अक्सर लोग कर्ज या लोन लेने के बाद उसे जल्द से जल्द खत्म करने की कोशिश करते हैं। जैसे ही हाथ में कुछ अतिरिक्त पैसे आते हैं, मन में पहला विचार यही आता है कि क्यों न बैंक का बकाया चुकाकर 'लोन फ्री' हो जाया जाए। बैंकिंग की भाषा में इसे लोन फोरक्लोजर (Loan Foreclosure) कहा जाता है। लेकिन क्या समय से पहले लोन बंद करना हमेशा एक सही फैसला होता है? आइए विस्तार से समझते हैं।
क्या होता है लोन फोरक्लोजर?
जब आप अपने लोन की अवधि (Tenure) पूरी होने से पहले ही पूरी बकाया राशि (Outstanding Amount) का एकमुश्त भुगतान कर देते हैं, तो उसे लोन फोरक्लोज़र कहते हैं। उदाहरण के लिए, यदि आपने 5 साल के लिए पर्सनल लोन लिया है, लेकिन आप 2 साल बाद ही सारा पैसा चुकाकर अकाउंट बंद कर देते हैं, तो यह फोरक्लोजर कहलाएगा।
1. ब्याज की बचत: सबसे बड़ा फायदा भारी-भरकम ब्याज (Interest) से छुटकारा मिलना है। लोन के शुरुआती वर्षों में ईएमआई का एक बड़ा हिस्सा ब्याज में जाता है। समय से पहले भुगतान करने पर आप भविष्य में लगने वाले ब्याज को बचा लेते हैं।
2. मानसिक शांति: कर्ज मुक्त होने से वित्तीय तनाव कम होता है और आपकी डिस्पोजेबल इनकम (खर्च करने योग्य आय) बढ़ जाती है।
3. डेट-टू-इनकम रेशियो में सुधार: लोन बंद होने से आपकी कर्ज लेने की क्षमता सुधरती है, जो भविष्य में बड़े लोन (जैसे होम लोन) लेने में मदद करती है।
क्रेडिट स्कोर पर क्या पड़ता है असर?
यह एक गलतफहमी है कि लोन बंद करने से क्रेडिट स्कोर हमेशा बढ़ता ही है। इसके कुछ तकनीकी पहलू हैं:
शॉर्ट-टर्म गिरावट: जब आप लोन बंद करते हैं, तो आपका 'क्रेडिट मिक्स' (विभिन्न प्रकार के लोन का मिश्रण) प्रभावित हो सकता है, जिससे स्कोर में मामूली और अस्थायी गिरावट आ सकती है।
लॉन्ग-टर्म फायदा: लंबे समय में, समय से पहले सफल भुगतान आपकी साख को मजबूत करता है। यह दर्शाता है कि आप एक जिम्मेदार उधारकर्ता हैं।
लोन बंद करने से पहले फोरक्लोजर फीस की जांच जरूर करें। कई बैंक (खासकर पर्सनल और कार लोन पर) 2% से 5% तक का जुर्माना वसूलते हैं। अगर लगने वाला चार्ज आपकी ब्याज की बचत से ज्यादा है, तो फोरक्लोज़र करना घाटे का सौदा हो सकता है।
फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन पर आमतौर पर आरबीआई के नियमों के अनुसार कोई फोरक्लोज़र चार्ज नहीं लगता, जबकि फिक्स्ड रेट लोन पर बैंक शुल्क वसूल सकते हैं।