मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा वेतन घोटाला! 50,000 फर्जी कर्मचारी और ₹230 करोड़ का खेल

मध्यप्रदेश में लगभग 50,000 सरकारी कर्मचारियों को पिछले छह महीने से सैलरी नहीं मिला है। ये 230 करोड़ रुपये के सैलरी घोटाले की तरफ इशारा कर रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार यह राज्य का सबसे बड़ा वेतन घोटाला हो सकता है

अपडेटेड Jun 06, 2025 पर 3:28 PM
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मध्यप्रदेश में लगभग 50,000 सरकारी कर्मचारियों को पिछले छह महीने से सैलरी नहीं मिली है।

मध्यप्रदेश में लगभग 50,000 सरकारी कर्मचारियों को पिछले छह महीने से सैलरी नहीं मिला है। ये 230 करोड़ रुपये के सैलरी घोटाले की तरफ इशारा कर रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार यह राज्य का सबसे बड़ा वेतन घोटाला हो सकता है, खास बात यह है कि अब तक इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है।

सिर्फ कागजों में हैं कर्मचारी?

रिपोर्ट के अनुसार, जिन कर्मचारियों को सैलरी नहीं मिली है, वे केवल सरकारी डॉक्यूमेंट्स में मौजूद हैं। असल में ये लोग कहीं काम नहीं कर रहे हैं। ये कर्मचारी हैं ही नहीं, सिर्फ पेपर पर 50,000 कर्मचारी हैं जिन्हें सैलरी मिल रही है। ये घोस्ट एम्प्लॉइज यानि फर्जी कर्मचारी हो सकते हैं।


कैसे सामने आया पूरा मामला?

यह मामला तब उजागर हुआ जब 23 मई को कोष एवं लेखा आयुक्त (CTA) ने सभी ड्रॉइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर्स (DDOs) को पत्र भेजकर इस गड़बड़ी की जांच करने को कहा। IFMIS प्रणाली के तहत नियमित और अनियमित कर्मचारियों के डेटा की समीक्षा में पता चला है कि दिसंबर 2024 से कई कर्मचारियों का वेतन जारी नहीं किया गया है। हालांकि उनके कर्मचारी कोड सिस्टम में हैं, लेकिन उनका वैरिफिकेशन अधूरा है और न ही उन्हें सिस्टम से हटाया गया है।

अधिकारियों को 15 दिन में देनी है रिपोर्ट

इसके बाद प्रदेश के 6,000 से अधिक DDOs को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन कर्मचारियों की वास्तविकता की जांच करें। इन्हें 15 दिनों के भीतर जवाब देना है और यह पीरियड शुक्रवार को खत्म हो रहा है।

घोटाला या गड़बड़ी?

कोष एवं लेखा आयुक्त भास्कर लक्ष्कर ने NDTV को बताया कि वह नियमित रूप से डेटा को चेक करते हैं और यह गड़बड़ी उसी दौरान सामने आई। मैं साफ करना चाहता हूं कि इन खातों से वेतन निकाला नहीं गया है, बल्कि यह जांच संभावित गड़बड़ी या भ्रष्टाचार की संभावना को रोकने के लिए है।

वित्त मंत्री ने कही ये बात

जब NDTV ने राज्य के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा से पूछा कि 50,000 कर्मचारियों को महीनों से वेतन क्यों नहीं मिला? तो उन्होंने थोड़ा असहज होते हुए कहा कि जो भी प्रक्रिया होती है, नियमों के अनुसार होती है।

क्यों गंभीर है ये मामला?

यह मामला बेहद गंभीर है क्योंकि यह न केवल करोड़ों रुपये के संभावित घोटाले की ओर इशारा करता है, बल्कि सरकारी सिस्टम की सत्यता और पारदर्शिता पर भी सवाल उठाता है। अगर वाकई ये कर्मचारी सिर्फ कागजों में हैं, तो यह राज्य के सोर्सेज का भारी दुरुपयोग होने की तरफ इशारा करता है। अब सबकी नजर इस जांच रिपोर्ट और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी है।

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