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रिश्ते में प्यार के नाम पर खुद को तो नहीं खो रहे? अंकुर वारिकू की 'फोन-चार्जर' वाली बात समझें

अंकुर वारिकू ने रिश्तों को समझाने के लिए फोन चार्जर की एक दिलचस्प मिसाल दी है। उनका कहना है कि जिस तरह हम किसी दूसरे का फोन चार्ज करने के चक्कर में अपनी बैटरी खत्म कर सकते हैं, वैसे ही रिश्तों में भी दूसरों को खुश रखने के लिए खुद को नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या यह सही है?

Edited By: Anchal Jhaअपडेटेड Aug 11, 2026 पर 1:11 PM
रिश्ते में प्यार के नाम पर खुद को तो नहीं खो रहे? अंकुर वारिकू की 'फोन-चार्जर' वाली बात समझें
वारिकू की इस पूरी बात का संदेश काफी सीधा है, दूसरों की मदद करना अच्छी बात है

कभी-कभी रिश्तों की सबसे बड़ी सच्चाई किसी भारी-भरकम सलाह में नहीं, बल्कि रोजमर्रा की एक छोटी-सी चीज में छिपी होती है। मोटिवेशनल स्पीकर अंकुर वारिकू ने फोन चार्जर की एक बेहद आसान मिसाल के जरिए ऐसी ही बात समझाने की कोशिश की है। सोचिए, कोई अपना फोन चार्ज करने के लिए आपसे बार-बार चार्जर मांगता है और आप हर बार उसकी मदद करते रहते हैं। धीरे-धीरे उसका फोन 100 प्रतिशत हो जाता है, लेकिन इसी दौरान आपकी अपनी बैटरी खत्म होने लगती है।

यही स्थिति कई बार रिश्तों में भी बन जाती है, जहां हम सामने वाले की जरूरतों, भावनाओं और परेशानियों को लगातार प्राथमिकता देते रहते हैं, जबकि खुद को समय देना भूल जाते हैं। वारिकू की यह मिसाल सवाल उठाती है कि क्या दूसरों का ख्याल रखते-रखते हम अपनी जरूरतों और खुशियों को नजरअंदाज तो नहीं कर रहे?

किसी ने मांगा चार्जर, आपने तुरंत दे दिया

कल्पना कीजिए कि आपका कोई करीबी आपके पास आता है और कहता है कि उसके फोन की बैटरी खत्म होने वाली है। वह आपसे चार्जर मांगता है। आप बिना ज्यादा सोचे अपना चार्जर उसे दे देते हैं। उसका फोन चार्ज होना शुरू हो जाता है और आपको लगता है कि आपने उसकी मदद कर दी। यहां तक सबकुछ बिल्कुल सामान्य है। लेकिन इसी बीच आपकी अपनी ‘बैटरी’ खत्म हो रही है

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