ITR Filing 2024: न्यू टैक्स रीजीम से ओल्ड टैक्स रीजीम में शिफ्ट करना चाहते हैं? जानिए क्या है प्रोसेस

साल में एक बार इनकम टैक्स की नई रीजीम में से ओल्ड रीजीम में शिफ्ट करने की सुविधा सिर्फ सैलरीड टैक्सपेयर्स को है। ऐसे टैक्सपेयर्स को रीजीम में बदलाव करने के लिए डेडलाइन से पहले रिटर्न फाइल करना होगा

अपडेटेड Jun 29, 2024 पर 10:39 PM
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बजट 2023 में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने नई रीजीम को अट्रैक्टिव बनाने के लिए कई ऐलान किए थे। उन्होंने इसे डिफॉल्ट रीजीम बनाने का भी ऐलान किया था।

इनकम टैक्स की नई रीजीम बजट 2020 में पेश की गई थी। इसके बाद टैक्सपेयर्स के लिए ओल्ड रीजीम और नई रीजीम में से किसी एक का इस्तेमाल करने का विकल्प है। सरकार का फोकस इनकम टैक्स की नई रीजीम पर रहा है। वह चाहती है कि ज्यादा टैक्सपेयर्स नई रीजीम का इस्तेमाल करें। लेकिन, टैक्सपेयर्स इसमें दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। पिछले साल आए एक सर्वे के नतीजें बताते हैं कि अब भी करीब 85 फीसदी इंडिविजुचअल टैक्सपेयर्स ओल्ड रीजीम का इस्तेमाल कर रहे हैं। बजट 2023 में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने नई रीजीम को अट्रैक्टिव बनाने के लिए कई ऐलान किए थे। उन्होंने इसे डिफॉल्ट रीजीम बनाने का भी ऐलान किया था। आइए जानते हैं इसकी मतलब क्या है और कोई टैक्सपेयर्स नई रीजीम से ओल्ड रीजीम में कैसे शिफ्ट हो सकता है।

डिफॉल्ट रीजीम का मतलब क्या है?

नई रीजीम (Income Tax New Regime) को डिफॉल्ट रीजीम (Default Regime) बनाने का मतलब है कि अगर कोई टैक्सपेयर्स ओल्ड रीजीम (Income Tax Old Regime) का इस्तेमाल करना चाहता है तो उसे यह बताना होगा। नहीं बताने पर यह मान लिया जाएगा कि वह इनकम टैक्स की नई रीजीम का इस्तेमाल करना चाहता है। दरअसल, यह सैलरीड टैक्सपेयर्स के लिए मायने रखता है। इसकी वजह यह है कि एंप्लॉयर वित्त वर्ष के दौरान अनुमानित टैक्स के आधार पर एंप्लॉयीज की सैलरी से हर महीने टैक्स काटते हैं। इसे TDS कहा जाता है। उन्हें टीडीएस का इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास जमा करना पड़ता है। इसलिए एंप्लॉयर का फाइनेंस डिपार्टमेंट हर वित्त वर्ष की शुरुआत में ही एंप्लॉयी से यह पूछता है कि वह नई रीजीम और पुरानी रीजीम में से किसना इस्तेमाल करना चाहते हैं। अगर कोई एंप्लॉयी नहीं बताता है तो कंपनी यह मान लेती है कि वह नई रीजीम का इस्तेमाल करना चाहता है।


किसे रीजीम में बदलाव करने की इजाजत है?

अगर आप भी अपने एंप्लॉयर को ओल्ड रीजीम में अपनी दिलचस्पी के बारे में बताना भूल गए हैं और उसने नई रीजीम के हिसाब से टीडीएस काटा है तो आप इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते वक्त ओल्ड रीजीम का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह ध्यान रखना जरूरी है कि ओल्ड रीजीम से नई रीजीम और नई रीजीम से ओल्ड रीजीम में शिफ्ट करने की इजाजत सिर्फ सैलरीड इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स को है। सैलरीड इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स साल में एक बार अपनी रीजीम में बदलाव कर सकते हैं। ऐसे टैक्सपेयर्स जिनकी इनकम का स्रोत बिजनेस है उन्हें इसकी इजाजत नहीं है।

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ओल्ड से नई रीजीम में शिफ्ट होने का क्या है तरीका?

नई रीजीम से ओल्ड रीजीम में शिफ्ट होने के लिए आपको इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते वक्त आईटीआर फॉर्म में ओल्ड रीजीम को सेलेक्ट करना होगा। दूसरी बात कि इस सुविधा का इस्तेमाल करने के लिए आपको डेडलाइन से पहले अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना होगा। अगर आप डेडलाइन के बाद इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते हैं तो आपका इनकम टैक्स कैलकुलेशन नई टैक्स रीजीम के हिसाब से होगा।

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