इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख काफी करीब आ गई है। टैक्सपेयर्स को रिटर्न फाइल करने के लिए अंतिम तारीख का इंतजार नहीं करना चाहिए। खासकर अगर टैक्सपेयर इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम और नई रीजीम के बीच स्विच करना चाहता है तो उसे रिटर्न फाइल करने में देरी नहीं करना चाहिए। इनकम टैक्स के नियम के मुताबिक, सैलरीड टैक्सपेयर्स को ओल्ड और न्यू रीजीम के बीच स्विच करने की इजाजत है।
सैलरीड टैक्सपेयर्स के लिए क्या है नियम?
सरकार ने बजट 2023 में इनकम टैक्स की नई रीजीम को डिफॉल्ट रीजीम बना दी थी। साथ ही इसे अट्रैक्टिव बनाने के लिए कई ऐलान किए थे। इसका असर दिखा है। सैलरीड टैक्सपेयर्स को वित्त वर्ष की शुरुआत में ही अपने एंप्लॉयर (कंपनी) के फाइनेंस डिपार्टमेंट को यह बताना जरूरी होता है कि वह इनकम टैक्स की नई रीजीम और पुरानी रीजीम में से किसका इस्तेमाल करना चाहता है। इसके बाद एंप्लॉयर का फाइनेंस डिपार्टमेंट एंप्लॉयी की सैलरी से टीडीएस (TDS) काटता है।
ज्यादा टीडीएस कटने पर मिलेगा रिफंड
अगर कोई एंप्लॉयी ओल्ड रीजीम के इस्तेमाल के फैसले के बारे में एंप्लॉयर को बताने के बाद नई रीजीम के तहत इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना चाहता है तो वह ऐसा कर सकता है। नई रीजीम में इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के बाद उसकी सैलरी से काटा गया अतिरिक्त TDS उसे रिफंड के रूप में वापस मिल जाएगा। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर टैक्सपेयर्स सेक्शन 80सी, सेक्शन 80डी और होम लोन के इंटरेस्ट पर डिडक्शन का दाव नहीं करता है तो उसके लिए इनकम टैक्स की नई रीजीम फायदेमंद है।
रिटर्न फाइलिंग के वक्त करना होगा रीजीम में बदलाव
आईटीआर-1 में इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के दौरान सेक्शन 115BAC(6) के तहत टैक्सपेयर से यह पूछा जाता है कि क्या वह नई टैक्स रीजीम का इस्तेमाल करना चाहता है? अगर टैक्सपेयर ओल्ड रीजीम का इस्तेमाल करना चाहता है तो इसका जवाब नहीं होगा। इसका जवाब यस में देने यानी हां करते ही आपकी रीजीम बदलकर नई हो जाएगी। इसके बाद टैक्सपेयर्स के टैक्स का कैलकुलेशन नई रीजीम के हिसाब से होगा। अगर टैक्सपेयर्स हर तरह के डिडक्शन का क्लेम नहीं करता है तो नई रीजीम में उसका टैक्स घट जाएगा। फिर, रिफंड का पैसा उसके बैंक अकाउंट में आ जाएगा।
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सरकार ने 23 जुलाई को पेश बजट में इनकम टैक्स की नई रीजीम का अट्रैक्शन बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं। स्टैंडर्ड डिडक्शन को 50,000 रुपये से बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया है। साथ ही नई रीजीम में टैक्स स्लैब में भी बदलाव किया गया है। लेकिन, ये बदलाव एसेसेटमेंट ईयर 2025-26 यानी अगले साल से लागू होंगे।