अगले साल से 20-40% बढ़ सकता है आपका लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम, बीमा कंपनियों ने IRDAI से मांगी मंजूरी

रिइंश्योरेंस कंपनियां के शुल्क बढ़ाने से लाइफ इंश्योरेंस की प्रीमिमय राशि बढ़ सकती है

अपडेटेड Nov 19, 2021 पर 10:27 AM
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Life insurance premiums

आपके लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम (Life Insurance Premiums) की राशि अगले साल यानी 2022 से बढ़ सकती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक रिइंश्योरेंस कंपनियां अगले साल से अपने शुल्क बढ़ाने वाली है, जिसका बोझ जीवन बीमा कंपनियों अपने ग्राहकों पर डाल सकती है।

बता दें कि रिइंश्योरेंस एक तरह से जीवन बीमा कंपनियों को इंश्योरेंस होता है। जीवन बीमा कंपनियां अपने कई तरह के जोखिम को कवर करने के लिए रिइंश्योरेंस कंपनियों को शुल्क चुकाती हैं। प्रीमियम की राशि बढ़ने से इंश्योरेंस कंपनियों का मुनाफा भी बढ़ सकता है। हालांकि इससे पॉलिसी को लेकर डिमांड कम हो सकती है। खासकर ऐसे समय में जब बीमा प्रोडक्ट्स को लेकर जागरुकता बढ़ती हुई दिख रही थी।

ऐसी उम्मीद है कि प्रीमिमय की राशि 20 से 40 पर्सेंट के बीच बढ़ सकती है। इसके पीछे वजह यह बताई जा रही है कि रिइंश्योरेंस कंपनियों को पिछले कुछ समय से अधिक संख्या में इंश्योरेंस क्लेम मिल रहे हैं, जिससे उनका घाटा बढ़ा है। ऐसे में अब वे इस घाटे को कवर करने के लिए अपना शुल्क बढ़ाने जा रहे हैं।


कई कंपनियां पहले ही भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) से शुल्क बढ़ाने की अनुमति मांग चुकी है। वहीं कुछ कंपनियां बढ़ोतरी को कम से कम रखने के लिए ग्लोबल रिइंश्योरेंस कंपनियों के साथ बातचीत कर रही हैं। प्रीमियम में बढ़ोतरी से ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों दोनों माध्यमों से पॉलिसी की बिक्री पर असर पड़ सकता है।

एक जानकार ने बताया, "कीमतों को पिछले 6 महीने से बढ़ाने की बात चल रही थी और अब इसे टाला नहीं जा सकता है। कोरोना के चलते पिछले कुछ समय से इंश्योरेंस क्लेम बढ़े हैं, जिससे रिइंश्योरेंस कंपनियों को घाटा हुआ है और अब वे अपने शु्ल्क बढ़ा रही है।" एक लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के सीईओ ने इस बात की पुष्ट किया कि उन्होंने प्रीमिमय की राशि बढ़ाने के लिए IRDAI के पास आवेदन दिया है और जल्द ही इन्हें इंश्योरेंस प्रोडक्ट पर लागू कर दिया जाएगा।

इस बीच इंश्योरेंस कंपनियों को यह चिंता भी सता रही है कि कहीं प्रीमिमय बढ़ने से इंश्योरेंस प्रोडक्ट की बिक्री कम न हो जाए। छोटी इंश्योरेंस कंपनियों के पास मोलभाव की इतनी शक्ति नहीं है कि वह रिइंश्योरेंस कंपनियों से बातचीत कर उन्हें मना सके। हालांकि बड़ी इंश्योरेंस कंपनियां जरूर रिइंश्योरेंस कंपनियों से बातचीत कर बढ़ोतरी को कम से कम करवाने की कोशिश में लगी है।

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