फाइनेंशियल ईयर 2019-20 का अपडेटेड इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की अंतिम तारीख 31 मार्च 2023 है। इसलिए अगर आपने किसी वजह से फाइनेंशियल ईयर 2019-20 का इनकम टैक्स रिटर्न फाइल नहीं किया है या फाइल तो किया है, लेकिन उसमें किसी इनकम के बारे में बताना भूल गए हैं तो आप अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) फाइल कर सकते हैं। फाइनेंस एक्ट 2022 में अपटेडेड रिटर्न का कॉन्सेप्ट शुरू किया गया था।
कब तक फाइल किया जा सकता है अपडेटेड ITR?
संबंधित एसेसमेंट ईयर के खत्म होने के 24 महीने के अंदर अपडेटेड रिटर्न फाइल की जा सकती है। इसके लिए कुछ शर्तें तय हैं। इसलिए अगर आप किसी वजह से FY 2019-22 का ITR फाइल नहीं कर सकें हैं तो आप 31 मार्च तक कर सकते हैं। अगर आप अपडेटेड रिटर्न फाइल करना चाहते हैं तो पेनाल्टी और फीस नहीं लगेगी। लेकिन, इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 140बी के मुताबिक आपको अतिरिक्त टैक्स चुकाना होगा।
कितना लगता है अतिरिक्त टैक्स?
अगर संबंधित एसेसमेंट ईयर खत्म होने के 12 महीने के अंदर अपडेटेड ITR फाइल किया जाता है तो बकाया टैक्स पर टैक्सपेयर को अतिरिक्त 25 फीसदी टैक्स चुकाना होगा। अगर संबंधित एसेसमेंट ईयर खत्म होने के 24 महीने के अंदर अपडेटेड रिटर्न फाइल किया जाता है तो बकाया टैक्स पर अतिरिक्त 50 फीसदी टैक्स चुकाना होगा। इसका मतलब है कि फाइनेंशियल ईयर 2019-20 का अपडेटेड रिटर्न फाइल करने पर आपको अतिरिक्त 50 फीसदी टैक्स चुकाना होगा। फाइनेंशियल ईयर 2019-20 का एसेसमेंट ईयर 2020-21 होगा।
ITR File नहीं करने पर क्या होगा?
अपडेटेड रिटर्न फाइल करने के लिए टैक्सपेयर को उस ITR Forms का इस्तेमाल करना होगा, जिसे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने संबंधित एसेसमेंट ईयर के लिए नोटिफाय किया है। अगर टैक्सपेयर्स रिटर्न फाइल नहीं करता है तो वह करेंट फाइनेंस ईयर के लॉसेज को कैरी फॉरवर्ड नहीं कर सकेगा। इसके अलावा उस पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से पेनाल्टी भी लगाई जा सकती है। यह एसेस्ड टैक्स का कम से कम 50 फीसदी होगी। यह एसेस्ड टैक्स का अधिकतम 200 फीसदी हो सकती है।
किसके लिए ITR File करना जरूरी है?
टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति की रेगुलर इनकम है और उसकी इनकम टैक्सेबल रेंज में आती है तो उसके लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना जरूरी है। अभी सालाना 2.5 लाख रुपये तक की इनकम को टैक्स से छूट हासिल है। इससे ज्यादा इनकम होने पर व्यक्ति को टैक्स देना पड़ता है।