जेपी मॉर्गन ने सोने की कीमतों के लिए अपना लॉन्ग-टर्म अनुमान बढ़ाकर 4,500 डॉलर प्रति औंस कर दिया है। वहीं 2026 के आखिर के लिए अपना अनुमान 6,300 डॉलर प्रति औंस पर बरकरार रखा है। इस साल स्पॉट गोल्ड में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह मंगलवार को तीन हफ्ते के सबसे ऊंचे लेवल 5,248.89 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। यह 29 जनवरी को 5,594.82 डॉलर के रिकॉर्ड पीक पर पहुंच गया था।
2025 में सोने में 64 प्रतिशत से ज्यादा तेजी दर्ज की गई। सोने को बड़े पैमाने पर सेफ-एसेट माना जाता है। जियोपॉलिटिकल रिस्क, U.S. फेडरल रिजर्व का इंटरेस्ट रेट कम करने का साइकिल, सेंट्रल बैंकों की खरीदारी और बुलियन-बैक्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स में फ्लो जैसे फैक्टर्स ने पिछले साल सोने में बढ़ोतरी में योगदान दिया।
स्ट्रक्चरल डायवर्सिफिकेशन का ट्रेंड जारी
रॉयटर्स के मुताबिक, जेपी मॉर्गन ने कहा है कि वह 2026 तक सोने की कीमतों को लेकर काफी बुलिश है। सोने में अभी भी स्ट्रक्चरल डायवर्सिफिकेशन का ट्रेंड जारी है, जिसके बारे में बैंक का कहना है कि इसमें और बढ़ोतरी की गुंजाइश है। जेपी मॉर्गन ने यह भी कहा गया है कि इस साल सेंट्रल बैंकों और इनवेस्टर्स से गोल्ड की इतनी डिमांड आने का अनुमान है कि 2026 के आखिर तक सोने की कीमतें 6,300 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच जाएंगी।
बैंक ऑफ अमेरिका का अनुमान
इस बीच बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) के एक नोट में कहा है कि उसे अगले 12 महीनों में सोने के 6,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने का रास्ता दिख रहा है। बैंक ने आगे कहा कि उसे चिंता है कि चांदी की कीमतें जल्द ही और नीचे आ सकती हैं, लेकिन इस साल फिर से 100 डॉलर प्रति औंस से ऊपर जा सकती हैं। बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट सिल्वर 90.70 डॉलर प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रही थी। जनवरी 2026 के आखिर में कीमत रिकॉर्ड 121.64 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई थी।