मार्केट में बड़ी गिरावट आने पर भी निवेश जारी रखने से क्या होता है? जानिए मधुमति और दधवाल की दिलचस्प कहानी
इनवेस्टर्स गिरावट शुरू होने पर अपने शेयर बेचने लगते हैं। कई इनवेस्टर्स अपना सिप बंद कर देते हैं। वे निवेश जारी रखने की एक्सपर्ट्स की सलाह पर ध्यान नहीं देते। एक्सपर्ट्स का कहना है कि गिरावट के दौरान बाजार में टिके रहने वाले इनवेस्टर्स को तब शानदार रिटर्न मिलता है, जब बाजार में रिकवरी आती है
हर कुछ सालों पर बाजार निवेशकों की धैर्य की परीक्षा लेता रहता है।
शेयर बाजार में हर 2-4 साल बाद बड़ी गिरावट आती है। तब बाजार निवेशकों की धैर्य की परीक्षा लेता है। 2020 में कोविड की महामारी शुरू होने पर बाजार में बड़ी गिरावट आई। फिर, 2022 में रूस और यूक्रेन की लड़ाई शुरू होने के बाद दुनियाभर के बाजारों पर दबाव दिखा। हाल में अमेरिका-ईरान की लड़ाई की वजह से शेयर बाजार गिरा।
इनवेस्टर्स गिरावट में घबरा जाते हैें
ज्यादातर इनवेस्टर्स गिरावट शुरू होने पर अपने शेयर बेचने लगते हैं। कई इनवेस्टर्स अपना सिप बंद कर देते हैं। वे निवेश जारी रखने की एक्सपर्ट्स की सलाह पर ध्यान नहीं देते। एक्सपर्ट्स का कहना है कि गिरावट के दौरान बाजार में टिके रहने वाले इनवेस्टर्स को तब शानदार रिटर्न मिलता है, जब बाजार में रिकवरी आती है।
धैर्य रखने पर निवेश का इनाम
दो इनवेस्टर्स ने मनीकंट्रोल को निवेश के अपने सफर के बारे में बताया। पहले बात मधुमति सुंदरराज की। उन्होंने 2018 निवेश करना शुरू किया था। वह हर महीने 50,000 का निवेश करती थी। उनके दो बड़े लक्ष्य थे। पहला, वे खुद के लिए रिटायरमेंट फंड तैयार करना चाहती थीं। दूसरा, वह बच्चों के हायर एजुकेशन के लिए पैसे जुटाना चाहती थीं।
गिरावट में भी निवेश जारी रखने के फायदे
आज वह हर महीने 80,000 रुयये का निवेश कर रही हैं। हालांकि, कोविड शुरू होने पर उन्होंने भी अपने सिप का अमाउंट घटा दिया था। लेकिन, उन्होंने अपना सिप बंद नहीं किया। जैसे ही स्थितियां ठीक हुई, उन्होंने हर महीने 50,000 रुपये का निवेश फिर से शुरू कर दिया। बाद में इसे बढ़ाकर 80,000 रुपये कर दिया।
निवेश का लक्ष्य अनुशासन से पूरा होता है
आज निवेश के उनके सफर ने 7 साल पूरे कर लिया है। उन्होंने 4 करोड़ रुपये जुटाने के अपने टारगेट का करीब 20 फीसदी जुटा लिया है। वह बताती है कि निवेश के दौरान जिंदगी में उतार-चढ़ाव आता रहता है। ऐसा होने पर निवेश के अमाउंट को घटाया जा सकता है। लेकिन, निवेश बंद नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि बीते 5-6 सालों में बड़ी मुश्किलों के बावजूद मैं निवेश के अपने लक्ष्य को हासिल करने की तरफ बढ़ रही हूं।
बाजार इनवेस्टर्स की परीक्षा लेता रहता है
अब कहानी बीएस दधवाल की। उन्होंने 2016 में निवेश करना शुरू किया था। उनका लक्ष्य अपने दो बच्चों के हायर एजुकेशन के लिए बड़ा तैयार करना था। बाद में इसमें नई चीजें जुड़ती गईं। उन्होंने रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड तैयार करने के साथ ही बच्चों की शादी को भी लक्ष्य में शामिल कर लिया। कोविड की महामारी शुरू होने पर उनका आत्मविश्वास डगमगाने लगा। उनके कई दोस्तों ने सिप बंद कर दिए। लेकिन, दधवाल ने ऐसा नहीं किया।
इनकम बढ़ने पर निवेश का अमाउंट भी बढ़ाने के फायदे
दधवाल ने न सिर्फ निवेश करना जारी रखा बल्कि इनकम बढ़ने पर निवेश के अमाउंट को भी बढ़ाया। बीते एक दशक में उन्होंने अपना मंथली सिप अमाउंट 30-40 फीसदी तक बढ़ाया है। आज उनके दोनों बेटों के हायर एजुकेशन का लक्ष्य पूरा हो गया है। वह रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड तैयार करने के रास्ते पर बढ़ रहे हैं।
मुश्किल वक्त में भरोसा डगमगाने लगता है
वह बताते हैं कि मुश्किल वक्त आने पर उनका भरोसा भी डगमगाने लगा था। लेकिन, उन्होंने निवेश में अनुशासन बनाए रखा। आज उन्हें लगता है कि अगर उन्होंने निवेश रोक दिया होता तो निवेश के उनके मकसद पीछे छूट गए होते। उन्हें इस बात का संतोष है कि मुश्किल वक्त में भी उन्होंने अपना हौसला बनाए रखा। उन्होंने देखा कि मुश्किल आता है, फिर निकल जाता है।
घबरा कर निवेश बंद करने से होता है नुकसान
दोनों कहानियों से कुछ बातें स्पष्ट हो जाती हैं। पहला, बाजार में गिरावट आती रहती है। हर गिरावट के बाद रिकवरी आती है। दूसरा, निवेश में अनुशासन बनाए रखने पर उसका इनाम जरूर मिलता है। जो लोग बाजार में गिरावट से घबरा जाते हैं, वे लंबी अवधि में निवेश से बड़ा फंड तैयार करने का मौका चूक जाते हैं।