पिछले कुछ सालों में फूड बिजनेस ने कई लोगों के लिए नए मौके खोले हैं। इन्हीं में से एक हैं, केरल के कपल डैनी बेबी और पार्वती जयकुमार। दोनों पहले नर्स की नौकरी करते थे, लेकिन कम सैलरी से परेशान होकर उन्होंने नौकरी छोड़ दी। अब वे चाय, कॉफी, हॉट बज्जी और फ्राइज बेचते हैं। सिर्फ एक महीने पहले ही उन्होंने अलप्पुझा के चेरथला के एक्स-रे जंक्शन पर एक छोटा सा फूड कार्ट शुरू किया है।
नर्सिंग और पैरामेडिकल की डिप्लोमा डिग्री होने के बावजूद दोनों सिर्फ 5,000 रुपए महीने कमाते थे और खुश नहीं थे। उन्होंने कई तरह की नौकरियां आजमाईं, लेकिन कहीं संतोष नहीं मिला। आखिर में उन्होंने अपना खुद का फूड बिजनेस शुरू करने का फैसला किया।
कैसे एक फूड कार्ट ने बदल दी इस केरल कपल की जिंदगी
On Manorama से बातचीत में पार्वती ने बताया, “हमें कार्ट लगाए हुए सिर्फ एक महीना हुआ है। हमारा घर यहां से सिर्फ दो किलोमीटर दूर है। हम शाम 3 बजे कार्ट खोलते हैं और रात 9 बजे तक खुले रहते हैं। पास के दुकानदार, मजदूर यूनियन के लोग और ग्राहक ही हमारे सबसे बड़े सहारा बने हैं। कार्ट लगाने में भी उन्होंने ही हमारी मदद की। पास में एक बेवरेज आउटलेट है, लेकिन हमें यहां कभी कोई दिक्कत नहीं हुई।”
डैनी बेबी ने बताया, “हैदराबाद में सैलरी पर्याप्त नहीं थी। यहां लौटने पर प्राइवेट अस्पताल सिर्फ 5,000 रुपए महीने देने को तैयार थे, जबकि दिहाड़ी मजदूरी से एक दिन में 1,000 रुपए तक मिल सकते थे। इसी वजह से हमने अस्पताल की नौकरी छोड़ दी।”
खाना बनाने के शुरुआती दिनों की चुनौतियां
नर्सिंग की नौकरी छोड़ने के बाद डैनी बेबी और पार्वती जयकुमार अब अपने फूड कार्ट से रोज़ाना 2,000 से 3,000 रुपए तक कमा लेते हैं। पार्वती कहती हैं कि स्थानीय लोगों ने उनका खूब साथ दिया और कार्ट को शुरू करने और चलाने में मदद की।
इस कपल ने अपने एक दोस्त से 50,000 रुपए में फूड कार्ट खरीदा था। शुरू में खाना बनाना उनके लिए मुश्किल था, लेकिन स्थानीय लोगों ने उन्हें टिप्स, रेसिपी और तरीके बताए। धीरे-धीरे उन्होंने सीखा, सुधार किया और अपने नए काम में आत्मविश्वास भी बढ़ा लिया।
डैनी बेबी बताते हैं कि उनका मेन्यू लोगों को बहुत पसंद आ रहा है। वे कहते हैं, “हम डोसा जैसे आइटम भी जोड़ना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए और मददगार चाहिए। अभी कार्ट शुरू हुए सिर्फ एक महीना हुआ है, इसलिए थोड़ा इंतजार करेंगे। यहां हाईवे का काम भी चल रहा है, हमें पता नहीं कि जगह बदलनी पड़ेगी या नहीं। बस तेज बारिश ही काम को धीमा करती है। अब जब मानसून खत्म हो रहा है, तो ग्राहक भी ज्यादा आ रहे हैं।”
एक लव स्टोरी: जो नर्सिंग स्कूल से शुरू हुई
डैनी बेबी और पार्वती जयकुमार की पहली मुलाकात कोट्टायम के कुरुप्पमथरा में सेंट जेवियर्स स्कूल में डिप्लोमा की पढ़ाई के दौरान हुई। पढ़ाई पूरी करने के कुछ समय बाद ही दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया।
डैनी ने हैदराबाद के एक प्राइवेट अस्पताल में नौकरी शुरू की, वहीं पार्वती ने मलप्पुरम में अपनी ट्रेनिंग पूरी की और फिर तेलंगाना जाकर डैनी के साथ जुड़ गईं। शुरुआत में परिवार वालों ने इस रिश्ते को स्वीकार नहीं किया था, लेकिन समय के साथ उन्होंने धीरे-धीरे इस शादी को मंजूरी दे दी।