Cryptocurrency: मद्रास हाईकोर्ट ने क्रिप्टोकरेंसी को प्रॉपर्टी के रूप में मान्यता दी, इनवेस्टर्स पर इसका क्या पड़ेगा असर?

मद्रास हाईकोर्ट के इस फैसले का मतलब है कि क्रिप्टो एसेट्स को भारत में उसी तरह का प्रोटेक्शन मिलेगा, जैसा दूसरी अचल संपत्ति (Property) को मिलता है। हालांकि, यह मद्रास हाईकोर्ट का अंतरिम ऑर्डर है। लेकिन, इससे क्रिप्टोकरेंसी के निवेशकों को बड़ी राहत मिलेगी

अपडेटेड Nov 10, 2025 पर 9:08 PM
Story continues below Advertisement
इस फैसले से साइबर अटैक, एक्सचेंज के डूबने या किसी तरह की हेराफेरी की स्थिति में इनवेस्टर्स के पास मुआवजा पाने का अधिकार होगा।

मद्रास हाईकोर्ट ने क्रिप्टोकरेंसी पर बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने इसे देश के कानून के तहत प्रॉपर्टी माना है। यह इंडिया में डिजिटल इनवेस्टर्स के लिए बड़ी खबर है। कोर्ट ने एक ऐसे इनवेस्टर के मामले में यह फैसला दिया है, जिसके एक्सआरपी टोकंस को 2024 में साइबर अटैक्स के बाद वीजरएक्स पर फ्रिज कर दिया गया था।

क्रिप्टोकरेंसी के निवेशकों को बड़ी राहत

मद्रास हाईकोर्ट के इस फैसले का मतलब है कि Crypto एसेट्स को भारत में उसी तरह का प्रोटेक्शन मिलेगा, जैसा दूसरी अचल संपत्ति (Property) को मिलता है। हालांकि, यह मद्रास हाईकोर्ट का अंतरिम ऑर्डर है। लेकिन, इससे क्रिप्टोकरेंसी के निवेशकों को बड़ी राहत मिलेगी। इस फैसले से साइबर अटैक, एक्सचेंज के डूबने या किसी तरह की हेराफेरी की स्थिति में इनवेस्टर्स के पास मुआवजा पाने का अधिकार होगा।


क्रिप्टोकरेंसी प्रॉपर्टी की शर्तें पूरी करती है

कानून के जानकारों का कहना है कि मद्रास हाईकोर्ट का यह फैसला भारत में क्रिप्टो के लिहाज से मील का पत्थर है। एसकेवी लॉ ऑफिसेज के पार्टनर आशुतोष के श्रीवास्तव ने कहा, " हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि क्रिप्टोकरेंसी 'प्रॉपर्टी' की शर्तें पूरी करती है। इसे बेनेफिशियल फॉर्म में रखा और फायदा उठाया जा सकता है। इसे ट्रस्ट में रखा जा सकता है।"

क्रिप्टोकरेंसी के निवेशकों को कानूनी संरक्षण मिलेगा

उन्होंने कहा कि भारत में क्रिप्टो करेंसी को लेकर अलग नियम और कानून नहीं होने के बावजूद मद्रास हाईकोर्ट के इस फैसले का मतलब है कि क्रिप्टो में निवेश को अब कानून का संरक्षण हासिल होगा। किसी तरह की हेराफेरी की शिकायत इनवेस्टर कर सकेगा।

तमिलनाडु की निचली अदलतों पर लागू होगा

मद्रास हाईकोर्ट का यह फैसला तमिलनाडु की निचली अदालतों पर लागू होगा। इसका असर दूसरे हाई कोर्ट्स पर भी पड़ेगा। यह 2020 में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले की दिशा में है, जिसमें क्रिप्टो पर आरबीआई के बैंकिंग बैन को हटा दिया गया था। तब सुप्रीम कोर्ट ने इनकम टैक्स एक्ट (Sections 115BBH and 194S) के तहत 'वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDAs)' की मौजूदा परिभाषा को भी लागू करने का फैसला दिया था।

यह भी पढ़ें: Digital Gold Investment: डिजिटल गोल्ड में निवेश करने में क्या है रिस्क, सेबी ने क्यों निवेशकों को सावधान किया है?

क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अब भी स्पष्ट रेगुलेशन नहीं 

एकॉर्ड ज्यूरिस के मैनेजिंग पार्टनर अलय राजवी ने कहा, "यह ऐसी अहम मिसाल है, जिसमें क्रिप्टोकरेंसी को बतौर प्रॉप्रटी मान्यता दी गई है। इस बात की पुष्टि की गई है कि इसे खरीदा जा सकता है, इसका फायदा उठाया जा सकता है और ट्रस्ट में रखा जा सकता है। इससे क्रिप्टो में ओनरशिप, कस्टडी और इनवेस्टर रेमीडीज को कानून का संरक्षण मिल गया है। हालांकि, इस मामले में रेगुलेशन के स्तर पर अभी चीजें स्पष्ट नहीं हैं।"

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।