LTCG Tax Alert: स्टॉक्स, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी या गोल्ड... कहां बचेंगे आपके पैसे? बजट 2027 से पहले जानें ये काम की बातें

LTCG Capital Gains Tax: स्टॉक्स, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी या गोल्ड बेचने की सोच रहे हैं? तो ठहरिए, 12.5% की एकसमान LTCG टैक्स दर के बावजूद अलग-अलग एसेट्स पर होल्डिंग पीरियड, इंडेक्सेशन और STT के नियम आपके मुनाफे की गणित पूरी तरह बदल सकते हैं। वित्त मंत्री के हालिया बयान के बाद बजट 2027 से पहले कैपिटल गेन्स टैक्स में बड़ी राहत की उम्मीद जगी है। जानिए किस एसेट पर कितना कटेगा टैक्स और क्यों बिक्री से पहले पोस्ट-टैक्स रिटर्न का हिसाब लगाना आपके लिए बेहद जरूरी है

अपडेटेड Oct 15, 2026 पर 1:48 PM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
बजट 2027 से पहले कैपिटल गेन्स टैक्स स्ट्रक्चर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है

LTCG Tax Rules: LTCG यानी लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स को लेकर इस वक्त खूब चर्चा है। यह इस बात को सीधे तौर पर प्रभावित करता है कि स्टॉक्स, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी या सोना बेचने पर निवेशकों के हाथ में आखिर कितना पैसा बचेगा। वैसे कई एसेट क्लासेज से होने वाले लॉन्ग-टर्म मुनाफे पर टैक्स की दर 12.5% है, लेकिन होल्डिंग अवधि, छूट की सीमा और इंडेक्सेशन का फायदा मिलने के नियम अलग-अलग हैं। ऐसे में पोस्ट-टैक्स रिटर्न की तुलना करते समय निवेशकों को इन अंतरों को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) पर हितधारकों के विचार सुनने की इच्छा जताए जाने के बाद, बजट 2027 से पहले कैपिटल गेन्स टैक्स स्ट्रक्चर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। आइए आपको बताते हैं इस टैक्स का पूरा गणित।

स्टॉक्स और इक्विटी म्यूचुअल फंड पर LTCG टैक्स


लिस्टेड इक्विटी शेयर और इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड में अगर 12 महीने से अधिक समय के लिए निवेश रखा जाता है, तो उन्हें लॉन्ग-टर्म निवेश माना जाता है। एक वित्तीय वर्ष में ₹1.25 लाख से अधिक के कुल मुनाफे पर 12.5 फीसदी की दर से LTCG टैक्स, सरचार्ज और सेस को छोड़कर लगता है। अनलिस्टेड इक्विटी शेयरों के लिए योग्य होल्डिंग अवधि 24 महीने से अधिक है। इनके लॉन्ग-टर्म गेन्स पर बिना इंडेक्सेशन के 12.5 फीसदी टैक्स लगता है।

प्राइस वॉटरहाउस एंड कंपनी एलएलपी के पार्टनर कुणाल शाह के अनुसार, 'लिस्टेड और अनलिस्टेड इक्विटी तथा इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में LTCG टैक्स की दर को 12.5 फीसदी पर एकसमान कर दिया गया है। वैसे लिस्टेड शेयरों में निवेश करने वालों को STT भी देना पड़ता है, जो उनके टैक्स के बोझ को बढ़ा देता है। जब LTCG टैक्स से छूट मिली हुई थी, तब STT पेश किया गया था। अब दोनों लागू होने से निवेशकों पर दोहरा बोझ पड़ता है।'

रियल एस्टेट प्रॉपर्टी और गोल्ड पर टैक्स के नियम

प्रॉपर्टी और गोल्ड के मामले में LTCG टैक्स के दायरे में आने के लिए न्यूनतम 24 महीने की होल्डिंग अवधि अनिवार्य है। सामान्य तौर पर, इन पर बिना इंडेक्सेशन लाभ के 12.5 फीसदी की दर से टैक्स लगाया जाता है।

वैसे निवासी व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) के लिए एक विशेष राहत दी गई है। अगर किसी ने 23 जुलाई 2024 से पहले संपत्ति खरीदी थी, तो वे इंडेक्सेशन के बिना 12.5% दर और इंडेक्सेशन के साथ पुरानी 20% दर के बीच देय टैक्स की तुलना कर सकते हैं और जो भी रकम कम हो, उसका चयन कर सकते हैं।

क्लीयरटैक्स के संस्थापक और सीईओ अर्चित गुप्ता का कहना है कि, 'विभिन्न एसेट क्लासेज में होल्डिंग पीरियड और टैक्स के नियम अलग-अलग हैं। इसलिए निवेशकों के लिए संपत्ति बेचने से पहले लागू होने वाले नियमों को अच्छी तरह समझना बहुत आवश्यक है।'

निवेश से पहले पोस्ट-टैक्स रिटर्न की करें तुलना

किसी निवेश का मुख्य या ऊपरी रिटर्न हमेशा वास्तविक लाभ को नहीं दर्शाता। मुनाफे पर लगने वाला टैक्स उस रकम को बदल सकता है जो अंततः निवेशक के पास बचती है। 1 अप्रैल 2023 को या उसके बाद खरीदे गए डेट म्यूचुअल फंड पर होल्डिंग अवधि की परवाह किए बिना निवेशक के लागू इनकम टैक्स स्लैब रेट के अनुसार टैक्स लगाया जाता है। इसके कारण इनका पोस्ट-टैक्स रिटर्न इक्विटी निवेश से काफी अलग हो सकता है।

कुणाल शाह और अर्चित गुप्ता दोनों का मानना है कि दो अलग-अलग एसेट्स जो प्री-टैक्स स्तर पर एक समान रिटर्न देते हैं, वे टैक्स कटने के बाद हाथ में अलग-अलग रकम दे सकते हैं। इसलिए निवेशकों को हमेशा पोस्ट-टैक्स रिटर्न के आधार पर ही कोई फैसला लेना चाहिए।

क्या बजट 2027 में मिलेगी राहत?

इक्विटी में मिडिल क्लास परिवारों, युवा पेशेवरों और सेवानिवृत्त लोगों की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए टैक्स ढांचे को तर्कसंगत बनाने की मांग जोर पकड़ रही है।बाजार विशेषज्ञ और निवेशक मांग कर रहे हैं कि लिस्टेड शेयरों पर STT और LTCG के दोहरे प्रभाव को कम किया जाए। इसके अलावा, अनिवासी भारतीयों (NRIs) के लिए रुपये में होने वाले मुनाफे पर टैक्स के नियमों की समीक्षा की भी जरूरत बताई जा रही है।

आगामी बजट 2027 में LTCG टैक्स रेट में कटौती, छूट की सीमा में बढ़ोतरी या विभिन्न एसेट क्लासेज के लिए होल्डिंग पीरियड में बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है।

फिलहाल सरकार की ओर से किसी बदलाव की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए निवेशकों को बजट में राहत की उम्मीद लगाने के बजाय मौजूदा नियमों के तहत ही अपने पोर्टफोलियो का आकलन करना चाहिए।

हिंदी में शेयर बाजार,  स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।