इनकम टैक्स डिपार्टमेंट हर साल आईटीआर फॉर्म्स में कुछ बदलाव करता है। कई बार फाइनेंस एक्ट के प्रस्ताव की वजह से यह बदलाव जरूरी हो जाता है। कई बार इनकम टैक्स डिपार्टमेंट टैक्सपेयर्स से कुछ खास जानकारी मांगता है, जिसके चलते उसे आईटीआर फॉर्म में बदलाव करना पड़ता है। इस बार भी इनकम टैक्स अथॉरिटीज ने फॉर्म्स में कुछ बदलाव किए हैं। आइए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं।
नई रीजीम से पुरानी रीजीम में लौटने का विकल्प
जब से इनकम टैक्स की नई रीजीम (New Tax Regime) शुरू हुई है, इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स के लिए नई और पुरानी रीजीम (Old Tax Regime) में से किसी एक का चुनाव करने का विकल्प रहता है। इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने वाले टैक्सपेयर को यह बताना जरूरी है कि वह नई और पुरानी रीजीम में से किसका इस्तेमाल करना चाहता है। आईटीआर 4 का इस्तेमाल करने वाला टैक्सपेयर अगर नई टैक्स रीजीम की जगह ओल्ड टैक्स रीजीम का इस्तेमाल करता है तो उसे फॉर्म 10-IEA फाइल करना पड़ता है। आईटीआर फॉर्म 1 और 4 में डिडक्शन क्लेम करने के लिए सेक्श 80सीसीएच के तहत एक नया कॉलम जोड़ा गया है।
आईटीआर फॉर्म 2, 3, 5 और 6 का इस्तेमाल करने वाले टैक्सपेयर्स को कैपिटल गेंस अकाउंट स्कीम के बारे में कई जानकारियां देनी पड़ती है। इसलिए इनकम टैक्स अथॉरिटीज ने पिछले साल के फॉर्म में संसोधन किया है। इसी तरह आईटीआर 4 में भी बदलाव किए गए हैं। इसे सुगम भी कहा जाता है। यह फॉर्म इंडिविजुअल, हिंदू अविभाजित परिवार और ऐसे फर्मों के लिए है, जिनकी कुल इनकम 50 लाख रुपये तक है और जिन्हें बिजनेस और प्रोफेशन से इनकम होती है। आईटीआर-4 का इस्तेमाल करने वाले टैक्सपेयर्स को नई टैक्स रीजीम की जगह पुरानी रीजीम का इस्तेमाल करने के लिए फॉर्म 10-आईईए का इस्तेमाल करना पड़ता है।
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डोनेशन के बारे में डिटेल जानकारी
अगर किसी टैक्सपेयर ने पॉलिटिकल पार्टी को डोनेशन दिया है तो उसे इसकी जानकारी नए शिड्यूल 80जीजीसी के तहत बतानी होती है। यह आईटीआर फॉर्म 2, 3,5 और 6 पर लागू होता है। इसमें कंट्रिब्यूशन की डेट, कंट्रिब्यूशन के अमाउंट, एलिजिबल कंट्रिब्यूशन अमाउंट आदि के बारे में बताना पड़ता है। इस तरह इनकम टैक्स डिपार्टमेंट हर साल जरूरत के हिसाब से इनकम टैक्स फॉर्म्स में जरूरी बदलाव करता है। वह इनके बारे में टैक्सपेयर्स को बताता है।