 पर्सेंट हिस्सा गोल्ड में लगाना चाहिए। सोवरेन गोल्ड बॉन्ड 2023-2024 सीरीज I के तहत अप्लाई किए गए सोवरेन गोल्ड बॉन्ड 27 जून को जारी किए जाएंगे।

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