ITR Filing 2026: कंपनी ने न्यू टैक्स रिजीम में काट लिया टैक्स, क्या तब भी चुन सकते हैं ओल्ड टैक्स रिजीम?

ITR Filing 2026: अगर आपकी कंपनी ने डिफॉल्ट रूप से न्यू टैक्स रिजीम के तहत TDS काट लिया है, तब भी आप ITR भरते समय ओल्ड टैक्स रिजीम चुन सकते हैं। जानिए किन लोगों को यह विकल्प मिलता है और टैक्स रिफंड कैसे पाया जा सकता है।

अपडेटेड Jun 14, 2026 पर 5:04 PM
कंपनी ने न्यू टैक्स रिजीम के हिसाब से टैक्स काटा है, तब भी आप ITR भरते समय ओल्ड टैक्स रिजीम चुन सकते हैं।

ITR Filing 2026: कई एंप्लॉयी समय रहते अपनी कंपनी को नहीं बता पाते कि वो ओल्ड टैक्स रिजीम चुनना चाहते हैं। ऐसे में कंपनी डिफॉल्ट तौर पर न्यू टैक्स रिजीम के हिसाब से टैक्स काट लेती है। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि आपका टैक्स बचाने का मौका खत्म हो गया है।

मुंबई के चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर (CFP) बलवंत जैन के मुताबिक, कर्मचारी आयकर रिटर्न (ITR) भरते समय अपना टैक्स रिजीम चुन सकते हैं। यानी अगर कंपनी ने न्यू टैक्स रिजीम के तहत TDS काटा है, तब भी आप रिटर्न भरते वक्त ओल्ड टैक्स रिजीम चुन सकते हैं और टैक्स छूट का फायदा ले सकते हैं।

कर्मचारी की क्या थी परेशानी?


एक टैक्सपेयर ने सवाल किया कि वो कंपनी की तय समय सीमा के भीतर नहीं बता पाए कि उन्हें कौन-सा टैक्स रिजीम चुनना है। इसके बाद कंपनी ने उसे डिफॉल्ट न्यू टैक्स रिजीम में मानते हुए टैक्स काट लिया।

इस वजह से उसे हाउस रेंट अलाउंस (HRA) पर मिलने वाली छूट नहीं मिली। लीव ट्रैवल अलाउंस (LTA) का फायदा भी नहीं मिल पाया। इसके अलावा धारा 80C के तहत मिलने वाली कटौतियां और हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर मिलने वाला टैक्स बेनिफिट भी TDS की गणना में शामिल नहीं किया गया। उन्हें चिंता थी कि कहीं कंपनी का फैसला अंतिम तो नहीं है और अगर ऐसा हुआ तो उसे काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

कंपनी ने ऐसा क्यों किया?

बलवंत जैन बताते हैं कि किसी भी कंपनी को वेतन देने से पहले कर्मचारियों का TDS काटना होता है। TDS कितना कटेगा, यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि कर्मचारी ओल्ड टैक्स रिजीम चुनता है या न्यू टैक्स रिजीम।

इसी वजह से कंपनियां पहले से कर्मचारियों से उनकी पसंद पूछती हैं। अगर कोई कर्मचारी समय पर जवाब नहीं देता, तो कंपनी डिफॉल्ट न्यू टैक्स रिजीम के तहत टैक्स काट सकती है। इसलिए आपके मामले में कंपनी ने जो किया, वह नियमों के मुताबिक था।

क्या अब भी ओल्ड टैक्स रिजीम चुन सकते हैं?

इस सवाल का जवाब है- हां। बलवंत जैन के मुताबिक, कंपनी को बताया गया टैक्स रिजीम सिर्फ TDS काटने के लिए होता है। अंतिम फैसला तब होता है, जब आप अपना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते हैं।

यानी अगर कंपनी ने न्यू टैक्स रिजीम के हिसाब से टैक्स काटा है, तब भी आप ITR भरते समय ओल्ड टैक्स रिजीम चुन सकते हैं। इसके बाद आप HRA, LTA, धारा 80C के निवेश, हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम और दूसरी उपलब्ध छूटों का दावा कर सकते हैं।

अगर इन सभी छूटों के बाद आपकी टैक्स देनदारी कम निकलती है, तो ज्यादा कटा हुआ टैक्स आपको रिफंड के रूप में वापस मिल जाएगा।

कौन हर साल बदल सकता है टैक्स रिजीम?

जिन लोगों की आय में बिजनेस या प्रोफेशन से होने वाली कमाई शामिल नहीं है, उनके लिए नियम काफी आसान हैं।

ऐसे टैक्सपेयर हर साल ओल्ड टैक्स रिजीम और न्यू टैक्स रिजीम के बीच अपनी पसंद बदल सकते हैं। यानी एक साल ओल्ड टैक्स रिजीम चुन सकते हैं और अगले साल न्यू टैक्स रिजीम।

बिजनेस करने वालों के लिए क्या नियम है?

अगर आपकी कमाई "बिजनेस या प्रोफेशन से लाभ" के तहत आती है, तो नियम थोड़े अलग हैं। ऐसे लोगों को एक बार ओल्ड टैक्स रिजीम चुनने के बाद आमतौर पर उसी रिजीम में बने रहना होता है, जब तक उनकी बिजनेस इनकम जारी रहती है।

उन्हें ओल्ड टैक्स रिजीम छोड़कर न्यू टैक्स रिजीम में जाने का एक मौका मिलता है। लेकिन एक बार न्यू टैक्स रिजीम चुन लेने के बाद वे दोबारा ओल्ड टैक्स रिजीम में वापस नहीं लौट सकते, जब तक उनकी बिजनेस इनकम बनी रहती है।

31 जुलाई की डेडलाइन न भूलें

बलवंत जैन कहते हैं कि जिन लोगों की बिजनेस इनकम नहीं है, वे ITR दाखिल करने की आखिरी तारीख तक ओल्ड टैक्स रिजीम और न्यू टैक्स रिजीम में से किसी एक को चुन सकते हैं।

इसलिए अगर आप ओल्ड टैक्स रिजीम का फायदा लेना चाहते हैं, तो वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपना ITR 31 जुलाई 2026 तक जरूर दाखिल करें।

अगर आप इस तारीख तक रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं, तो फिर आपको डिफॉल्ट न्यू टैक्स रिजीम के तहत ही रिटर्न भरना पड़ेगा और ओल्ड टैक्स रिजीम चुनने का विकल्प नहीं रहेगा।

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