Labour Law: देश में चार लेबर कानूनों के एक्टिव होने के बाद कर्मचारियों के छुट्टियों को लेकर नियम बदल सकते हैं। किसी भी कर्मचारी को कैलेंडर ईयर में 30 दिन से अधिक पेड लीव (Paid Leave) नहीं मिलेगी। अगर किसी कर्मचारी की छुट्टी 30 दिन से अधिक होती है तो कंपनी या नियोक्ता की एक्स्ट्रा छुट्टी के लिए पेमेंट करना होगा। हालांकि, ये कानून देश में अभी लागू नहीं हुए हैं।
लेबर कानून में होगा बदलाव
भारत में 29 सेंट्रल लेबर कानून को 4 कोड में बांटा गया है। कोड के नियमों में वेतन, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध (Industrial Relations) और व्यवसाय सुरक्षा (Occupation Safety) और स्वास्थ्य और काम करने की स्थिति आदि जैसे 4 लेबर कोड शामिल है। संसद द्वारा इन चार संहिताओं को पारित किया जा चुका है, लेकिन केंद्र के अलावा राज्य सरकारों को भी इन संहिताओं, नियमों को अधिसूचित करना जरूरी है। उसके बाद ही ये नियम राज्यों में लागू हो पाएंगे। यहां कर्मचारी का मलतब है मैनेजिरियल और सुपरवाइजरी रोल।
भारत में कर्मचारी लंबे समय से लेबर कोड के नियमों को लागू करने की मांग कर रहे हैं। इससे कर्मचारियों को हफ्ते में 2 दिन की जगह 3 दिन छुट्टी मिलेगी। हालांकि, काम के घंटे बढ़ जाएंगे लेकिन तीन दिन छुट्टी का आराम मिलेगा। ज्यादातर अगले साल होने वाले आम चुनावों के कारण लेबर कोड के नियम लागू होने की संभावना कम है। आम चुनावों से पहले इसके लागू होने की उम्मीद कम है। लेबर कोड के नियम कर्मचारियों के हितों को बेहतर बनाने के लिए बनाए गए हैं।
ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता, 2020 (OSH Code) की धारा 32 में वार्षिक छुट्टी लेने, आगे ले जाने और कैश के संबंध में कई शर्तें हैं। धारा 32(vii) के मुताबिक एक कर्मचारी को अधिकतम 30 दिनों तक की सालाना छुट्टी को अगले कैलेंडर ईयर में आगे बढ़ाने की अनुमति देता है। यदि कैलेंडर ईयर के अंत में सालाना लीव बैलेंस 30 से अधिक हो जाता है, तो कर्मचारी अतिरिक्त छुट्टी को अगल साल में ले जाने का हकदार होगा।