जियो ब्लैकरॉक एसेट मैनेजमेंट अगले दो महीने के अंदर गिफ्ट सिटी प्लेटफॉर्म से दो आउटबाउंड फंड्स लॉन्च करेगी। पहला फंड ग्लोबल इक्विटी फंड होगा, जबकि दूसरे का फोकस उभरते बाजारों पर होगा। कंपनी को रेगुलेटर से विदेश की कंपनियों में निवेश करने वाले फंड लॉन्च करने की इजाजत पहले ही मिल चुकी है।
ब्लैकरॉक की ग्लोबल सुइट से चुने गए हैं फंड्स
Jio BlackRock Asset Management के सीआईओ ऋषि कोहली ने मनीकंट्रोल को इस बारे में म्यूचुअल फंड समिट के दौरान विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि कंपनी ने ब्लैकरॉक के ग्लोबस सुइट से करीब 10 प्रोडक्ट्स को सेलेक्ट किया है। इन्हें फैमिली ऑफिसेज, वेल्थ एडवाइजर्स और डिस्ट्रिब्यूटर्स की फीडबैक के आधार पर चुना गया है। सबसे पहले इनमें से दो आउटबाउंड फंड लॉन्च किए जाएंगे।
विदेशी शेयरों में निवेश करने वाले फंड्स में बढ़ रही दिलचस्पी
उन्होंने कहा, "हमें गिफ्ट सिटी का लाइसेंस मिल चुका है। अब हम इस प्लेटफॉर्म से पहले दो फंड लॉन्च करने की तैयारी कर रहे हैं। इनमें से एक ग्लोबल इक्विटी फंड होगा। दूसरा इमर्जिंग मार्केट फंड होगा।" उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से इंडियन इनवेस्टर्स में विदेशी शेयरों में निवेश वाले फंड्स में दिलचस्पी बढ़ी है।
पिछले कुछ सालों से घरेलू बाजार सीमित दायरे में है
कोहली ने कहा कि आउटबाउंड फंड्स लॉन्च करने के बाद के छह महीने कंपनी के लिए काफी महत्वपूर्ण होंगे। कंपनी के ये फंड्स ऐसे वक्त लॉन्च होने जा रहे हैं, जब भारतीय शेयर बाजार पिछले काफी समय से एक सीमित दायरे में बना हुआ है, जबकि कई दूसरे देशों के बाजारों में जबर्दस्त तेजी है। हालांकि, घरेलू निवेश अब भी स्ट्रॉन्ग है। सिप से अब भी काफी निवेश आ रहा है। लंबी अवधि के लिहाज से इसके लिए अच्छी संभावनाएं बनी हुई हैं।
अगले 3-4 सालों में 20 फंड्स लॉन्च करने का प्लान
इनबाउंड फंड्स के बारे में कोहली ने कहा कि छह महीने बाद आप कंपनी की इनबाउंड एक्टिविटी भी देख सकेंगे। कंपनी IFSCA रेगुलेशंस के तहत आउटबाउंड फंड्स लॉन्च करने जा रही है। उन्होंने कहा कि अगले तीन से चार सालों में इनवेस्टर्स के रिस्पॉन्स के आधार पर कंपनी 20 फंड्स लॉन्च कर सकती है।
विदेश में निवेश करने वाले फंड्स डायवर्सिफिकेशन में हेल्पफुल
विदेश में निवेश करने वाले फंड्स डायवर्सिफिकेशन का मौका देते हैं। कई इनवेस्टर्स अपने पोर्टफोलियो में विदेश में निवेश करने वाले फंड भी शामिल करते हैं। इससे उनके पोर्टफोलियो का रिटर्न बेहतर रहता है। पिछले कुछ सालों में भारतीय बाजार का रिटर्न काफी कमजोर रहा है, जबकि अमेरिकी और कुछ एशियाई बाजारों में अच्छी तेजी देखने को मिली है।