Get App

IRDAI ने जारी किया मास्टर सर्कुलर, जानिए पॉलिसीहोल्डर के रूप में आपके क्या-क्या अधिकार हैं

IRDAI ने पॉलिसीहोल्डर्स को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करने के लिए मास्टर सर्कुलर जारी किया है। कई लोग हेल्थ पॉलिसी और लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीद तो लेते हैं लेकिन वे उनके नियम और शर्तों को अच्छी तरह से नहीं समझते। इससे जरूरत पड़ने पर पॉलिसी का इस्तेमाल करने में उन्हें दिक्कत आती है

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 07, 2024 पर 12:18 PM
IRDAI ने जारी किया मास्टर सर्कुलर, जानिए पॉलिसीहोल्डर के रूप में आपके क्या-क्या अधिकार हैं
IRDAI ने मास्टर सर्कुलर में कहा है कि अगर कोई पॉलिसीहोल्डर अपनी पॉलिसी सरेंडर करना चाहता है या कुछ पैसे निकालना चाहता है तो अप्लिकेशन फाइल होने के 7 दिन के अदर इंश्योरेंस कंपनी को प्रोसेस पूरा करना होगा।

क्या आपके पास लाइफ इश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी है? अगर हां तो आप उनके बारे में कितना जानते हैं? दरअसल, ज्यादातर पॉलिसीहोल्डर्स को अपनी इंश्योरेंस पॉलिसी के बारे में पूरी जानकारी नहीं होती है। इससे जरूरत पड़ने पर उन्हें अपनी पॉलिसी का इस्तेमाल करने में दिकक्त आती है। इसी समस्या को ध्यान में इंश्योरेंस रेगुलेटर आईआरडीआईए ने 5 सितंबर को एक मास्टर सर्कुलर जारी किया है। इसका मकसद पॉलिसीहोल्डर्स को अपने अधिकारों से अवगत कराना है। इस सर्कुलर में लाइफ इश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस के बारें में कई अहम बाते शामिल हैं। मनीकंट्रोल आपको उन बातों के बारे में बता रहा है, जो आपके सीधे तौर पर जुड़ी हैं।

30 दिन का फ्री-लुक पीरियड

लाइफ इंश्योरेंस (Life Insurance) कंपनी को पॉलिसीहोल्डर को 30 दिन का फ्री-लुक पीरियड (Free Look Period) देना होगा। इस दौरान पॉलिसीहोल्डर अपनी पॉलिसी की स्टडी कर सकता है। वह उसके नियम और शर्तों को समझ सकता है। अगर वह पॉलिसी के नियम और शर्तों से संतुष्ट नहीं है तो उसे अपनी पॉलिसी कैंसिल कराने का अधिकार है। पहले कंपनियां 15 दिन का फ्री-लुक पीरियड देती थीं। इस सुविधा के बारे में ज्यादातर पॉलिसीहोल्डर्स को पता नहीं होता था।

डेथ क्लेम सेटलमेंट की डेडलाइन

आपके लिए यह जानना जरूरी है कि पॉलिसीहोल्डर की मौत की स्थिति में बीमा कंपनी डेथ क्लेम के सेटलमेंट में कितना समय ले सकती है। बीमा रेगुलेटर ने कहा है कि मौत के जिन मामलों में जांच जरूरी नहीं इंश्योरेंस कंपनी को डेथ क्लेम का सेटलमेंट प्रोसेस शुरू होने के 15 दिन के अंदर करना होगा। जिन मामलों में इनवेस्टिगेशन जरूरी है, उनमें बीमा कंपनी को प्रोसेस शुरू होने के 15 दिन के अंदर क्लेम का सेटलमेंट करना होगा।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें