ITR Filing 2026: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने का सीजन शुरू हो चुका है। आयकर विभाग ने ITR-1 (सहज), ITR-2 और ITR-4 (सुगम) के लिए ऑनलाइन फाइलिंग और एक्सेल यूटिलिटी जारी कर दी है। हालांकि टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि नौकरीपेशा लोगों को जून के मध्य तक इंतजार करना चाहिए, क्योंकि ज्यादातर कर्मचारियों को तब तक Form 16 मिल जाता है।
इस बार का ITR सीजन कई अहम बदलावों के साथ आया है। रिटर्न भरने की प्रक्रिया भले ही पहले जैसी दिखे, लेकिन वित्त वर्ष 2025-26 की आय के लिए रिटर्न दाखिल करते समय कुछ नए नियमों का ध्यान रखना होगा।
इस बार ITR-1 फॉर्म को और ज्यादा टैक्सपेयर्स के लिए उपयोगी बनाया गया है। अब टैक्सपेयर्स इसमें दो मकानों से होने वाली आय की जानकारी दे सकेंगे। पहले केवल एक मकान की आय दिखाने की अनुमति थी।
इसके अलावा लिस्टेड शेयरों और म्यूचुअल फंड से मिलने वाले सेक्शन 112A के तहत लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन को भी ITR-1 में दिखाया जा सकेगा। हालांकि इसके लिए कुल कैपिटल गेन 1.25 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होना चाहिए। और पिछले वर्षों का कोई कैपिटल लॉस आगे नहीं ले जाया गया हो।
2. कैपिटल गेन टैक्स के नियम बदले
23 जुलाई 2024 से कैपिटल गेन टैक्स के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। अब ज्यादातर संपत्तियों के लिए इंडेक्सेशन का फायदा खत्म कर दिया गया है। इसके बदले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स दर 12.5% कर दी गई है।
साथ ही होल्डिंग पीरियड को भी आसान बनाया गया है। अब सूचीबद्ध सिक्योरिटीज के लिए 1 साल और बाकी सभी संपत्तियों के लिए 2 साल की अवधि तय की गई है।
आयकर विभाग ने ITR फॉर्म में एक नया कॉलम जोड़ा है, जिसमें टैक्सपेयर्स को वह किराया बताना होगा जो वसूला नहीं जा सका।
पहले ITR-1 और ITR-4 भरने वालों के पास ऐसी जानकारी अलग से देने की सुविधा नहीं थी। नए कॉलम से किराये की आय को लेकर पारदर्शिता बढ़ेगी और वास्तविक टैक्स देनदारी तय करने में मदद मिलेगी।
4. बैंक खाते का बैलेंस बताना होगा
ITR-4 भरने वाले टैक्सपेयर्स के लिए एक नया खुलासा अनिवार्य किया गया है।
सेक्शन 44AD, 44ADA और 44AE के तहत प्रिजम्पटिव टैक्सेशन स्कीम का लाभ लेने वालों को 31 मार्च 2026 तक अपने सभी सक्रिय बैंक खातों का कुल क्लोजिंग बैलेंस बताना होगा।
5. नई टैक्स व्यवस्था के नियम स्पष्ट
पिछले कुछ साल में नई टैक्स व्यवस्था को चुनने या उससे बाहर निकलने की प्रक्रिया कई लोगों के लिए उलझन भरी रही थी।
अब FY26 के लिए जारी किए गए फॉर्म में नई टैक्स व्यवस्था को अपनाने या छोड़ने से जुड़ी ज्यादा स्पष्ट जानकारी और अतिरिक्त डिस्क्लोजर दिए गए हैं। इससे खासकर बिजनेस इनकम वाले टैक्सपेयर्स को सही टैक्स व्यवस्था चुनने में आसानी होगी।
सरकार और आयकर विभाग का मकसद रिटर्न फाइलिंग को ज्यादा सरल, पारदर्शी और सटीक बनाना है। इसलिए इस बार रिटर्न भरने से पहले नए नियमों को समझ लेना जरूरी है। छोटी सी चूक भी गलत जानकारी देने या बाद में नोटिस मिलने की वजह बन सकती है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।