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Income Tax Filing: F&O ट्रेडर्स के लिए टैक्स फाइलिंग पर बड़ा अपडेट, चेक कर लें ये नए नियम और ऐसे निकाले अपना टर्नओवर

ITR 2026 New Rules for F&O Trading: इनकम टैक्स विभाग ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के ITR फॉर्म में F&O ट्रेडर्स के लिए बड़े बदलाव किए हैं। अब टैक्सपेयर्स को अपने रिटर्न में F&O टर्नओवर और डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग से होने वाले नफा-नुकसान की जानकारी अलग से देनी होगी। जानिए क्या-क्या बदला है

Curated By: Abhishek Guptaअपडेटेड Jul 15, 2026 पर 10:00 AM
Income Tax Filing: F&O ट्रेडर्स के लिए टैक्स फाइलिंग पर बड़ा अपडेट, चेक कर लें ये नए नियम और ऐसे निकाले अपना टर्नओवर
नौकरीपेशा लोग जो पार्ट-टाइम या फुल-टाइम F&O ट्रेडिंग भी करते हैं, इस इनकम को नॉन-स्पेक्ट्युलेटिव बिजनेस इनकम माना जाता है

ITR Rules for F&O Traders 2026: अगर आप फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) यानी डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग करते हैं, तो इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने से पहले इस बार के नए नियमों को जान लेना बेहद जरूरी है। इनकम टैक्स विभाग ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के ITR फॉर्म में F&O ट्रेडर्स के लिए बड़े बदलाव किए हैं। अब टैक्सपेयर्स को अपने रिटर्न में F&O टर्नओवर और डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग से होने वाले नफा-नुकसान की जानकारी अलग से देनी होगी।

नौकरीपेशा लोगों के लिए, जो पार्ट-टाइम या फुल-टाइम F&O ट्रेडिंग भी करते हैं, इस इनकम को नॉन-स्पेक्ट्युलेटिव बिजनेस इनकम माना जाता है। इसलिए आपके लिए यह समझना बहुत जरूरी है कि टर्नओवर की गणना कैसे होती है, क्योंकि इसी के आधार पर तय होता है कि आपको टैक्स ऑडिट कराना होगा या नहीं। आइए आसान भाषा में इस पूरे गणित को समझते हैं।

F&O ट्रेडिंग में टर्नओवर की गणना कैसे की जाती है?

इनकम टैक्स एक्ट में F&O टर्नओवर निकालने के लिए कोई सीधा नियम नहीं है, लेकिन इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) के टैक्स ऑडिट गाइडलाइंस के मुताबिक इसे इस तरह कैलकुलेट किया जाता है:

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