ITR Filing 2026: कई सैलरीड लोगों को लगता है कि अगर उनकी इनकम टैक्सेबल लिमिट से नीचे है, तो उन्हें कुछ करने की जरूरत नहीं है। न टैक्स देना है, न ITR भरना है। लेकिन असल में मामला इतना सीधा नहीं होता।
ITR Filing 2026: कई सैलरीड लोगों को लगता है कि अगर उनकी इनकम टैक्सेबल लिमिट से नीचे है, तो उन्हें कुछ करने की जरूरत नहीं है। न टैक्स देना है, न ITR भरना है। लेकिन असल में मामला इतना सीधा नहीं होता।
रोजमर्रा की कई स्थितियों में TDS कट सकता है। चाहे वह सैलरी हो, बैंक का ब्याज, फिक्स्ड डिपॉजिट या छोटी फ्रीलांस कमाई। अगर आप ITR फाइल नहीं करते, तो यह कटा हुआ पैसा आपको वापस नहीं मिलेगा। यानी ऊपर से 'नो टैक्स' लगने वाली स्थिति में भी आपका पैसा फंसा रह सकता है।
सिर्फ रिफंड नहीं है ITR
ITR फाइल करना सिर्फ रिफंड लेने के लिए नहीं है, बल्कि यह आपकी पूरी फाइनेंशियल प्रोफाइल का रिकॉर्ड होता है। यह आपकी इनकम का सबूत देता है, लोन और वीजा के लिए भरोसा बनाता है और आपके सभी ट्रांजैक्शन को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करता है। आज के समय में ज्यादातर लेन-देन ट्रैक होते हैं, इसलिए ITR न भरना बाद में परेशानी भी पैदा कर सकता है।
ये गलतिया करते हैं लोग
सबसे बड़ी गलती यही होती है कि लोग सोच लेते हैं, 'टैक्स नहीं है, तो कुछ करने की जरूरत नहीं है।' इसी वजह से वे ITR फाइल नहीं करते और FD, सैलरी या फ्रीलांस इनकम पर कटे TDS का रिफंड लेने से चूक जाते हैं।
उदाहरण के लिए, अगर फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर सालाना ब्याज 50,000 रुपये से ज्यादा है, तो बैंक 10% TDS काटता है। अगर PAN नहीं दिया गया है, तो यह 20% तक हो सकता है। ऐसे में ज्यादा कटा हुआ टैक्स ITR फाइल करके वापस लिया जा सकता है।
एक और आम गलती है समय पर ITR फाइल न करना। इससे शेयर या म्यूचुअल फंड में हुए नुकसान को आगे के सालों में सेट-ऑफ करने का फायदा नहीं मिल पाता।
ITR फाइल करते समय क्या रखें ध्यान
ITR आपकी पूरी वित्तीय स्थिति की झलक देता है, इसलिए सही जानकारी देना जरूरी है। इसके लिए ITR फॉर्म, सैलरी स्लिप, PAN, आधार, बैंक अकाउंट डिटेल, निवेश और कटौती के सबूत संभालकर रखें। साथ ही Form 26AS (Form 168) और एनुअल इन्फॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) को भी जरूर मिलान करें, ताकि कोई गलती न रहे और रिफंड जल्दी मिले।
नए टैक्स रिजीम के नियम
नए टैक्स रिजीम में 4 लाख रुपये से ज्यादा इनकम पर टैक्स लगता है:
अगर आपकी सालाना कमाई 24 लाख से ऊपर है, तो 30% टैक्स लगता है। हालांकि, सेक्शन 87A के तहत रिबेट के बाद 12 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स-फ्री हो सकती है। सैलरीड लोगों के लिए 75,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद यह सीमा 12.75 लाख रुपये तक पहुंच जाती है।
पुराने टैक्स रिजीम में क्या फायदा
पुराने टैक्स सिस्टम में 80C, 80D, 80TTA जैसे सेक्शन और DA, HRA, LTA जैसे अलाउंस का फायदा मिलता है। लेकिन इसमें टैक्स दरें ज्यादा होती हैं।
2.5 लाख तक कोई टैक्स नहीं, 2.5-5 लाख पर 5%, 5-10 लाख पर 20% और 10 लाख से ऊपर 30% टैक्स लगता है।
क्या ITR फाइल करना जरूरी है?
अगर आपकी इनकम बेसिक छूट सीमा से ऊपर है और टैक्स स्लैब में आती है, तो ITR फाइल करना जरूरी है। यहां तक कि अगर आपकी अंतिम टैक्स देनदारी शून्य हो। ऐसा इसलिए क्योंकि टैक्स नहीं बनना अक्सर रिबेट और कटौती की वजह से होता है, न कि इसलिए कि आपकी इनकम टैक्स के दायरे से बाहर है।
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