ITR Filing 2026: सैलरी ₹12 लाख है और नहीं कटा TDS, तो भी भरना पड़ सकता है टैक्स! समझिए ITR का यह पेचीदा नियम
ITR Filing 2026: TDS नहीं कटने के बावजूद जब आप अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने बैठते हैं तो आपको झटका लग सकता है। जैसे ही आप सैलरी के अलावा बैंक FD या सेविंग्स अकाउंट का ब्याज जोड़ते हैं, तो स्क्रीन पर जहां टैक्स 'Zero' दिखना चाहिए था, वहां अचानक टैक्स देनदारी नजर आने लगती है। कई करदाताओं को लगता है कि यह कोई तकनीकी गलती है, लेकिन ऐसा नहीं है
नियम के मुताबिक, ₹12 लाख की टैक्स छूट आपकी कुल कमाई पर मिलती है
Income Tax Return 2026 Rule: अगर आपकी सालाना सैलरी ₹12.75 लाख के आसपास है, तो मुमकिन है कि इस पूरे वित्त वर्ष में आपकी कंपनी ने सैलरी से एक रुपये का भी TDS नहीं काटा होगा। बजट 2025 में हुए बड़े बदलाव के बाद नए टैक्स रिजीम के तहत धारा 87A की रिबेट सीमा को ₹7 लाख से बढ़ाकर ₹12 लाख कर दिया गया था। यही वजह है कि पिछले 12 महीनों से आपकी पे-स्लिप पूरी तरह टैक्स-फ्री दिख रही है।
लेकिन असली कहानी तब शुरू होती है जब आप अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने बैठते हैं। जैसे ही आप सैलरी के अलावा बैंक FD या सेविंग्स अकाउंट का ब्याज जोड़ते हैं, तो स्क्रीन पर जहां टैक्स 'Zero' दिखना चाहिए था, वहां अचानक टैक्स देनदारी नजर आने लगती है। कई करदाताओं को लगता है कि यह कोई तकनीकी गलती है, लेकिन ऐसा नहीं है। आइए समझते हैं कि सैलरी पर टीडीएस न कटने का मतलब यह क्यों नहीं है कि आपको टैक्स भी नहीं देना होगा।
कन्फ्यूजन की असली वजह: टीडीएस बनाम टोटल इनकम
ज्यादातर नौकरीपेशा लोग दो चीजों को एक समझ लेते हैं- सैलरी पर कटने वाला TDS और आपकी कुल आय पर लगने वाला टैक्स।
कंपनी को सिर्फ सैलरी का पता होता है: आपकी कंपनी को सिर्फ उतनी ही आय की जानकारी होती है जितनी वह आपको सैलरी के रूप में दे रही है। अगर आपकी ग्रॉस सैलरी ₹12.75 लाख है, तो ₹75000 की स्टैंडर्ड डिडक्शन घटाने के बाद आपकी टैक्स योग्य सैलरी ₹12 लाख बचती है। चूंकि यह ₹12 लाख के दायरे में है, इसलिए कंपनी नियमानुसार शून्य टीडीएस काटती है।
₹12 लाख की रिबेट 'टोटल इनकम' पर है: नियम के मुताबिक, ₹12 लाख की टैक्स छूट आपकी कुल कमाई पर मिलती है। जब आप आईटीआर फाइल करते हैं, तो बैंक से मिला ब्याज, किराये से हुई कमाई या अन्य आय भी इसमें जुड़ जाती है। चूंकि अधिकांश लोग कंपनी को अपनी बाहरी कमाई की घोषणा नहीं करते, इसलिए कंपनी तो टीडीएस नहीं काटती, लेकिन आईटीआर फाइल करते समय आपकी कुल आय ₹12 लाख से ऊपर निकल जाती है और आप रिबेट के दायरे से बाहर हो जाते हैं।
चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) का क्या है कहना?
नई दिल्ली की चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रतिभा गुप्ता बताती हैं, 'इस समय ऐसे क्लाइंट्स को समझाना सबसे मुश्किल काम होता है जिनकी सैलरी ₹12 लाख तक है, उनका नया टैक्स रिजीम में कोई टीडीएस नहीं कटा। लेकिन जब आईटीआर भरते समय एफडी और सेविंग्स अकाउंट का ब्याज जैसी अन्य आय जोड़ी जाती है, तो जो टैक्स पहले ₹0 दिख रहा था, वह अचानक चुकाने योग्य बन जाता है। अंतिम टैक्स हमेशा कुल आय पर तय होता है।' इसके अलावा, कैपिटल गेंस जैसी विशेष दरों पर टैक्स की श्रेणी में आने वाली कमाई इस ₹12 लाख की सीमा में शामिल नहीं होती, उस पर अलग से टैक्स देना होता है।
मार्जिनल रिलीफ का बड़ा सहारा
अगर आपकी कुल आय ₹12 लाख की सीमा से थोड़ी सी ज्यादा हो जाती है, तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपको सीधे स्लैब के हिसाब से बहुत भारी टैक्स देना पड़ेगा। सरकार ने इसके लिए 'मार्जिनल रिलीफ' का सुरक्षा कवच दिया है। इसके तहत अगर आपकी आय तय सीमा से थोड़ी ऊपर जाती है, तो आपका टैक्स केवल उतनी ही बढ़ी हुई रकम तक सीमित रहेगा।
इसे एक आसान उदाहरण से समझें
मान लीजिए आपकी ग्रॉस सैलरी ₹13.10 लाख है। इसमें से ₹75000 की स्टैंडर्ड डिडक्शन घटाने के बाद आपकी टैक्सेबल सैलरी ₹12.35 लाख बनती है। चूंकि यह कुल रकम ₹12 लाख की सीमा से अधिक है, इसलिए आपको धारा 87A के तहत मिलने वाली पूरी टैक्स छूट नहीं मिलेगी।
टैक्स स्लैब के हिसाब से ₹12.35 लाख पर कुल टैक्स ₹65250 बनता है। लेकिन, मार्जिनल रिलीफ की वजह से आपसे ₹65250 का टैक्स नहीं लिया जाएगा। आपका टैक्स केवल उसी राशि तक सीमित रहेगा जितनी आपकी आय ₹12 लाख से ज्यादा है (यानी ₹12.35 लाख-₹12 लाख = ₹35000)। इसलिए आपको ₹65250 के बजाय केवल ₹35000 ही टैक्स देना होगा।
कुल मिलाकर असली बात ये है कि शॉर्ट-टर्म में अपनी टैक्स-फ्री पे-स्लिप देखकर यह न समझें कि आप टैक्स के दायरे से पूरी तरह बाहर हैं। आईटीआर फाइल करने से पहले अपने सभी बैंक खातों का ब्याज और अन्य वित्तीय लाभों को जरूर कैलकुलेट कर लें, ताकि अंतिम समय पर किसी बड़े झटके से बचा जा सके।