ITR Filing 2026: इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करत समय न करें ये गलतियां, वरना फंस जाएंगे आप, भरनी पड़ेगी पेनाल्टी
ITR Filing 2026: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने का सीजन शुरू होते ही लाखों नौकरीपेशा लोग जल्दबाजी में रिटर्न भर देते हैं। लेकिन सिर्फ सैलरी स्लिप और Form 16 के भरोसे ITR भरना भारी पड़ सकता है
ITR Filing 2026: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने का सीजन शुरू होते ही लाखों नौकरीपेशा लोग जल्दबाजी में रिटर्न भर देते हैं।
ITR Filing 2026: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने का सीजन शुरू होते ही लाखों नौकरीपेशा लोग जल्दबाजी में रिटर्न भर देते हैं। लेकिन सिर्फ सैलरी स्लिप और Form 16 के भरोसे ITR भरना भारी पड़ सकता है। टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक हर साल बड़ी संख्या में लोग ITR-1 और ITR-2 के बीच गलत फॉर्म चुन लेते हैं, जिसकी वजह से बाद में नोटिस, रिफंड में देरी और रिटर्न डिफेक्टिव होने जैसी परेशानियां सामने आती हैं। खासतौर पर शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी या विदेशी आय से जुड़ी छोटी-सी जानकारी छूटने पर भी दिक्कत बढ़ सकती है। इसलिए रिटर्न फाइल करने से पहले यह समझना बेहद जरूरी है कि आपके लिए कौन-सा ITR फॉर्म सही है और किन गलतियों से बचना चाहिए।
कौन भर सकता है ITR-1?
ITR-1, जिसे ‘सहज’ भी कहा जाता है, उन लोगों के लिए है जिनकी आय का स्ट्रक्चर काफी आसान होता है। ऐसे निवासी व्यक्ति जिनकी सालाना आय 50 लाख रुपये तक है और जिनकी कमाई सैलरी, पेंशन, दो घरों की प्रॉपर्टी और ब्याज जैसी अन्य आय से होती है, वे सामान्य तौर पर ITR-1 भर सकते हैं।
इस बार नियमों में थोड़ा बदलाव भी हुआ है। अब अगर किसी व्यक्ति को शेयर या म्यूचुअल फंड से Section 112A के तहत 1.25 लाख रुपये तक का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन हुआ है, तब भी वह ITR-1 भर सकता है, बशर्ते उसके पास कोई कैपिटल लॉस कैरी फॉरवर्ड न हो।
हालांकि सिर्फ सैलरीड होने से हर व्यक्ति ITR-1 के लिए योग्य नहीं हो जाता। अगर किसी के पास विदेशी संपत्ति है, विदेश से आय है, कई प्रॉपर्टी हैं, कंपनी में डायरेक्टर हैं, अनलिस्टेड शेयर रखते हैं या शेयर बाजार में शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन हुआ है, तो उन्हें ITR-2 भरना होगा।
किन लोगों के लिए है ITR-2?
ITR-2 उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के लिए है जिनकी बिजनेस या प्रोफेशन से आय नहीं है, लेकिन उनकी टैक्स डिटेल थोड़ी जटिल है।
अगर किसी व्यक्ति की आय 50 लाख रुपये से ज्यादा है, उसने प्रॉपर्टी बेची है, शेयर बाजार से शॉर्ट टर्म गेन कमाया है, विदेशी आय या विदेशी एसेट हैं, कई घर हैं या कंपनी में डायरेक्टर है, तो उसे ITR-2 फाइल करना चाहिए।
सरल शब्दों में कहें तो अगर आपकी आय बिजनेस से नहीं है लेकिन आप ITR-1 की शर्तों में फिट नहीं बैठते, तो आपके लिए ITR-2 सही फॉर्म है।
लोग सबसे ज्यादा कौन-सी गलतियां करते हैं?
टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक सबसे आम गलती गलत ITR फॉर्म चुनना है। कई लोग सोचते हैं कि कोई भी कैपिटल गेन होने पर ITR-2 जरूरी है, जबकि कुछ लोग शॉर्ट टर्म गेन या प्रॉपर्टी बिक्री के बावजूद ITR-1 भर देते हैं। इससे रिटर्न डिफेक्टिव हो सकता है।
दूसरी बड़ी गलती सिर्फ Form 16 पर भरोसा करना है। कई कर्मचारियों को लगता है कि Form 16 में सारी जानकारी होती है, जबकि उसमें FD का ब्याज, सेविंग अकाउंट इंटरेस्ट, डिविडेंड, म्यूचुअल फंड रिडेम्पशन या अन्य TDS की जानकारी नहीं होती।
यही वजह है कि एक्सपर्ट्स AIS, TIS और Form 26AS जरूर चेक करने की सलाह देते हैं। अगर इन डॉक्यूमेंट्स और ITR में जानकारी मेल नहीं खाती तो आयकर विभाग नोटिस भेज सकता है।
प्री-फिल्ड डेटा पर आंख बंद कर भरोसा करना भी जोखिम
इनकम टैक्स पोर्टल पर कई जानकारियां पहले से भरी हुई आती हैं। लेकिन एक्सपर्ट्स कहते हैं कि इसे अंतिम सही डेटा मान लेना गलत है। कई बार ब्याज की रकम अधूरी होती है, कटौतियां नहीं दिखतीं या बैंक डिटेल पुरानी होती है। इसलिए सबकुछ खुद जांचना जरूरी है।
ITR-2 में सबसे ज्यादा गलती कहां होती है?
ITR-2 भरने वालों के लिए कैपिटल गेन की गणना सबसे बड़ा चुनौती वाला हिस्सा है। लोग शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म गेन में गलती कर देते हैं। कई बार प्रॉपर्टी बिक्री का गलत हिसाब, लागत मूल्य की गलत गणना या कैपिटल लॉस एडजस्टमेंट में भी गलती हो जाती है।
इसके अलावा कई लोग विदेशी संपत्ति, टैक्स फ्री आय या जरूरी डिस्क्लोजर भरना भूल जाते हैं। भले ही टैक्स न बन रहा हो, लेकिन जानकारी देना जरूरी होता है।
आखिरी और सबसे जरूरी काम
रिटर्न भरने के बाद ई-वेरिफिकेशन करना बेहद जरूरी है। कई लोग ITR जमा तो कर देते हैं लेकिन उसे ई-वेरिफाई नहीं करते। इससे रिटर्न प्रोसेस नहीं होता और रिफंड में देरी हो सकती है। साथ ही बैंक अकाउंट नंबर गलत भरने पर भी रिफंड अटक सकता है।