क्या आपका मकानमालिक NRI है? NRI मकानमालिक को रेंट पेमेंट पर किराएदार के लिए TDS काटना जरूरी है, जानिए नियम
अगर आपने NRI से रेजिडेंशियल या कमर्शियल प्रॉपर्टी किराए पर ली है तो उसके रेंट पेमेंट पर TDS का नियम लागू होगा। आपको हर महीने किराए के अमाउंट पर TDS डिडक्ट करना होगा। इसे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास डिपॉजिट करना होगा
कई बार किराएदार यह कहते है कि उन्हें अपने मकानमालिक के रेजिडेंशियल स्टेटस के बारे में पता नहीं था। इस वजह से वे टीडीएस के नियमों का पालन नहीं कर पाए। लेकिन, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट इस तरह के जवाब पर ध्यान नहीं देता है।
कई NRI बेंगलुरु, हैदराबाद, गुड़गांव, नोएडा जैसे आईटी हब में इनवेस्ट करते हैं। प्रॉपर्टी की वैल्यू में एप्रिशिएसन या रेंटल इनकम के लिए ऐसा किया जाता है। कई किरायदारों को यह पता नहीं होता कि अपने NRI मकानमालिक को किराए के पेमेंट से पहले उनके लिए TDS काटना जरूरी है। ऐसा नहीं करने पर उन्हें इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को काफी ज्यादा इंटरेस्ट और पेनाल्टी चुकानी पड़ती है। इसलिए अगर आपने किसी NRI से घर किराया पर लिया है तो आपको TDS काटने के नियम का पालन करना होगा। यह नियम रेजिडेंशियल और कमर्शियल दोनों तरह की प्रॉपर्टी पर लागू है।
NRI का मतलब क्या है?
एनआरआई एक इंडिविजुअल है, जो भारतीय मूल का व्यक्ति या भारत का नागरिक हो सकता है, लेकिन वह इनकम टैक्स कानून के लिहाज से इंडिया का रेजिडेंट नहीं है। इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 6 में व्यक्ति के रेजिडेंशियल स्टेट्स के बारे में बताया गया है। किसी व्यक्ति को इंडिया का रेजिडेंट माना जाता है जब वह निम्नलिखित शर्तों में से किसी एक को पूरा करता है:
(i) अगर वह पिछले साल कम से कम 182 दिन इंडिया में बिताया है, या
(ii) अगर व्यक्ति ने पिछले साल इंडिया में कम से कम 60 दिन बिताया है और उसके ठीक पहले के चार सालों के दौरान कम से कम 365 दिन इंडिया में बताया है
दूसरी शर्त (ii) उन लोगों पर लागू नहीं होती है, जो भारत के नागरिक हैं और विदेश में नौकरी के लिए इंडिया से बाहर जाते है या जो इंडियन शिप के क्रू मेंबर हैं
इसलिए एनआरआई वह व्यक्ति है जो ऊपर की शर्तों में से किसी को पूरी नहीं करता है और जिसे इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 6 (1A) के तहत डीम्ड रेजिडेंट नहीं माना जाता है।
NRI की प्रॉपर्टी किराया पर लेने में TDS के क्या प्रावधान है?
प्रॉपर्टी पर NRI को किराया चुकाने वाले किराएदार को निम्नलिखित नियमों का पालन करना जरूरी है:
1. उसके लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से टैक्स डिडक्शन और कलेक्शन अकाउंट नंबर (TAN) लेना जरूरी है। इसके लिए उसे TIN-PAN फैसिलिटेशन सेंटर पर ऑनलाइन या ऑफलाइन फॉर्म 49बी सब्मिट करना पड़ता है। ऐसा सिर्फ एक बार करना पड़ता है। अगर किराएदार के पास पहले से TAN नंबर है तो उसे दोबारा लेने की जरूरत नहीं है।
2. किराए के अमाउंट पर 31.2% (30% इनकम टैक्स + 4% सेस) रेट से TDS काटना होगा। इस अमाउंट को पैन के इस्तेमाल से इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास जमा करना होगा। ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग-इन करने के बाद ITNS 281 फॉर्म भरकर यह काम किया जा सकता है। टीडीएस का पेमेंट हर महीने करना जरूरी है या अगले कैलेंडर महीने की 7 तारीख से पहले इसे डिपॉजिट किया जा सकता है। मार्च महीने का डिपॉजिट 30 अप्रैल तक करना होगा।
3. TDS रिटर्न फाइलिंग की अंतिम तारीख से पहले ऑनलाइन या ऑफलाइन तरीके से फॉर्म 27Q में टीडीएस रिटर्न सब्मिट करना होगा:
पीरियड
अंतिम तारीख
अप्रैल-जून
15 जुलाई
जुलाई-सितंबर
15 अक्टूबर
अक्टूबर-दिसंबर
15 जनवरी
जनवरी-मार्च
15 मई
4. TDS-CPC की वेबसाइट https://www.tdscpc.gov.in/en/home.html से फॉर्म 16ए जेनरेट और इश्यू करना होगा।
5. रेंट के पेमेंट के समय किराएदार को फॉर्म 15CA भी भरना होगा इसे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को ऑनलाइन सब्मिट करना होगा।
क्या TDS के कम रेट्स से डिडक्शन किया जा सकता है?
