ITR Filing 2026: इस साल बेचा है सोना? जानिए ज्वेलरी, ETF से डिजिटल गोल्ड तक पर कैसे लगेगा टैक्स

ITR Filing 2026: सोना बेचकर मुनाफा कमाया है? रिटर्न भरने से पहले टैक्स के नियम समझ लेना जरूरी है। ज्वेलरी, डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ETF और SGB पर टैक्स का तरीका अलग है। एक छोटी गलती भी आयकर विभाग के नोटिस की वजह बन सकती है।

अपडेटेड May 30, 2026 पर 3:47 PM
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सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) को टैक्स के लिहाज से सबसे आकर्षक गोल्ड निवेश माना जाता है।

ITR Filing 2026: ITR फाइलिंग सीजन शुरू हो चुका है। ऐसे में जिन लोगों ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सोना बेचा है, उनके लिए टैक्स नियमों को समझना बेहद जरूरी है। कई बार निवेशक सोने की कीमतों पर तो नजर रखते हैं, लेकिन टैक्स नियमों को नजरअंदाज कर देते हैं।

गलत कैटेगरी में जानकारी देने पर आयकर विभाग की ओर से नोटिस भी आ सकता है। खास बात यह है कि फिजिकल गोल्ड, डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ETF, गोल्ड म्यूचुअल फंड और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) पर टैक्स के नियम अलग-अलग हैं।

सोने पर टैक्स कैसे तय होता है?


सोना बेचकर होने वाला मुनाफा कैपिटल गेन माना जाता है। टैक्स इस बात पर निर्भर करता है कि आपने किस तरह का गोल्ड खरीदा था और उसे कितने समय तक अपने पास रखा।

मौजूदा नियमों के मुताबिक ज्यादातर गोल्ड निवेशों पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स 12.5% है। इसमें इंडेक्सेशन का फायदा नहीं मिलता। वहीं शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) पर आपकी आयकर स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। इसलिए 30% टैक्स स्लैब में आने वाले लोगों के लिए शॉर्ट टर्म गेन पर टैक्स का बोझ काफी ज्यादा हो सकता है।

फिजिकल गोल्ड पर क्या नियम हैं?

फिजिकल गोल्ड में सोने के गहने, सिक्के, बार और बुलियन शामिल होते हैं।

अगर आपने खरीद के 24 महीने के भीतर सोना बेच दिया, तो मुनाफा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन माना जाएगा और उस पर आपकी टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा। लेकिन अगर सोना 24 महीने से ज्यादा समय तक रखा गया है, तो मुनाफे पर 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा।

डिजिटल गोल्ड पर भी वही नियम

डिजिटल गोल्ड की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है, लेकिन टैक्स के मामले में इसे फिजिकल गोल्ड की तरह ही माना जाता है क्योंकि इसके पीछे वास्तविक सोना मौजूद होता है।

यहां भी 24 महीने तक होल्ड करने पर मुनाफा शॉर्ट टर्म गेन माना जाएगा और 24 महीने से ज्यादा रखने पर 12.5% LTCG टैक्स लगेगा। हालांकि निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि डिजिटल गोल्ड अभी RBI या SEBI द्वारा रेगुलेट नहीं किया जाता।

Gold ETF क्यों माने जाते हैं बेहतर?

जो निवेशक बिना स्टोरेज की चिंता के सोने में निवेश करना चाहते हैं, उनके बीच गोल्ड ETF काफी लोकप्रिय हैं।

इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन का फायदा सिर्फ 12 महीने बाद मिल जाता है। अगर ETF यूनिट्स 12 महीने के भीतर बेची जाती हैं तो मुनाफा स्लैब रेट के अनुसार टैक्सेबल होगा। 12 महीने से ज्यादा रखने पर 12.5% LTCG टैक्स लगेगा।

Gold Mutual Fund के नियम अलग

गोल्ड म्यूचुअल फंड आमतौर पर सीधे सोना खरीदने की बजाय गोल्ड ETF में निवेश करते हैं।

टैक्स के लिए यहां 24 महीने की होल्डिंग अवधि लागू होती है। यानी दो साल से पहले यूनिट बेचने पर मुनाफा शॉर्ट टर्म गेन माना जाएगा और स्लैब रेट से टैक्स लगेगा। 24 महीने से ज्यादा होल्ड करने पर 12.5% LTCG टैक्स देना होगा।

SGB में सबसे बड़ा टैक्स फायदा

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) को टैक्स के लिहाज से सबसे आकर्षक गोल्ड निवेश माना जाता है।

अगर कोई निवेशक बॉन्ड को उसकी पूरी मैच्योरिटी यानी 8 साल तक होल्ड करता है, तो कैपिटल गेन पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता। हालांकि मैच्योरिटी से पहले बेचने पर अलग नियम लागू होते हैं। 12 महीने के भीतर बेचने पर मुनाफा स्लैब रेट से टैक्सेबल होगा 12 महीने से ज्यादा होल्ड करने पर 12.5% LTCG टैक्स लगेगा।

गोल्ड फ्यूचर्स और ऑप्शंस

कमोडिटी एक्सचेंज में गोल्ड फ्यूचर्स और ऑप्शंस की ट्रेडिंग करने वालों के लिए नियम अलग हैं।

इनसे होने वाला मुनाफा कैपिटल गेन नहीं बल्कि बिजनेस इनकम माना जाता है। इस पर संबंधित टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है। कुछ मामलों में रिकॉर्ड रखने और ऑडिट से जुड़े नियम भी लागू हो सकते हैं।

गिफ्ट में मिला सोना टैक्स फ्री है या नहीं?

हमारे देश में शादी, पारिवारिक समारोह और विरासत के जरिए सोना मिलना आम बात है।

विरासत में मिला सोना मिलने पर समय टैक्स नहीं लगता। इसी तरह माता-पिता, पति-पत्नी या बच्चों जैसे करीबी रिश्तेदारों से मिला सोना भी टैक्स फ्री होता है। शादी के मौके पर मिला सोना भी पूरी तरह टैक्स मुक्त है।

हालांकि अगर किसी गैर-रिश्तेदार से 50,000 रुपये से ज्यादा मूल्य का सोना बिना किसी भुगतान के मिलता है, तो उसकी वैल्यू 'अन्य स्रोतों से आय' के तहत टैक्सेबल हो सकती है। बाद में इसे बेचने पर कैपिटल गेन टैक्स अलग से लागू होगा।

क्या सोने पर टैक्स बचाया जा सकता है?

आयकर कानून की धारा 54F के तहत कुछ मामलों में सोना बेचकर मिली रकम को आवासीय संपत्ति में निवेश करके LTCG टैक्स से राहत ली जा सकती है।

हालांकि टैक्स एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि ऐसी छूट का दावा करने से पहले सभी शर्तों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए।

कौन सा गोल्ड निवेश सबसे ज्यादा टैक्स फ्रेंडली?

अगर सिर्फ टैक्स के नजरिए से देखा जाए, तो मैच्योरिटी तक रखे गए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड सबसे ज्यादा फायदे वाले हैं क्योंकि उन पर कैपिटल गेन पूरी तरह टैक्स मुक्त होता है।

वहीं बाजार आधारित विकल्पों में गोल्ड ETF अमूमन ज्यादा टैक्स एफिशिएंट माने जाते हैं क्योंकि इनमें सिर्फ 12 महीने बाद LTCG का फायदा मिल जाता है। इसके मुकाबले फिजिकल गोल्ड, डिजिटल गोल्ड और गोल्ड म्यूचुअल फंड में निवेशकों को 24 महीने से ज्यादा इंतजार करना पड़ता है।

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