ITR Filing: इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने में इन 6 गलतियों से बचें, आगे नहीं होगी कोई दिक्कत

अगर आप इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने जा रहे हैं तो आपको अक्सर होने वाली इन गलतियों से सावधान रहने की जरूरत है। आईटीआर फॉर्म में गलत जानकारी देने या कोई दूसरी गलती होने पर आपका रिटर्न डिफेक्टिव हो सकता है

अपडेटेड Jun 24, 2024 पर 1:51 PM
31 जुलाई तक रिटर्न नहीं फाइल करने पर पेनाल्टी लगेगी और टैक्स पर इंटरेस्ट चुकाना होगा।

इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करने की डेडलाइन नजदीक आ रही है। 31 जुलाई तक रिटर्न नहीं फाइल करने पर पेनाल्टी लगेगी और टैक्स पर इंटरेस्ट चुकाना होगा। 31 दिसंबर तक पेनाल्टी और टैक्स पर इंटरेस्ट के साथ बिलेटेड रिटर्न फाइल किया जा सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बिलेटेड रिटर्न की सुविधा ऐसे लोगों के लिए है जो किसी खास वजह से 31 जुलाई तक रिटर्न फाइल नहीं कर पाते हैं। टैक्सपेयर्स को 31 जुलाई से पहले रिटर्न फाइल करना कई तरह से फायदेमंद है। एक्सपर्ट्स ने टैक्सपेयर्स को रिटर्न फाइल करने में 5 गलतियों से बचने की सलाह दी है। इससे उन्हें किसी तरह की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा।

1. आईटीआर फॉर्म में गलत पर्सनल इंफॉर्मेशन

आईटीआर (ITR) फाइल करने में सबसे ज्यादा गलती व्यक्तिगत जानकारियां देने में होती है। अब तक आईटीआर फॉर्म (ITR Form) में कई जानकारियां पहले से भरी हुई होती हैं। लेकिन, एसेसमेंट ईयर (Assessment Year) का चुनाव टैक्सपेयर को करना पड़ता है। गलत एसेसमेंट ईयर के चुनाव से दिक्कत हो सकती है। इसके अलावा आपको प्री-फिल्ड इंफॉर्मेशन को ठीक से चेक कर लेना जरूरी है। अगर कई इंफॉर्मेशन गलत रह जाती है तो इससे आपका रिटर्न रिजेक्ट हो सकता है।

2. गलत आईटीआर फॉर्म का चुनाव


अगर टैक्सपेयर्स अपने लिए सही आईटीआर फॉर्म का चुनाव नहीं करता है तो उसका रिटर्न डिफेक्टिव हो जाएगा। दरअसल, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के अलग-अलग तरह के अलग-अलग आईटीआर फॉर्म होते हैं। टैक्सपेयर को अपने लिए सही आईटीआर फॉर्म का चुनाव करना जरूरी है। अगर टैक्सपेयर को इसमें दिक्कत आ रही है तो वह एक्सपर्ट की मदद ले सकता है। टैक्सपेयर्स को रिटर्न फाइल करते वक्त यह आश्वस्त होना जरूरी है कि वह रिटर्न भरने के लिए सही फॉर्म का इस्तेमाल कर रहा है।

3. इनकम के सभी स्रोतों की जानकारी नहीं देना

कई टैक्सपेयर्स अपनी इनकम के मुख्य स्रोत की जानकारी देते हैं। लेकिन, वे सेविंग्स अकाउंट में जमा पैसे पर इंटरेस्ट, रेंटल इनकम जैसी जानकारियां देना भूल जाते हैं। टैक्सपेयर्स के लिए अपनी छोटी-बड़ी हर इनकम के बारे में रिटर्न में बताना जरूरी है।

4. रिटर्न को वेरिफाइ नहीं करना

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के बाद उसे वेरिफाय करना अनिवार्य है। ऐसा नहीं करने पर आपके रिटर्न पर इनकम टैक्स अथॉरिटीज विचार नहीं करेगा। आपकी पूरी मेहनत बेकार हो जाएगी। इसलिए रिटर्न फाइल करने के साथ ही उसे वेरिफाय करना अच्छा रहेगा। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो आप वेरिफाइ करना भूल सकते हैं।

5. फॉर्म 26एएस के डेटा की अनदेखी

फॉर्म 26एएस में टैक्सपेयर्स के टीडीएस और टीसीएस की इंफॉर्मेशन होती है। इन्हें अपने खुद के रिकॉर्ड से मैच करा लेना जरूरी है। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो आपके टैक्स कैलकुलेशन में गड़बड़ी हो सकती है। अगर आप सैलरीड टैक्सपेयर हैं तो फॉर्म-16 के डेटा को फॉर्म 26एएस के डेटा से जरूर मैच करा लें।

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6. विदेश में एसेट्स और इनकम के बारे में नहीं बताना

अगर विदेश में आपकी संपत्ति है या इनकम है तो उसे आईटीआर फॉर्म में बताना नहीं भूलें। कई लोग विदेश में नौकरी करते वक्त प्रॉपर्टी या घर खरीद लेते हैं। अगर आपके साथ ऐसा है तो उसके बारे में रिटर्न में बताना जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आप पर भारी पेनाल्टी लगा सकता है या कानूनी कार्रवाई भी कर सकता है।

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