NRI प्रॉपर्टी ओनर्स को टीडीएस के लोअर रेट से डिडक्शन की इजाजत है। इसके लिए इनकम टैक्स एक्ट के सेक्श 197 के तहत टीडीएस के लोअर डिडक्शन के लिए सर्टिफिकेट के वास्ते इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास अप्लाई करना होगा। इसके लिए फॉर्म 13 को भरने के बाद इसे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास ऑनलाइन फाइल करना होगा। इस सर्टिफिकेट के लिए अलग से हर साल अप्लाई करना होगा। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट एनआरआई की तरफ से फाइल किए गए डॉक्युमेंट्स के आधार पर यह सर्टिफिकेट जारी करता है। इसके लिए वह तभी इजाजत देता है जब वह पाता है कि एनआरआई की टैक्स लायबिलिटी TDS के रेट से काफी कम है और उसका टैक्स रिकॉर्ड बिल्कुल क्लीन है। लोअर रेट से टीडीएस डिडक्ट करने से पहले किराएदार के लिए सर्टिफिकेट की वैलिडिटी चेक करना बहुत जरूरी है।
TDS पेमेंट नहीं करने पर पेनाल्टी
लेट डिडक्शन/लेट पेमेंट पर इंटरेस्ट : अगर किराएदार टीडीएस डिडक्ट करना भूल जाता है तो उसे डिफॉल्ट के पीरियड के लिए हर महीने 1 फीसदी रेट से इंटरेस्ट चुकाना पड़ता है। अगर किराएदार टीडीएस तो डिडक्ट करता है लेकिन उसे तय समय के अंदर डिपॉजिट करना भूल जाता है तो उसे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को हर महीने 1.5 फीसदी इंटरेस्ट चुकाना पड़ता है।
टीडीएस रिटर्न फाइलिंग में देर पर लेट फीस और पेनाल्टी : अगर किराएदार टीडीएस रिटर्न फाइलिंग में डिफॉल्ट कर देता है तो उसे रोजाना 200 की दर से लेट फीस चुकाना होता है और उसे इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 271एच के तहत पेनाल्टी चुकाना पड़ता है जो 10,000 से लेकर 1,00,000 रुपये तक जा सकती है।
कानूनी कार्रवाई: अगर किराएदार सरकार को टीडीएस नहीं चुकाता है तो इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 276बी के तहत उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। ऐसी स्थिति में उसे तीन महीने से लेकर 7 साल तक की सजा हो सकती है।
क्या किराएदार एनआरआई को किए गए पेमेंट के लिए फॉर्म 26QC फाइल कर सकता है?
फॉर्म 26क्यूसी की जरूरत तब पड़ती है जब मकानमालिक इंडिया में रेजिडेंट होता है। इसलिए किराएदार अगर एनआरआई की प्रॉपर्टी का इस्तेमाल कर रहा है तो वह फॉर्मक्यूसी फाइल नहीं कर सकता।
निष्कर्ष: कई बार किराएदार यह कहते है कि उन्हें अपने मकानमालिक के रेजिडेंशियल स्टेटस के बारे में पता नहीं था। इस वजह से वे टीडीएस के नियमों का पालन नहीं कर पाए। लेकिन, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट इस तरह के जवाब पर ध्यान नहीं देता है। इसलिए अपने मकानमालिक के रेजिडेंशियल स्टेटस को के बारे में जानना बहुत जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर किराएदार को इंटरेस्ट और पेनाल्टी के साथ दूसरे नुकसान भी उठाने पड़ सकते हैं। इसके अलावा अगर आपको लगता है कि कंप्लायंस का सिस्टम बहुत बोझिल है तो बेहतर होगा कि आप किसी चार्टर्ड अकाउंटेंड या टैक्स-एडवाइजर की मदद लें।
(अभिषेक अनेजा सीए हैं। वह पर्सनल फाइनेंस और इनकम टैक्स से जुड़े मामलों के एक्सपर्ट हैं।)