ITR Filing 2026: इस बार बहुत बदल गए ITR फॉर्म के नियम! रिटर्न भरने से पहले चेक कर लें ये बदलाव, वरना हो सकता है नुकसान

Changes in ITR Forms FY 2025-26: अब विभाग पूरी तरह डिजिटल हो गया है और आपके रिटर्न का मिलान एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट, TDS रिकॉर्ड और ब्रोकरेज रिपोर्ट से करेगा। ऐसे में थोड़ी सी भी मिसमैचिंग होने पर सीधे इनकम टैक्स का नोटिस आ सकता है। जानिए इस बार के ITR फॉर्म्स में क्या-क्या बड़े बदलाव हुए हैं

अपडेटेड Jun 17, 2026 पर 3:27 PM
टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये बदलाव टैक्स विभाग के डेटा-ड्रिवन स्क्रूटनी फ्रेमवर्क को मजबूत करने के लिए किए गए हैं

ITR Forms AY 2026-27: वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने वाले करदाताओं को इस बार बदले हुए फॉर्म का सामना करना पड़ेगा। सरकार ने इस साल ITR-1 से लेकर ITR-4 तक के फॉर्म्स में कई बड़े और महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। कैपिटल गेन्स, ट्रेडिंग एक्टिविटी से लेकर बैंक बैलेंस और पॉलिटिकल डोनेशन तक के लिए अब आपको ज्यादा कड़े और डिटेल्ड खुलासे करने होंगे।

टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये बदलाव टैक्स विभाग के डेटा-ड्रिवन स्क्रूटनी फ्रेमवर्क को मजबूत करने के लिए किए गए हैं। अब विभाग आपके रिटर्न का मिलान एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS), TDS रिकॉर्ड और ब्रोकरेज रिपोर्ट से करेगा। ऐसे में थोड़ी सी भी मिसमैचिंग होने पर सीधे इनकम टैक्स का नोटिस आ सकता है। आइए जानते हैं इस बार के ITR फॉर्म्स में क्या-क्या बड़े बदलाव हुए हैं, जिन्हें सबमिट बटन दबाने से पहले चेक करना बेहद जरूरी है।

ITR-1 (सहज): मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा के लिए बदलाव


2 मकानों से होने वाली कमाई: अब अगर आपके पास दो हाउस प्रॉपर्टी हैं, तब भी आप ITR-1 फॉर्म के जरिए रिटर्न फाइल कर सकते हैं। पहले एक से ज्यादा प्रॉपर्टी होने पर ITR-2 फॉर्म भरना पड़ता था।

₹1.25 लाख तक का LTCG: लिस्टेड इक्विटी शेयरों या म्यूचुअल फंड्स से होने वाला लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (धारा 112A के तहत) अगर ₹1.25 लाख तक है, तो उसे अब ITR-1 में ही रिपोर्ट किया जा सकता है।

सेकेंडरी कांटेक्ट डिटेल्स: फॉर्म में अब एक अतिरिक्त कॉलम जोड़ा गया है, जहां टैक्सपेयर्स को अपना दूसरा पता, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी देना अनिवार्य होगा।

विदेशी पेंशन खाता: अगर आपको विदेश से पेंशन मिलती है, तो अब ITR-1 में विदेशी पेंशन खाते की पूरी डिटेल देने की जरूरत नहीं है।

ITR-2: कैपिटल गेन्स और बायबैक को लेकर कड़े नियम

बायबैक लॉस के लिए अलग कॉलम: शेयर बायबैक से होने वाले नुकसान को दिखाने के लिए फॉर्म में अलग से फील्ड जोड़ दिया गया है। ध्यान रहे कि 1 अप्रैल 2026 से शेयरों के बायबैक से मिलने वाली रकम को डीम्ड डिविडेंड के बजाय कैपिटल गेन्स के दायरे में टैक्स किया जाएगा।

कैपिटल गेन की पूरी जन्मकुंडली: अब एसेट के प्रकार के हिसाब से उसकी खरीद की तारीख, ट्रांसफर की तारीख, बिक्री की रकम और खरीद लागत जैसी हर छोटी-बड़ी जानकारी अलग-अलग देनी होगी।

विदेशी संपत्ति का ब्यौरा: भारतीय निवासियों के लिए विदेशी बैंक खाते, विदेशी शेयर या विदेश से होने वाली कमाई की जानकारी देना पहले की तरह ही अनिवार्य रहेगा।

ITR-3: F&O और इंट्राडे ट्रेडर्स के लिए नया नियम

ट्रेडिंग का अलग-अलग ब्यौरा: अगर आप शेयर बाजार में ट्रेडिंग करते हैं, तो अब आपको फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O), इंट्राडे इक्विटी ट्रेडिंग, कमोडिटी ट्रेडिंग और करेंसी ट्रेडिंग की कमाई या नुकसान को अलग-अलग खानों में दिखाना होगा।

ऑडिटर डिस्क्लोजर में राहत: टैक्स ऑडिट के दायरे में आने वाले करदाताओं के लिए ऑडिटर से जुड़े कुछ रिपोर्टिंग नियमों को आसान बनाया गया है ताकि अनुपालन का बोझ कम हो सके।

ITR-4 (सुगम): बैंक बैलेंस बताना हुआ अनिवार्य

31 मार्च 2026 का बैंक बैलेंस: ITR-4 भरने वाले करदाताओं के लिए सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब उन्हें 31 मार्च 2026 की तारीख तक अपने बैंक खातों में मौजूद कुल बैलेंस की अनिवार्य जानकारी देनी होगी।

हाउस प्रॉपर्टी और LTCG छूट: प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन (धारा 44AD/44ADA/44AE) चुनने वाले लोग भी अब दो हाउस प्रॉपर्टी की इनकम और ₹1.25 लाख तक का LTCG इस फॉर्म में दिखा सकेंगे।

पॉलिटिकल डोनेशन पर रहेगी पैनी नजर

चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के मुताबिक, हाल ही में कई करदाताओं को राजनीतिक दलों को दिए गए चंदे पर 100% टैक्स छूट क्लेम करने को लेकर नोटिस मिले थे, क्योंकि उन पार्टियों का रजिस्ट्रेशन रद्द हो चुका था। अब इस फर्जीवाड़े को रोकने के लिए ITR फॉर्म में एक नया कॉलम जोड़ा गया है, जहां आपको उस राजनीतिक दल का PAN नंबर भी दर्ज करना होगा।

ITR फाइल करने की आखिरी तारीखें भी बदलीं

टैक्सपेयर्स की कैटेगरी के हिसाब से इस बार डेडलाइन में कुछ बदलाव किए गए हैं:

सैलरीड क्लास: इनके लिए रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख हमेशा की तरह 31 जुलाई ही रहेगी।

नॉन-ऑडिट बिजनेस और F&O ट्रेडर्स: फ्यूचर एंड ऑप्शंस (F&O) से कमाई करने वालों को बिजनेस कैटेगरी में माना जाता है। इसलिए इस बार नॉन-ऑडिट बिजनेस और ट्रस्टों के लिए अंतिम तारीख को बढ़ाकर 31 अगस्त कर दिया गया है।

रिवाइज्ड रिटर्न: अगर आपसे रिटर्न में कोई गलती हो जाती है, तो लेट फीस देकर जनवरी 2027 से मार्च 2027 के बीच रिवाइज्ड रिटर्न भरने के लिए समय सीमा को संशोधित किया गया है। लेट फीस ₹1000 से ₹5000 के बीच होगी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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