लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों ने नॉन-पार्टिसिपेटिंग प्रोडक्ट्स पर बढ़ाया फोकस, जानिए इसकी वजह

एसबीआई लाइफ और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस जैसी कंपनियों के नॉन-पार बिजनेस में इजाफा देखने को मिला है। FY26 की पहली छमाही में एसबीआई लाइफ के टोटल बिजनेस में नॉन-पार सेविंग्स प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी 41 फीसदी हो गई

अपडेटेड Nov 04, 2025 पर 9:57 PM
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आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ ने भी अपने नॉन-लिंक्ड सेविंग्स सेगमेंट पर फोकस बढ़ाया है।

लाइफ इंश्योरेंस कंपनियां अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में बदलाव कर रही हैं। इस फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही में इन कंपनियों ने पोर्टफोलियो में नॉन-पार्टिसिपेटिंग (नॉन-पार) सेविंग्स प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी बढ़ाई है। नॉन-पार्टिसिपेटिंग सेविंग प्रोडक्ट्स में लंबी अवधि में रिटर्न की गारंटी होती है। इसमें निवेश करने वाले व्यक्ति को प्रोडक्ट के बेनेफिट के बारे में पहले से पता होता है। लाइफ इंश्योरेंस कंपनी अपने मुनाफे को इस प्रोडक्ट्स के पॉलिसीहोल्डर के साथ शेयर नहीं करती है।

 प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में बढ़ रही नॉन-पार प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी

SBI Life और ICICI Prudential Life Insurance  जैसी कंपनियों के नॉन-पार बिजनेस में इजाफा देखने को मिला है। FY26 की पहली छमाही में एसबीआई लाइफ के टोटल बिजनेस में नॉन-पार सेविंग्स प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी 41 फीसदी हो गई। एक साल पहले यह 32 फीसदी थी। सितंबर तिमाही के नतीजे पेश करने के दौरान एनालिस्ट्स से बातचीत में एसबीआई लाइफ ने कहा कि गारंटीड-रिटर्न प्रोडक्ट्स की मांग काफी ज्यादा है।


घटते इंटरेस्ट रेट वाले माहौल में इन प्रोडक्ट्स का बढ़ा आकर्षण 

एसबीआई लाइफ का मानना है कि इंटरेस्ट रेट में कमी के माहौल में नॉन-पार्टिसिपेटिंग सेविंग्स प्रोडक्ट्स फायदेमंद लग रहे हैं। कंपनी के सीईओ अमित झिंगरन ने कहा, "यील्ड कर्व में बदलाव को देखते हुए हमने अपने कुछ नॉन-पार ऑफरिंग्स के प्राइसिंग में बदलाव किए हैं। हम मार्जिन में अनुशासन बनाए रखते हुए ग्राहकों को बेनेफिट्स ऑफर करना चाहते हैं।" इस बीच, एसबीआई लाइफ के यूलिप की डिमांड में कमी आई है। टोटल बिजनेस में इस प्रोडक्ट की हिस्सेदारी एक साल पहले के 61 फीसदी से घटकर 55 फीसदी पर आ गई है।

आईसीआईसीआई प्रू लाइफ ने भी बढ़ाया फोकस

आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ ने भी अपने नॉन-लिंक्ड सेविंग्स सेगमेंट पर फोकस बढ़ाया है। इसमें पार्टिसिपेटिंग और नॉन-पार्टिसिपेटिंग दोनों प्रोडक्ट्स शामिल हैं। टोटल बिजनेस में इन प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में बढ़कर 21.8 फीसदी हो गई। एक साल पहले यह 19.6 फीसदी थी। हालांकि, एचडीएफसी लाइफ के मामले में स्थिति अलग है। उसके टोटल बिजनेस में नॉन-पार्टिसिपेटिंग प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी इस वित्त वर्ष की पहली छमाही में घटकर 18 फीसदी पर आ गई। एक साल पहले यह 32 फीसदी थी।

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एचडीएफसी लाइफ को दूसरी छमाही में नॉन-पार की डिमांड बढ़ने की उम्मीद

एचडीएफसी लाइफ की एमडी और सीईओ विभा पडालकर ने कहा कि हमें दूसरी छमाही में नॉन-पार प्रोडक्ट्स की डिमांड बढ़ने की उम्मीद है। हम ग्राहकों के लिए इनोवेशन जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि एचडीएफसी लाइफ के प्रोडक्ट मिक्स में पिछले साल नॉन-पार प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी 30 फीसदी थी। हमारी स्थिति प्रतिद्वंद्वी कंपनियों से अलग है, जो लो बेस पर नॉन-पार प्रोडक्ट्स बढ़ा रहे हैं।

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