इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने में सबसे आगे सैलरीड टैक्सपेयर्स रहते हैं। इनकम टैक्स के नियमों के हिसाब से अगर नौकरी करने वाले किसी व्यक्ति की सालाना इनकम 2.5 लाख रुपये तक है तो उसे टैक्स चुकाने की जरूरत नहीं है। यह नियम इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम का इस्तेमाल करने वाले टैक्सपेयर्स के लिए है। नई रीजीम में एग्जेम्प्शन लिमिट सालाना 4 लाख रुपये है। इसका मतलब है कि नौकरी करने वाले किसी व्यक्ति की सालाना इनकम 4 लाख रुपये तक है तो उसे टैक्स चुकाने की जरूरत नहीं है।
कैसे तय होता है कौन टैक्सपेयर किस फॉर्म का इस्तेमाल करेगा?
इंडिया में इनकम के स्रोत के हिसाब से यह तय होता है कि टैक्सपेयर्स रिटर्न फाइल करने के लिए किसी आईटीआर फॉर्म का इस्तेमाल करेगा। नौकरी करने वाले लोग सबसे ज्यादा आईटीआर फॉर्म 1 का इस्तेमाल करते हैं। इस फॉर्म को सहज फॉर्म भी कहा जाता है।
इनकम टैक्स के कुल कितने आईटीआर फॉर्म उपलब्ध हैं?
ITR-1 यानी सहज फॉर्म इनकम टैक्स के 7 आईटीआर फॉर्म्स में से सबसे आसान फॉर्म है। अगर नौकरी करने वाले किसी व्यक्ति की कुल इनकम 50 लाख रपये तक या इससे कम है तो उसे आईटीआर-1 यानी सहज फॉर्म का इस्तेमाल करना होगा। इसके लिए इनकम टैक्स डिपार्टेमेंट की तरफ से कुछ शर्तें तय की गई हैं। ये शर्तें निम्नलिखित हैं:
-इनकम का स्रोत सैलरी या पेशन होना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति दो जगह नौकरी करता है तो भी वह सहज फॉर्म का ही इस्तेमाल करेगा।
-उसे लॉटरी या रेस हॉर्स जीतने से किसी तरह की इनकम नहीं होनी चाहिए।
-नौकरी करने वाले वाले का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (शेयरों और म्यूचुअल फंड की यूनिट्स की बिक्री से) एक वित्त वर्ष में 1.25 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
रिटर्न फाइल करने के लिए फॉर्म 16 जरूरी है
अगर कोई टैक्सपेयर्स इन शर्तों को पूरी करता है तो वह इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए सहज फॉर्म का इस्तेमाल कर सकता है। इस वित्त वर्ष से इनकम टैक्स डिपारमेंट ने इनकम टैक्स फॉर्म में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस की जानकारी को अनिवार्य बना दिया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आप नौकरी करते हैं तो आपको इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए फॉर्म 16 की जरूरत पड़ेगी। यह फॉर्म एंप्लॉयर यानी वह कंपनी जारी करेगी, जहां आप नौकरी करते हैं। एंप्लॉयर्स के लिए 15 जून तक सभी एंप्लॉयीज को फॉर्म 16 जारी करना जरूरी है।
एंप्लॉयीज अब डिजिटल फॉर्म 16 इश्यू कर रहे हैं।
फॉर्म 16 में आपकी सैलरी, TDS और डिडक्शंस की जानकारी होती है। डिजिटल फॉर्म 16 से इनकम टैक्स रिटर्म फाइल करना और आसान हो गया है। आईटीआर-1 का इस्तेमाल करने वाले टैक्सपेयर्स को अपना डिजिटल फॉर्म 16 टैक्स फाइलिंग प्लेटफॉर्म की वेबसाइट पर अपलोड करना होगा। फिर, प्लेटफॉर्म खुद इनकम यानी सैलरी से जुड़ी जानकारियां फॉर्म 16 से हासिल कर लेगा।