प्रॉपर्टी के ओनरशिप के मामले काफी जटिल होते हैं। अगर प्रॉपर्टी विरासत में मिली है तो मामला और पेचीदा हो जाता है। एक व्यक्ति ने मनीकंट्रोल से पिता से गिफ्ट में मिली प्रॉपर्टी पर बहनों के मालिकाना हक से जुड़ा एक सवाल पूछा है। गाजियाबाद के रहने वाले मुकेश साहनी ने बताया है कि 2024 में निधन से पहले उनके पिता ने अपनी कुछ पुश्तैनी प्रॉपर्टी रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड के जरिए उन्हें उपहार में दे दी थी। उनका सवाल है कि क्या उनकी बहनें इस प्रॉपर्टी में हिस्सा मांग सकती हैं?
हिंदू सक्सेशन एक्ट, 1956 के प्रावधान
मनीकंट्रोल ने इस सवाल का जवाब मशहूर टैक्स एक्सपर्ट और सीए बलवंत जैन से पूछा। उन्होंने कहा कि हिंदू सक्सेशन एक्ट, 1956 के प्रावधानों के तहत अगर 17 जून, 1956 के बाद किसी हिंदू व्यक्ति को प्रॉपर्टी विरासत में मिली है तो वह सिर्फ उस व्यक्ति की प्रॉपर्टी होगी। हिंदू सक्सेशन एक्ट, 1956 17 जून, 1956 को लागू हुआ था।
प्रॉपर्टी मिलने की तारीख से पड़ता है फर्क
उन्होंने कहा कि वह व्यक्ति इस प्रॉपर्टी के साथ जो चाहे वह कर सकता है। किसी हिंदू व्यक्ति को मिली ऐसी प्रॉपर्टी स्वत: (automatically) हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) की प्रॉपर्टी नहीं हो जाती है। लेकिन, अगर कोई पुश्तैनी प्रॉपर्टी इस तारीख (17 जून, 1956) से पहले विरासत में मिली है तो वह एचयूएफ की प्रॉपर्टी हो जाती है, जिस पर दूसरे सदस्यों का भी हक बनता है।
17 जून, 1956 से पहले मिली प्रॉपर्टी पर बहनों का भी हक
जैन ने कहा कि चूंकि मुकेश साहनी के मामले में पिता से उन्हें कब प्रॉपर्टी मिली थी, यह नहीं बताया गया है, जिससे उनके सवाल का जवाब उन्हें प्रॉपर्टी मिलने की तारीख पर निर्भर करेगा। अगर उन्हें पिता से प्रॉपर्टी 17 जून, 1956 के बाद गिफ्ट में मिली है तो फिर इस पर सिर्फ उनका हक होगा। अगर पिता से प्रॉपर्टी इस तारीख से पहले मिली है तो फिर गिफ्ट में मिली इस प्रॉपर्टी पर सिर्फ उनका हक नहीं होगा। इस पर उनकी बहनों का भी बराबर हक होगा।
हिंदू सक्सेशन एक्ट में संसोधन के बाद बेटियां भी प्रॉपर्टी में हिस्सेदार
हिंदू सक्सेशन एक्ट में संसोधन के बाद बेटियां भी एचयूएफ के कोपार्सनर (coparceners) बन गई हैं। इसका मतलब है कि बेटियां भी एचयूएफ के सदस्य के रूप में प्रॉपर्टी की सहभागी बन गई हैं। यह संसोधन 9 सितंबर, 2005 से लागू हुआ था। इस हिसाब से मुकेश की बहनें एचयूएफ प्रॉपर्टीज में अपना हिस्सा मांग सकती हैं। वे प्रॉपर्टी में हिस्सा के लिए कोर्ट में केस फाइल कर सकती हैं।
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