फ्री-लुक पीरियड बढ़ाने की तैयारी में IRDAI, बीमा पॉलिसी कैंसिल कराने के लिए मिल सकते हैं 30 दिन

अभी फ्री-लुक पीरियड 15 दिन है। इसका मतलब है कि अगर इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने के बाद ग्राहक को लगता है कि पॉलिसी उसकी जरूरत के हिसाब से नहीं है तो वह उस पॉलिसी को कैंसिल करा सकता है। अभी इसके लिए 15 दिन का समय मिलता है, जो पॉलिसी हाथ में मिलने के बाद शुरू होता है

अपडेटेड Feb 15, 2024 पर 11:53 AM
IRDAI के ड्राफ्ट रेगुलेशन में यह भी कहा गया है कि नॉमिनेशन के बगैर लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी जारी नहीं की जा सकती।

इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (IRDAI) ने फ्री-लुक पीरियड को बढ़ाकर 30 दिन करने का प्रस्ताव दिया है। अभी यह 15 दिन है। फ्री-लुक पीरियड का मतलब यह है कि पॉलिसी खरीदने के बाद अगर ग्राहक को लगता है कि पॉलिसी उसके लिए सही नहीं है तो वह उसे कैंसिल करने के लिए बीमा कंपनी को कह सकता है। अभी इसके लिए ग्राहक को 15 दिन का समय मिलता है। अगर आईआरडीएआई का प्रस्ताव लागू हो जाता है तो ग्राहक को पॉलिसी कैंसिल कराने के लिए 30 दिन का समय मिलेगा। इस बारे में बीमा नियामक की तरफ से जारी ड्राफ्ट रेगुलेशंस में कहा गया है कि ग्राहक को पॉलिसी मिलने की तारीख से 30 दिन के अंदर उसे कैंसिल कराया जा सकेगा।

फ्री-लुक पीरियड का मकसद क्या है?

अभी कुछ कंपनियां पॉलिसी कैंसिल कराने के लिए 30 दिन का फ्री-लुक पीरियड देती हैं। फ्री-लुक पीरियड का मकसद ग्राहक के हितों की रक्षा है। कई बार ग्राहक को पॉलिसी डॉक्युमेंट पढ़ने के बाद यह लगता है कि यह पॉलिसी उसकी जरूरत के हिसाब से नहीं है। कई बार बीमा कंपनी का एजेंट ग्राहक को पॉलिसी के बारे में ऐसी जानकारियां देता है, जो पॉलिसी डॉक्युमेंट में नहीं होती है। ऐसी स्थिति में ग्राहक खुद को ठगा हुआ महसूस करता है। ऐसी स्थिति से ग्राहक को उबारना फ्री-लुक पीरियड का मकसद है।


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कंपनी लौटाती है प्रीमियम का पैसा

अगर ग्राहक पॉलिसी बीमा कंपनी को वापस करने का फैसला करता है तो कंपनी प्रीमियम का पैसा ग्राहक को लौटा देती है। हालांकि, वह फ्री-लुक पीरियड की अवधि के रिस्क प्रीमियम का पैसा काट लेती है। इसके अलावा वह मेडिकल चेक-अप और स्टैंप ड्यूटी जैसे खर्च को भी काट लेती है। इसके अलावा IRDAI के ड्राफ्ट रेगुलेशन में यह भी कहा गया है कि नॉमिनेशन के बगैर लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी जारी नहीं की जा सकती। ड्राफ्ट में कहा गया है कि जनरल और हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों को भी पॉलिसी इश्यू करते वक्त या उसके रिन्यूएल के वक्त नॉमिनेशन हासिल करना होगा।

पॉलिसी सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में जारी होंगी

अगर बीमा नियामक का यह ड्राफ्ट रेगलुशन लागू हो जाता है तो ज्यादातर पॉलिसी इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में जारी की जाएंगी। बीमा नियामक ने कहा है कि ऐसी पॉलिसी जिसका सम एश्योर्ड 100 रुपये से ज्यादा है या सिंगल या सालाना प्रीमियम 10 रुपये से ज्यादा है तो पॉलिसी सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में जारी की जाएगी। इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि पॉलिसी के लिए अप्लिकेशन डिजिटल फॉर्म में मिला है या ऑफलाइन मिला है।

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